मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते पैदा हुए व्यवधानों के बीच, केंद्रीय कैबिनेट ‘भव्य’ औद्योगिक योजना (BHAVYA Industrial Initiative) को मंजूरी दे सकती है. NDTV Profit को आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की ओर से ये फैसला लेने की उम्मीद है.
बताया जा रहा है कि इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के दौर में भारत की घरेलू औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना और सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है, ताकि वैश्विक संकटों का भारतीय अर्थव्यवस्था और उत्पादन पर कम से कम असर पड़े.
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच क्यों अहम है भव्य योजना?
मौजूदा समय में हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री रास्तों पर संकट है. भारत अपनी कई औद्योगिक जरूरतों (जैसे पेट्रोकेमिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स) के लिए इन रास्तों पर निर्भर है. BHAVYA योजना के तहत सरकार उन वैकल्पिक रास्तों और स्थानीय विकल्पों पर काम करेगी, जिससे युद्ध की स्थिति में भी भारत की फैक्ट्रियां बंद न हों. ये योजना ‘चीन+1’ रणनीति को भी मजबूती देगी, जिससे दुनिया की बड़ी कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत को देखेंगी.
भव्य योजना क्या है?
भारत औद्योगिक विकास (BHAVYA) योजना का उद्देश्य देश के औद्योगिक ढांचे को मजबूत करना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को गति देना है. इस योजना का फोकस घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित करना और छोटे व मध्यम उद्योगों (MSME) को मजबूत करना है. इसके जरिए सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम करना चाहती है.
इस योजना के तहत संभावित तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक्स सुधार, और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर जोर दिया जा सकता है. साथ ही, उद्योगों को आसान ऋण, टैक्स इंसेंटिव और नीतिगत समर्थन देने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं. भव्य योजना को ‘मेक इन इंडिया’ और आत्म निर्भर भारत अभियान जैसी पहलों का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें खास तौर पर घरेलू उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ाने पर ध्यान होगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो यह भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है. हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इसके अंतिम स्वरूप और लागू करने के तरीके पर निर्भर करेगी.
FCRA में बदलाव पर भी मंथन
इसके अलावा सरकार विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों में संशोधन के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है. इसके तहत प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (FCRA) विधेयक 2026 पर फैसला संभव है. माना जा रहा है कि इस संशोधन के जरिए विदेशी चंदे की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा. कैबिनेट में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए प्रस्तावित लघु जल विद्युत विकास योजना को मंजूरी मिल सकती है. इस योजना का उद्देश्य छोटे जलविद्युत परियोजनाओं के विकास को बढ़ावा देना और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना है.
कृषि क्षेत्र से जुड़े एक अहम मुद्दे पर भी कैबिनेट में फैसला लिया जा सकता है. सरकार द्वारा कपास की खरीद में सरकारी वस्तुओं को हुए नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय पैकेज को मंजूरी मिलने की संभावना है. इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में हुए घाटे को संतुलित करना और किसानों के हितों की रक्षा करना है. इसके अलावा कैबिनेट बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत समझौतों पर भी चर्चा और निर्णय के लिए जा सकते हैं. माना जा रहा है कि बैठक के बाद सरकार की ओर से इन समझौतों की औपचारिक जानकारी दी जाएगी.