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ईरान जंग के आगे बेबस बाजार: सेंसेक्स 2400 अंक धड़ाम, मिनटों में ₹15,00,000 करोड़ हो गए स्वाहा………

UB India News by UB India News
March 10, 2026
in कारोबार
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शेयर बाजार ने हरे निशान में शुरू किया कारोबार,350 अंक चढ़कर 80,200 पर कारोबार कर रहा
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शेयर मार्केट में सोमवार को एक बार फिर भूचाल आ गया है, जहां बाजार के खुलने के महज 10 मिनट में निवेशकों की मेहनत की कमाई ₹15,00,000 करोड़ से ज्यादा की रकम देखते-देखते स्वाहा हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी से आई गिरावट ने छोटे-बड़े, नए-पुराने सभी निवेशकों को गहरी चोट पहुंचाई है। कुछ ही मिनटों में मार्केट कैप में लाखों करोड़ की भारी भरकम कमी आई, जिससे दालाल स्ट्रीट पर हाहाकार मच गया। ये गिरावट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीदों, सपनों और बचत पर सीधा वार है। कौन से स्टॉक्स सबसे ज्यादा डूबे? किन वजहों से बाजार इतनी तेजी से लुढ़का? और अब क्या होगा आगे? आइए जानते हैं उन प्रमुख स्टॉक्स की चर्चा करते हैं, जिन्होंने निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और बाजार को इस बार के सबसे बड़े झटके में धकेला।

सोमवार की सुबह बाजार में क्या हुआ?

सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी सदमे से कम नहीं रहा। सोमवार को सुबह-सुबह भारतीय शेयर बाजार में हुई भारी बिकवाली के कारण शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों को करीब 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका है। बेंचमार्क सूचकांक भारी बिकवाली के दबाव के साथ खुले। सेंसेक्स 2,320 अंकों का भारी गोता लगाकर 76,598 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी करीब 700 अंक टूटकर 23,764 पर पहुंच गया। बैंक निफ्टी में भी 2,288 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। रुपया भी शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 92.25 पर आ गया।

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भारतीय और वैश्विक बाजारों में इस तीव्र बिकवाली के पीछे पांच प्रमुख कारण ये रहे-

1. ईरान-इस्राइल युद्ध और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव

इस्राइल और ईरान के बीच मिसाइल हमले और तनाव चरम पर है। इस्राइल द्वारा तेहरान के एक तेल डिपो को निशाना बनाए जाने के बाद निवेशकों में दहशत फैल गई है। इसके अलावा, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख- जिसमें उन्होंने ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग की है और जमीनी हमले की भी चेतावनी दी है- ने वैश्विक अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।

2. कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल

युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से तेल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। कुवैत, यूएई और इराक जैसे प्रमुख देशों ने उत्पादन में भारी कटौती की है। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड में लगभग 20% से 24% की जोरदार उछाल आई और यह 110 से 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो जून 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। कतर के ऊर्जा मंत्री की इस चेतावनी ने कि कीमतें 150 डॉलर तक जा सकती हैं, बाज़ार की घबराहट को और बढ़ा दिया है।

3. विदेशी निवेशकों की निरंतर और भारी निकासी

भारतीय बाज़ार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का पलायन जारी है। शुक्रवार को FIIs ने कैश, इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स मिलाकर कुल 9,459 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की। यह लगातार छठा दिन है जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6,972 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा देने का प्रयास किया है, लेकिन विदेशी निकासी का दबाव हावी है।

4. वैश्विक बाजार में चौतरफा बिकवाली

कच्चे तेल और युद्ध का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ा है। एशियाई बाजारों में ऐतिहासिक गिरावट आई है; जापान का निक्केई (Nikkei 225 futures) 7.4% और टॉपिक्स (Topix) 5.8% गिर गया। ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 4.3%, हांगकांग का हैंग सेंग 2.9% और शंघाई कंपोजिट 1.3% तक टूटे हैं। अमेरिकी बाजारों में भी भारी दबाव है, जहां डाओ फ्यूचर्स में करीब 900 अंकों की गिरावट दिखी और एसएंडपी (S&P) 500 फ्यूचर्स 2.2% गिर गए।

5. सेक्टोरल बिकवाली और बढ़ता ‘फियर इंडेक्स’

बाजार में अनिश्चितता का अंदाजा ‘इंडिया विक्स’ (वोलैटिलिटी इंडेक्स) से लगाया जा सकता है, जिसमें 21% का तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 24.04 के स्तर पर पहुंच गया। घरेलू बाजार में पीएसयू बैंक 5%, ऑटो 4%, फाइनेंशियल 3.7%, मीडिया 3.4% और मेटल सेक्टर 3% गिर गए। एफएमसीजी, आईटी और फार्मा जैसे डिफेन्सिव सेक्टर्स में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है।

अब आगे क्या?

वैश्विक अनिश्चितता और इक्विटी बाजारों में मचे इस हाहाकार के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के ऊंचे स्तर 99.50 के पार निकल गया है और घरेलू बाजार में सोने व चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। जब तक मध्य पूर्व के कूटनीतिक हालात स्थिर नहीं होते और कच्चे तेल की सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताएं दूर नहीं होतीं, बाज़ार में यह दबाव और ‘रिस्क-ऑफ’ सेंटिमेंट बने रहने की पूरी संभावना है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयर ने लगाए गोते

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते सोमवार सुबह कारोबार के दौरान तेल विपणन कंपनियों और पेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। तेल कंपनियों के नतीजों में सबसे ज्यादा दबाव रहा। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर 8.67% गिर गए, जबकि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर 8.43% गिर गए। वहीं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नतीजों में 7.29% की गिरावट दर्ज की गई।

इस बीच वैश्विक तेल कीमतें ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया और यह 24.71% बढ़कर 112.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर पेंट कंपनियों के नतीजों पर भी पड़ा। एशियन पेंट्स के शेयर 5.12% गिर गए, जबकि इंडिगो पेंट्स में 4.83% की गिरावट आई। इसके अलावा बर्जर पेंट्स इंडिया के शेयर 4.80% और कंसाई नेरोलैक पेंट्स के शेयर 4.72% तक गिर गए।

लार्जकैप कैटेगरी के इन स्टॉक्स ने दिया जोरदार झटका

बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल स्टॉक्स आज सुबह के सत्र में तेज गिरावट के साथ लुढ़क गए। इनमें इंडिगो शेयर (8%), एसबीआई शेयर (5.90%), टाटा स्टील शेयर (4.99%), एशियन पेंट्स शेयर (4.71%), एलटी शेयर (4.7%), मारुति शेयर (4.67%), एक्सिस बैंक शेयर (4.02%) और अदानी पोर्ट्स शेयर (3.80%) फ्लिपकार्ट कारोबार कर रहे थे। वहीं मिडकैप में हिंदुस्तान पेट्रोलियम शेयर (7.20%), अशोक लेलैंड शेयर (5.10%), फेडरल बैंक शेयर (4.60%), भारत फोर्ज शेयर (4.50%), पेटीएम शेयर (4.40%) और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शेयर (3.80%) की गिरावट में कारोबार कर रहे थे।

स्टॉक मार्केट तहस-नहस

सोमवार को दोपहर 12 बजे बीएसई सेंसेक्स एक समय 1800.89 अंक की गिरावट के साथ 77,118.01 के लेवल पर कारोबार कर रहा था, जबकि एनएसई का निफ्टी 563.8 अंक की जोरदार गिरावट के साथ 23,886.65 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा।

बाजार को लेकर विशेषज्ञ ने क्या कहा?

शेयर बाजार विशेषज्ञ सुनील शाह का कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें वापस 75 डॉलर के आसपास नहीं आतीं और पश्चिम एशिया की स्थिति शांत नहीं होती या किसी प्रकार का समझौता नहीं हो जाता, तब तक बाजार का ऊपर जाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि बीच-बीच में तकनीकी उछाल (टेक्निकल रिबाउंड) देखने को मिल सकता है, लेकिन बाजार की मूल प्रवृत्ति (अंडरटोन) अभी भी कमजोर यानी बेयरिश बनी हुई है।

सुनील शाह के अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70–75 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का देश की जीडीपी वृद्धि पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि जीडीपी वृद्धि अनुमान के अनुरूप नहीं रहती है तो इसका असर कॉरपोरेट इंडिया पर भी पड़ता है। इससे कंपनियों की कमाई (कॉरपोरेट अर्निंग्स) और टॉप लाइन प्रभावित होती है। अगर ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ती है और कंपनियों की कमाई घटती है, तो इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ेगा और बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है।

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