एडवाइजरी में क्या कहा गया?
दूतावास ने लिखा, ‘ईरान में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर, भारतीय नागरिकों (छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक) को कमर्शियल फ्लाइट्स समेत सभी उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने की सलाह दी जाती है. 14 जनवरी 2026 की एडवाइजरी दोहराई जाती है कि सभी भारतीय नागरिक और PIO सतर्क रहें, विरोध प्रदर्शन या डेमॉन्स्ट्रेशन वाले इलाकों से दूर रहें, भारतीय दूतावास से संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें.’ दूतावास ने आगे कहा कि सभी भारतीयों को अपना पासपोर्ट, ID और अन्य ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स हमेशा तैयार रखने चाहिए. किसी भी मदद के लिए दूतावास से संपर्क करें.
भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिनसे दूतावास में संपर्क किया जा सकता है.
- +98 912 810 9115
- +98 912 810 9109
- +98 912 810 9102
- +98 993 217 9359
इसके अलावा ईमेल cons.tehran@mea.gov.in के जरिए भी कॉन्टैक्ट कर सकते हैं.
क्यों जारी हुई यह एडवाइजरी?
- ईरान में स्थिति: जनवरी 2026 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोग मारे गए थे, जिसके बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई की. फरवरी 2026 में विश्वविद्यालयों के फिर से खुलने के साथ छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध शुरू किया. तेहरान, मशहद और अन्य शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुई हैं.
- अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है. अमेरिकी सैन्य ताकतें क्षेत्र में इकट्ठा हो रही हैं और ट्रंप प्रशासन की ओर से संभावित हमलों की आशंका है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह एडवाइजरी अमेरिकी हमलों की आशंका के बीच आई है.
- पिछली एडवाइजरी: 5 जनवरी को MEA ने गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी. 14 जनवरी को दूतावास ने सतर्क रहने को कहा था. अब फरवरी में स्थिति और बिगड़ने पर ‘तुरंत निकलने’ की अपील की गई है.
मिडिल ईस्ट में तेजी से बदल रहे हालात……………..
अमेरिका क्या तैयारी कर रहा है?
ईरान ने क्या किया?
ईरान के जवाब से अमेरिका को क्यों डरना चाहिए?
- यमन के हूती विद्रोही : फिर से लाल सागर में पश्चिमी देशों के जहाजों पर हमला शुरू कर सकते हैं. इससे पश्चिमी देशों के जहाजों को लंबा रास्ता लेना पड़ेगा.
- हिजबुल्लाह (लेबनान): यूरोप या मिडिल ईस्ट में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं.
- इराकी मिलिशिया समूह: अमेरिकी बेस पर रॉकेट या ड्रोन हमले कर सकते हैं.
- खुफिया एजेंसियां यह भी मान रही हैं कि अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन भी मौके का फायदा उठा सकते हैं.
- हालांकि हमास पहले से कमजोर है. वहीं सीरिया में बशर अल-असद की सरकार गिर चुकी है, जिसने ईरान का प्रभाव कम किया है. हालांकि इराक और यमन जैसे इलाकों में ईरान का असर अभी भी काफी है.
अमेरिका के अंदर भी उठ रहे सवाल
अमेरिकी सीनेट के वरिष्ठ डेमोक्रेट नेता जैक रीड ने चेतावनी दी है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में बड़ी जंग छेड़ सकता है. उनका कहना है कि इससे अमेरिकी सैनिक खतरे में पड़ेंगे और वैश्विक बाजार भी हिल सकते हैं.







