यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच अबू धाबी में आज यानी शुक्रवार को त्रिपक्षीय वार्ता होने वाली है। यह 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तीनों देशों की पहली संयुक्त बैठक होगी। यह बैठक दो दिवसीय है।
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशर की मुलाकात के बाद यह बैठक तय हुई।
रूसी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई सैन्य खुफिया एजेंसी के निदेशक जनरल इगोर कोस्ट्यूकोव करेंगे। अबू धाबी में होने वाली बातचीत का पूरा एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। अभी तक यह भी साफ नहीं है कि रूसी और यूक्रेनी अधिकारी सीधे आमने-सामने मिलेंगे या नहीं।
दोनों पक्ष पहले भी कह चुके हैं कि जमीन का सवाल सबसे अहम है। खास तौर पर पुतिन की मांग है कि यूक्रेन डोनेत्स्क क्षेत्र का वह 20 प्रतिशत हिस्सा छोड़ दे जिस पर उसका अब भी नियंत्रण है। जेलेंस्की ने यह साफ कर दिया है कि 2022 से भारी नुकसान झेलते हुए जिस जमीन की रक्षा यूक्रेन ने की है, उसे वह नहीं छोड़ेगा।

सुरक्षा गारंटी और रूस के कब्जे वाले इलाकों को छोड़ने पर चर्चा संभव
यह अबू धाबी में होने वाली यूक्रेन, रूस और अमेरिका की त्रिपक्षीय बैठक बहुत खास है क्योंकि अब तक की ज्यादातर बातचीत अलग-अलग होती थी। यह युद्ध खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने का अनुमान है-
- क्षेत्रीय मुद्दे: सबसे बड़ा और कठिन मुद्दा। रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% हिस्से पर कब्जा कर रखा है। रूस मांग कर रहा है कि यूक्रेन बाकी हिस्से भी छोड़ दे और वर्तमान कब्जे को मान्यता दे।
- यूक्रेन की नाटो सदस्यता: रूस की मुख्य मांग है कि यूक्रेन नाटो जॉइन करने की महत्वाकांक्षा हमेशा के लिए छोड़ दे और शांति समझौते के बाद यूक्रेन में कोई नाटो सैनिक न रहें।
- सुरक्षा गारंटी: जेलेंस्की लम्बे समय से अमेरिका से सुरक्षा गारंटी की मांग कर रहे हैं।
- आर्थिक बहाली और पुनर्निर्माण: जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध के बाद यूक्रेन की बहाली में अमेरिका मदद करेगा।
- सैन्य स्तर पर चर्चा: युद्धविराम, सैनिकों की वापसी, कैदियों का आदान-प्रदान और ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने जैसे मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं।

ट्रम्प ने दावोस में जेलेंस्की से एक घंटे बात की
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को दोवास में जेलेंस्की से बात की। यह बैठक बंद कमरे में हुई और लगभग एक घंटे तक चली। इसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि पुतिन के लिए मेरा साफ संदेश है कि यूक्रेन जंग खत्म होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत अच्छी रही। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किन मुद्दों पर बात हुई। इससे एक दिन पहले ट्रम्प कह चुके थे कि युद्ध खत्म करने का समझौता अब काफी नजदीक है।
ट्रम्प ने कहा कि जेलेंस्की से आज की बातचीत एक चल रही प्रोसेस का हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के प्रतिनिधि गुरुवार को रूस की राजधानी मॉस्को में बातचीत के लिए जा रहे हैं।
जेलेंस्की बोले- सुरक्षा गारंटी पर दस्तावेज तैयार, सिर्फ हस्ताक्षर बाकी
NYT के मुताबिक, जेलेंस्की ने मुलाकात के बाद बताया कि सुरक्षा गारंटी पर दस्तावेज तैयार हो चुके हैं और अब सिर्फ हस्ताक्षर और दोनों देशों की संसदों से मंजूरी बाकी है। उन्होंने यूक्रेन की हवाई रक्षा को मजबूत करने के लिए और मिसाइलें भी मांगीं हैं।
ट्रम्प ने मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा कि बैठक अच्छी रही, लेकिन पिछली कई अच्छी बैठकों के बावजूद अभी तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पुतिन और जेलेंस्की दोनों समझौता चाहते हैं। ट्रम्प ने यूक्रेन के लोगों के कड़ाके की सर्दी में बिना हीटिंग और बिजली के रहने पर सहानुभूति जताई।
डोनबास इलाके को लेकर रूस-यूक्रेन में विवाद जारी
रूस पूरे डोनबास क्षेत्र पर कब्जा चाहता है, जबकि यूक्रेन उसे नहीं छोड़ना चाहता। अमेरिका ने समझौते के तौर पर यूक्रेन को प्रस्ताव दिया था अगर वह क्षेत्र छोड़ दे तो वहां फ्री इकोनॉमिक जोन बन सकता है।
हालांकि, यह व्यावहारिक रूप से कैसे काम करेगा, यह स्पष्ट नहीं है। ट्रम्प ने कहा, ‘यह अनसुलझा है, लेकिन बहुत करीब पहुंच गया है। यह एक बहुत कठिन मुद्दा है।’ ट्रम्प ने जेलेंस्की को बहादुर इंसान बताया और कहा कि उनके लोग भी बहादुर हैं।
रूस ने यूक्रेन के करीब 20% हिस्से, यानी लगभग 1 लाख 14 हजार 500 वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर रखा है। डोनबास के डोनेट्स्क और लुहांस्क के अलावा इसमें क्रीमिया, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
रूस इन क्षेत्रों को अपनी सामरिक और ऐतिहासिक धरोहर मानता है और इन्हें छोड़ने को तैयार नहीं है। पुतिन साफ कह चुके हैं कि यूक्रेन से शांति को लेकर बातचीत तभी हो सकती है जब यूक्रेन, रूस के कब्जाए गए क्षेत्रों से अपना दावा छोड़े और उन इलाकों को रूस के हिस्से के रूप में स्वीकार करें।
पुतिन की मांग NATO में शामिल न हो यूक्रेन
पुतिन डोनेट्स्क के बदले एक और प्रस्ताव रख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें यह इलाका मिल जाता है, तो वह दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में अपने मोर्चे को स्थिर कर देंगे। इसका मतलब यह होगा कि उनकी सेना वहां नए हमले करके और जमीन पर कब्जा करने की कोशिश नहीं करेगी।
पुतिन कई बार कह चुके हैं संघर्ष खत्म करने के लिए उनकी सबसे अहम शर्त यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की अनुमति नहीं देना है। पुतिन ने कहा कि अगर उन्हें इसका भरोसा हो जाए, तो वह बाकी मुद्दों पर समझौता करने को तैयार रहेंगे।
2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग
रूस-यूक्रेन जंग फरवरी, 2022 में शुरू हुई। दोनों देशों के बीच जंग की बड़ी वजह रूस का यूक्रेनी जमीन पर कब्जा है।
रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। युद्ध के कारण हजारों नागरिक और सैनिक मारे गए हैं, और लाखों यूक्रेनियन विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक, लगभग 8 मिलियन यूक्रेनियन देश छोड़कर भाग गए।
ट्रम्प ने युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठक की हैं। हाल ही में, उन्होंने पुतिन के साथ अलास्का में बैठक की, जो 80 वर्षों में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी।







