थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक बार फिर हिंसा भड़क गई है। सोमवार सुबह थाईलैंड ने कंबोडिया के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। थाईलैंड का कहना है कि उसने सिर्फ उन सैन्य ठिकानों एयरस्ट्राइक की है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ महीने पहले ही दोनों देशों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मौजूदगी में शांति समझौता हुआ था। उस वक्त पांच दिन चली लड़ाई में 30 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जबकि हजारों लोगों को घर छोड़ना पड़ा था।
थाईलैंड के मुताबिक कंबोडिया कई दिनों से सीमा पर भारी हथियार जमा कर रहा था और अपनी सेना को नई जगहों पर तैनात कर रहा था। इसी वजह से उन्हें हवाई हमला करना पड़ा।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से बॉर्डर पर मौजूद एक प्राचीन शिव मंदिर प्रीह विहियर (प्रिय विहार) और ता मुएन थॉम को लेकर विवाद है। यह मंदिर कंबोडिया की बॉर्डर में है, लेकिन आसपास की जमीन पर दोनों देश अपना अधिकार बताते हैं।
कुछ महीने पहले भी दोनों के बीच पांच दिन तक लड़ाई चली थी, जिसमें कई लोग मारे गए थे और लाखों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे।
जुलाई में हुई थी दोनों देशों के बीच जंग
बता दें कि इसी साल जुलाई में दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय विवादों के कारण पांच दिनों तक लड़ाई हुई थी,जिसमें दर्जनों सैनिक और नागरिक मारे गए थे। थाई सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल विंथाई सुवारी ने कहा कि कंबोडियाई सैनिकों ने हमारे कई इलाकों में पहले गोलीबारी की। उन्होंने कहा कि इस गोलीबारी में थाईलैंड का एक सैनिक मारा गया और चार अन्य सैनिक घायल हो गए। गोलीबारी के बीच प्रभावित इलाकों से नागरिकों को निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि थाईलैंड ने कंबोडियाई हमलों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाया और कंबोडिया के कई इलाकों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए विमानों का इस्तेमाल किया।
कंबोडिया ने थाईलैंड पर क्या आरोप लगाया?
उधर, कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचियाता ने कहा कि थाई सेना ने पहले कंबोडियाई सैनिकों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कंबोडिया ने सोमवार को शुरुआती हमलों के दौरान जवाबी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा, “कंबोडिया थाईलैंड से आग्रह करता है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता को खतरे में डालने वाली सभी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत बंद करे।”
क्या है विवाद?
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच 800 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर दशकों से विवाद बना हुआ है। दोनों देशों के बीच विवाद 1904-1907 के फ्रांसो-सियामी संधि के बाद पैदा हुआ, जब फ्रांस ने कंबोडिया (तत्कालीन फ्रेंच इंडोचाइना) और सियाम (आधुनिक थाईलैंड) के बीच बॉर्डर निर्धारित की थी।
इस संधि के आधार पर बॉर्डर को प्राकृतिक जल विभाजक रेखा के अनुसार खींचा गया, लेकिन थाईलैंड ने बाद में इन नक्शों को अस्वीकार कर दिया। 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने प्रेह विहार मंदिर को कंबोडिया को सौंप दिया, लेकिन थाईलैंड ने आसपास के क्षेत्रों पर दावा बनाए रखा। वर्ष 2008 में यूनेस्को द्वारा प्रेह विहार को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के बाद भी झड़पें हुईं, जिसमें दर्जनों मौतें हुईं। इस साल मई से लेकर जुलाई के दौरान बाॉर्डर पर हिंसक झड़प हुई। जुलाई में पांच दिनों तक दोनों देशों के बीच युद्ध चला। इस युद्ध में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बाद में ट्रंप की पहल पर दोनों देशों के बीच सीज फायर हुआ था।







