साल 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में धमाके हुए थे. इस घटना में 6 लोग मारे गए थे, जबकि 100 अन्य घायल हो गए थे. इस मामले में बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित समेत कई को आरोपी बनाया गया था. तकरीबन 17 साल बाद 31 जुलाई 2025 को एनआईए की विशेष अदालत ने मालेगांव ब्लास्ट मामले में अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. अब इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस और ATS के एक पूर्व अफसर ने सनसनीखेज खुलासा किया है. उनके दावे से खलबली मच गई है. उनका कहना है कि मालेगांव धमाका मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने और उन्हें अरेस्ट करने का आदेश मिला था. चौंकाने वाला दावा करने वाले अफसर का नाम महबूब मुजावर है.
महबूब मुजावर के परिवार का पुलिस डिपार्टमेंट से गहरा नाता रहा है. महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी महबूब मुजावर के पिता अब्दुल करीम पुलिस सब-इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुए. उनके दादा वर्ल्ड वॉर-II की जंग लड़ी थी. बाद में उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस में भी अपनी सेवाएं दी थीं. इस तरह महबूब मुजावर की फैमिली दो पीढ़ियों तक पुलिस से जुड़ी रही. मुजावर साल 1978 में बतौर कांस्टेबल महाराष्ट्र पुलिस में भर्ती हुए थे. उन्होंने साल 1983 में ऑफिसर की परीक्षा पास की और पुलिस सब-इंस्पेक्टर बन गए. साल 1984 में बतौर सब-इंस्पेक्टर सतारा में उन्हें पहली पोस्टिंग मिली थी. मुजावर का परिवार काफी समृद्ध और शिक्षित है. उनको तीन बेटा और दो बेटियां हैं. महबूब मुजावर के सभी संतान डॉक्टर हैं.
9 साल पहले भी मचाई थी हलचल
महबूब मुजावर ने तकरीबन 9 साल पहले भी एक दावा कर देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी. यह दावा भी मालेगांव धमाके से जुड़ा था. तब पुलिस इंस्पेक्टर रहे महबूब अब्दुल करीम मुजावर ने साल 2016 में सनसनीखेज खुलासा करते हुए दावा किया था कि 2008 के मालेगांव हमले के दो संदिग्धों को आठ साल पहले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (Maharashtra ATS) ने मार गिराया था. हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी. ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुजावर के सहयोगियों को उनपर संदेह रहा है. बता दें कि मुजावर के खिलाफ करप्शन और क्रिमिनल केस दर्ज किए गए थे. इस वजह से उन्हें सस्पेंड भी कर दिया गया था.
अप्रैल 2009 में महबूब मुजावर, उनकी पत्नी और बेटी को सोलापुर के सदर बाज़ार इलाके में एक बंगले में रहने वालों को बंदूक की नोक पर जबरन बेदखल करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया. मुजावर ने दावा किया कि उन्हें इन झूठे मामलों में इसलिए फंसाया गया, क्योंकि एटीएस को लगा कि उन्हें मालेगांव विस्फोट मामलों के बारे में बहुत कुछ पता है. मुजावर ने आरोप लगाया था कि उन्होंने (एटीएस) मेरे खिलाफ झूठे मामले बनाकर मुझे चुप कराने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि हालाकि 2011 में उन्हें सेवा में बहाल कर दिया गया था, लेकिन एसीबी ने उनकी पदोन्नति रोकने के लिए 2013 में उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने दावा किया, ‘अगर मुझे डीएसपी के पद पर पदोन्नत किया जाता, तो भ्रष्टाचार के मामलों में मुझ पर मुकदमा चलाने के लिए उन्हें सरकार (डीजीपी से नहीं) से अनुमति लेनी पड़ती.’ अब उन्होंने मोहन भागवत और मालेगांव मामले में दावा कर खलबली मचा दी है.







