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दूसरी तिमाही में हमारा जीडीपी ग्रोथ अनुमानों से कहीं कम

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की इकॉनमी सबसे तेजी से बढ़ रही है। लेकिन दूसरी तिमाही में हमारा जीडीपी ग्रोथ अनुमानों से कहीं कम रहा। इसके साथ ही कई दूसरे इकनॉमिक फैक्टर भी भारत के लिए चिंता पैदा करते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत भी चीन के रास्ते पर जा रहा है?

UB India News by UB India News
December 4, 2024
in कारोबार, खास खबर
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ग्लोबल चुनौतियों के बीच भारत का शानदार प्रदर्शन, पहली तिमाही में 13.5% GDP ग्रोथ
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भारत के लिए इकॉनमी के मोर्चे पर हाल में कई निराशाजनक खबरें आई हैं। दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ अनुमानों से कहीं कम रही है। रुपया रसातल में चला गया है जबकि महंगाई चरम पर है। नवंबर में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी तिमाही में कंपनियों के नतीजे भी निराशाजनक रहे। इससे शेयर बाजार में गिरावट आई है और विदेशी निवेशक पैसा निकालने में लगे हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति बनने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। क्या चीन के रास्ते पर जा रहा है भारत !

सुस्त पड़ी जीडीपी की रफ्तार

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देश की इकॉनमी दूसरी तिमाही में सुस्त पड़ गई। पिछले हफ्ते जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि घटकर 5.4% पर आ गई जो करीब दो साल में इसका निचला स्तर है। इससे पहले फाइनेंशियल ईयर 2022-23 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 4.3% था। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के खराब प्रदर्शन और खपत में मंदी के कारण देश की इकॉनमी की रफ्तार सुस्त पड़ी है। हालांकि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। जुलाई-सितंबर तिमाही में चीन को जीडीपी ग्रोथ रेट 4.6% था।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में बढ़कर 6.21% हो गई। यह इसका 14 महीने का उच्चतम स्तर है। सितंबर में यह 5.49% थी। मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों की कीमत बढ़ने के कारण महंगाई में उछाल आई है। पिछले साल अक्टूबर में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति 4.87 प्रतिशत थी। पिछले साल अगस्त के बाद यह पहला मौका है जब खुदरा महंगाई आरबीआई के टॉलरेंस बैंड के ऊपर चली गई है। महंगाई बढ़ने से आरबीआई के ब्याज दरों में कटौती की संभावना एक बार फिर क्षीण हो गई है।

रुपया रसातल मे

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में चार पैसे की गिरावट के साथ अपने सर्वकालिक निचले स्तर 84.76 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित होने से रुपये का यह हाल हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि रुपये में गिरावट की मुख्य वजह ट्रंप की ब्रिक्स करेंसी को लेकर दी गई चेतावनी, यूरोक्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर घरेलू समष्टि आर्थिक संकेतक और निरंतर विदेशी पूंजी की निकासी रही। रुपया सोमवार को 12 पैसे की गिरावट के साथ अपने सर्वकालिक निचले स्तर 84.72 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

ट्रंप की धमकी

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि यदि ब्रिक्स राष्ट्र अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने के लिए काम करते हैं तो उन देशों से आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। भारत ब्रिक्स का फाउंडिंग मेंबर है। वित्त वर्ष 2023-24 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा। पिछले वित्त वर्ष में भारत का निर्यात 77.51 अरब डॉलर रहा जबकि आयात 42.2 अरब डॉलर रहा। यानी अमेरिका के साथ भारत ट्रेड सरप्लस की स्थिति में है। ऐसे में ट्रंप की चेतावनी भारत के लिए चिंता का सबब हो सकती है।

मैन्यूफैक्चरिंग का बुरा हाल

नवंबर में भारत के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ गिरकर 56.5 पर आ गई। यह पिछले 11 महीने में सबसे कम है। ऑर्डर में धीमी बढ़ोतरी के बीच महंगाई के दबावों के कारण ग्रोथ सीमित रही। सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। एचएसबीसी इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अक्टूबर में 57.5 था जो नवंबर में 11 महीने के निचले स्तर 56.5 पर आ गया। PMI की भाषा में, 50 से ऊपर का आंकड़ा ग्रोथ को दिखाता है, जबकि 50 से नीचे का आंकड़ा गिरावट को।

चीन वर्सेज भारत

चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है। उसका साइज भारत से करीब पांच गुना ज्यादा है। लेकिन पिछले कुछ समय से चीन की इकॉनमी कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। रियल एस्टेट का बुरा हाल है, लोग पैसा खर्च करने के बजाय बचत करने में लगे हैं, अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर लगातार बढ़ रहा है, बेरोजगारी चरम पर है और विदेशी कंपनियां अपना बोरिया बिस्तर समेटने में लगी हैं। भारत में भी कुछ इसी तरह के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

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