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अमेरिका में क्यों हो रहा टी-20 वर्ल्ड कप !

UB India News by UB India News
May 30, 2024
in क्रिकेट, खास खबर
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अमेरिका में क्यों हो रहा टी-20 वर्ल्ड कप !
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ये साल 1751 का किस्सा है। ‘न्यूयॉर्क वीकली पोस्ट बॉय’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन और न्यूयॉर्क के बीच एक क्रिकेट मैच खेला गया। न्यूयॉर्क ने मैच जीत लिया। ये किस्सा उन लोगों के लिए है, जो अभी तक ये सवाल पूछ रहे हैं कि अमेरिका में टी-20 वर्ल्ड कप क्यों खेला जा रहा है।

2 जून से अमेरिका और वेस्टइंडीज की मेजबानी में नौवां टी-20 वर्ल्ड कप शुरू हो रहा है। वेस्टइंडीज में क्रिकेट की जड़ें गहरी हैं, लिहाजा उस पर कोई सवाल नहीं। लेकिन, अमेरिका की इस खेल में अब तक दखल न के बराबर है, फिर क्यों ICC इस टूर्नामेंट के 16 मैच अमेरिका में करा रहा है। इस सवाल का जवाब 5 फैक्टर्स से समझेंगे…

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सबसे पहले अमेरिका में क्रिकेट का थोड़ा और बैकग्राउंड

तस्वीर सेंट जॉर्ज क्रिकेट क्लब के प्लेयर्स की है। इन्हीं के क्लब में कनाडा और अमेरिका के बीच 24 से 26 सितंबर 1844 को पहला इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेला गया था।
तस्वीर सेंट जॉर्ज क्रिकेट क्लब के प्लेयर्स की है। इन्हीं के क्लब में कनाडा और अमेरिका के बीच 24 से 26 सितंबर 1844 को पहला इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेला गया था।

अमेरिका में क्रिकेट खेले जाने का सबसे पहला सबूत विलियम बायर्ड नाम के किसान की 1709 में लिखी डायरी से मिलता है। वे लिखते हैं, ‘सुबह 6 बजे उठकर हमने क्रिकेट खेला, मैं जीत गया।’ इस बात के भी सबूत हैं कि 1754 में अमेरिका के फाउंडिग फादर माने जाने वाले बेंजामिन फ्रैंकलिन क्रिकेट की रूलबुक इंग्लैंड से अमेरिका लाए थे। अमेरिकी सैनिक उस दौर में इसे क्रिकेट की जगह ‘विकेट्स’ कहते थे।

करीब 200 साल तक ये खेल अमेरिका में खूब फला-फूला। USA के 22 स्टेट्स में क्रिकेट खेला जा रहा था। 1844 में कनाडा और न्यूयॉर्क की टीम के बीच पहला इंटरनेशनल मैच खेला गया। 1849 में राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के भी शिकागो के एक क्रिकेट मैच में शामिल होने का जिक्र मिलता है। यहां तक कि इंग्लैंड-अमेरिका-कनाडा के बीच क्रिकेट राइवलरी के भी किस्से हैं।

हालांकि, 1919 में फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद अमेरिका में क्रिकेट के मुकाबले बेसबॉल पॉपुलर होता गया। क्रिकेट पूरे दिन खेले जाने वाला स्लो गेम माना गया। बेसबॉल प्लेयर बेब रूथ का फेमस होना अमेरिका में क्रिकेट के खत्म होने की वजह मानी जाती है। उन्हें अमेरिकी क्रिकेट के किलर की तरह भी देखा जाता है।

अब समझते हैं उन 5 फैक्टर्स को जिससे अमेरिका में क्रिकेट की घरवापसी हो रही है…

फैक्टर-1: अमेरिका में क्रिकेट टीमों का फैनबेस मौजूद
अमेरिका उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां दुनियाभर के लोग बसे हुए हैं। देश की आबादी 33 करोड़ से ज्यादा है है, जिनमें करीब 4.50 करोड़ लोग दूसरे देशों के यानी अप्रवासी हैं। इनमें भी 50 लाख साउथ एशियन हैं और करीब 1.50 करोड़ लोग उन देशों के हैं, जहां क्रिकेट की ऑडियंस ज्यादा है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, यूरोप और वेस्टइंडीज शामिल हैं। यानी अमेरिका में जो 16 मैच होंगे, वहां टॉप टीमों को सपोर्ट की कमी नहीं रहेगी।

न्यूयॉर्क में भारत-पाकिस्तान मैच 9 जून को होगा। इसके टिकट 80 हजार से 16 लाख रुपए तक में बिके। स्टेडियम की दर्शक क्षमता 34 हजार है और सभी टिकट लगभग बिक चुके हैं। टीम इंडिया न्यूयॉर्क में तीन और फ्लोरिडा में एक मैच खेलेगी, इनके भी सभी टिकट लगभग बिक चुके हैं।

खास बात ये भी कि अमेरिका में साउथ एशियन पॉपुलेशन के बढ़ने से ही क्रिकेट का चलन भी तेज हुआ। साल 2000 में अमेरिका में महज 2,000 रजिस्टर्ड क्रिकेटर्स थे, तब साउथ एशियन लोग 22 लाख थे। साल 2020 में साउथ एशियन पॉपुलेशन बढ़कर 55 लाख हुई, इससे रजिस्टर्ड क्रिकेटर्स का आंकड़ा भी 2.50 लाख तक पहुंच गया। साउथ एशिया में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देश आते हैं।

फैक्टर-2: अमेरिकन स्पोर्ट्स मार्केट
अमेरिका में क्रिकेट बहुत फेमस नहीं है। यहां रग्बी, बास्केटबॉल, आइस हॉकी, बेसबॉल और फुटबॉल जैसे स्पोर्ट्स का ही ट्रेंड है। सबसे ज्यादा कमाई करने वाली स्पोर्ट्स टीमों में डलास काउबॉय्ज पहले नंबर पर है, जो अमेरिकन फुटबॉल लीग की टीम है। टॉप-10 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टीमों में अमेरिका की 7 और इंग्लिश फुटबॉल की 3 टीमें शामिल हैं। ये 10 टीमें बास्केटबॉल, फुटबॉल और अमेरिकन फुटबॉल का हिस्सा ही हैं।

नेटवर्थ में टॉप-10 स्पोर्ट्स टीमें अमेरिका की ही हैं। डलास काउबॉय्ज इसमें भी टॉप पर है, टीम की सालाना नेटवर्थ करीब 3500 करोड़ रुपए है। इसके मुकाबले IPL की टॉप टीम मुंबई इंडियंस की नेट वर्थ 722 करोड़ रुपए ही है। यानी MI के मुकाबले डलास की कमाई करीब 5 गुना ज्यादा है। ब्रांड वैल्यू में टॉप-6 फ्रेंचाइजी लीग में भी अमेरिका की 4 लीग शामिल हैं।

फैक्टर-3: अमेरिकन इकोनॉमी
GDP के हिसाब अमेरिका दुनिया का सबसे अमीर देश है। यहां क्रिकेट बढ़ा तो इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल अमेरिका की बड़ी कम्पनियों को स्पॉन्सरशिप के लिए टारगेट करेगी। इससे इंटरनेशनल क्रिकेट में मनी-फ्लो तेजी से बढ़ जाएगा। फिलहाल क्रिकेट में सबसे ज्यादा पैसा भारतीय बोर्ड के पास है। अमेरिका में क्रिकेट सफल रहा तो ICC की कमाई भी BCCI को टक्कर देने की स्थिति में पहुंच सकती है।

अमेरिका में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए ICC ने टी-20 वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले यहां के फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट मेजर लीग क्रिकेट को लिस्ट-ए का दर्जा दिया। यानी MLC के आंकड़े अब खिलाड़ियों और टीमों के टी-20 रिकॉर्ड में काउंट होंगे।

ICC नियम के अनुसार, किसी एसोसिएट बोर्ड में होने वाली टी-20 लीग को लिस्ट-ए का दर्जा नहीं मिलता है। हालांकि, एसोसिएट बोर्ड अफगानिस्तान के फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट अफगानिस्तान प्रीमियर लीग के आंकड़े टी-20 रिकॉर्ड में नहीं गिने जाते। अमेरिका भी ICC का एसोसिएट बोर्ड ही है, लेकिन यहां क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए MLC को लिस्ट-ए की मान्यता दे दी गई है।

फैक्टर-4: ओलिंपिक में क्रिकेट का शामिल होना
2028 का ओलिंपिक अमेरिका में होगा, इसमें क्रिकेट शामिल है। टी-20 वर्ल्ड कप में 16 मैच होस्ट करने के बाद ये साफ हो जाएगा कि अमेरिका ओलिंपिक में भी क्रिकेट मैच अच्छे से ऑर्गनाइज करा लेगा। ओलिंपिक में 206 देश हिस्सा लेते हैं, क्रिकेट अब तक 103 देशों तक ही पहुंचा है। क्रिकेट के अमेरिका और ओलिंपिक में मिलने से खेल ग्लोबली बढ़ेगा।

अमेरिका और ओलिंपिक की मदद से ज्यादा देशों ने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो खेल फुटबॉल की बराबरी पर पहुंच सकता है। फिलहाल 200 से ज्यादा देशों में प्रोफेशनल फुटबॉल खेला जाता है। जबकि क्रिकेट खेलने वाले देश इससे आधे ही हैं।

फैक्टर-5: अमेरिका में क्रिकेट की ग्रोथ
अमेरिका ने पहला इंटरनेशनल मैच 1844 में जरूर खेला, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में ICC ने अमेरिकन टीम को मान्यता साल 2004 में दी। क्योंकि अमेरिका ने बीच के 159 सालों में कोई इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेला। देश ने टी-20 इंटरनेशनल भी 2019 में पहली बार खेला।

व्हाइट बॉल फॉर्मेट में अमेरिकन टीम 100 इंटरनेशनल मैच भी नहीं खेल सकी है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में देश ने क्रिकेट में अपनी पहचान बनाना शुरू कर दिया है। 2023 में यहां फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट मेजर लीग क्रिकेट की शुरुआत हुई। इसमें निकोलस पूरन, क्विंटन डी कॉक, हेनरिक क्लासन, आंद्रे रसेल, डेवोन कॉन्वे, मैथ्यू वेड जैसे टॉप क्रिकेटर्स ने हिस्सा लिया।

अमेरिका ने अपनी नेशनल टीम में भी पाकिस्तान के शयन जहांगीर, अली खान, भारत के मिलिंद कुमार, मोनांक पटेल और न्यूजीलैंड के कोरी एंडरसन जैसे प्लेयर्स को जगह दी है। जिनकी मदद से टीम ने बांग्लादेश को 3 टी-20 की सीरीज 2-1 से हरा दी।

अब वर्ल्ड कप में अमेरिकन टीम भारत, पाकिस्तान और आयरलैंड जैसी टीमों के खिलाफ ग्रुप स्टेज मैच खेलेगी। यहां टीम ने 1-2 मैच भी जीत लिए तो देश के युवा क्रिकेट खेलने के लिए इंस्पायर होंगे। इससे अमेरिका में क्रिकेट बढ़ने की संभावनाएं भी काफी हद तक बढ़ जाएंगी।

 

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