लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश ही देश की दिशा तय करता है, क्योंकि दिल्ली की सत्ता तक जाने वाला राजमार्ग यूपी से ही होकर गुजरता है. बीजेपी इस बार यूपी की सभी 80 सीटें जीतने का दावा कर रही है. 64 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है. समाजवादी पार्टी ने भी करीब 40 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए.
वहीं मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने 16 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. खास बात ये है कि इनमें से 7 मुस्लिम चहेरे हैं. ऐसे में सवाल है कि इस बार चुनाव में मायावती के प्रत्याक्षी किसे सबसे ज्यादा टेंशन दे रहे हैं और मुस्लिम प्रत्याक्षी के मायने क्या हैं. आइए समझते हैं.
पहले जानिए 2019 लोकसभा चुनाव का समीकरण
2019 लोकसभा चुनाव में मायावती ने समाजवादी पार्टी (एसपी) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के साथ मिलकर गठबंधन में चुनाव लड़ा थाय. मगर इस बार मायावती अकेली हैं. सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन हो गया है और आरएलडी बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है.
2019 चुनाव में यूपी में बीएसपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी उभर कर आयी थी. 19.43 फीसदी वोटों के साथ बीएसपी ने 10 सीटें जीती थीं. जबकि समाजवादी पार्टी सिर्फ 5 सीट ही जीत सकी थी. बीएसपी ने जीती थीं ये 10 सीटें- सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, अंबेडकर नगर, श्रीवस्ती, लालगंज, घोसी, जौनपुर, गाजीपुर.

2024 में बीएसपी कहां से कौन उम्मीदवार
मायावती के नेतृत्व वाली बीएसपी ने सात मुस्लिम उम्मीदवारों के अलावा अपनी पहली लिस्ट में आरक्षित सीटों से उच्च जाति के चार, ओबीसी समुदाय के दो और एससी के तीन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है.
बीएसपी के सात मुस्लिम प्रत्याशियों में सहारनपुर से माजिद अली, अमरोहा सीट से मुजाहिद हुसैन, मुरादाबाद से मोहम्मद इरफान सैफी, रामपुर से जीशान खान, संभल से शौलत अली, आंवला से आबिद अली, पीलीभीत से अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू शामिल हैं. इनमें में से चार सीटों (सहारनपुर, संभल, मुरादाबाद और अमरोहा) पर सपा-कांग्रेस गठबंधन ने भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं.
- बीएसपी के 2 ओबीसी चहेरे– मुजफ्फरनगर सीट से दारा सिंह प्रजापति, बिजनौर से जाट उम्मीदवार विजेंद्र सिंह
- उच्च जाति के 4 उम्मीदवार– कैराना से श्रीपाल सिंह, गौतमबुद्ध नगर से राजेंद्र सोलंकी, बागपत से प्रवीण बंसल, मेरठ से देववृत्त त्यागी
- एससी सीटों पर 3 उम्मीदवार– नगीना से सुरेंद्र पाल सिंह, शाहजहांपुर से दोदराम वर्मा, बुलंदशहर से गिरीश चंद्र जाटव
2019 चुनाव में दस विनिंग सीटों में से अभी मायावती ने चार पर ही उम्मीदवार का ऐलान किया है. इनमें से पार्टी ने तीन सहारनपुर, नगीना और बिजनौर में अपने मौजूदा सांसदों को बदल दिया है. जबकि अमरोहा के सांसद दानिश अली को पार्टी से निष्कासित कर दिया था, बाद में कांग्रेस ने इसी सीट से उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया.
4 सीटों पर सपा-कांग्रेस की BSP से टक्कर
चुनाव में सपा-कांग्रेस की बीएसपी के उन उम्मीदवारों से टक्कर देखने को मिल सकती है जहां दोनों पक्ष ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं. कांग्रेस ने सहारनपुर और अमरोहा सीट पर इमरान मसूद और दानिश अली को टिकट दिया है. ये दोनों ही नेता पहले बसपा में थे.
वहीं अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा ने अपने मौजूदा लोकसभा सांसद एसटी हसन पर एक बार फिर भरोसा जताया है. उन्हें मुरादाबाद से अपना उम्मीदवार घोषित किया है. संभल सीट से शफीकुर रहमान बर्क के पोते जिया-उर रहमान को पहले ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था.
मायावती किसे दे रहीं सबसे ज्यादा टेंशन
मायावती ने हमेशा ही चुनाव में अल्पसंख्यक या मुसलमान उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. मुस्लिम बहुल सीट पर बसपा और सपा दोनों ही पार्टी मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर वोट शेयर का फायदा उठाना चाहती हैं. मगर इस बार दोनों ही पार्टियां एक दूसरे खिलाफ चुनावी मैदान में हैं, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है.
राजनीतिक विश्लेषक राकेश शुक्ला ने एबीपी न्यूज से कहा, ‘मायावती ने मजबूत मुस्लिम नेताओं को टिकट देकर कहीं न कहीं सपा और कांग्रेस के लिए चुनाव में मुश्किल खड़ी कर दी है. बसपा जिस तरह से उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रही है ऐसा लग रहा है इंडिया गठबंधन को एनडीए से ज्यादा मायावती से खतरा है. शायद इसलिए कांग्रेस ने बसपा को इंडिया गठबंधन में शामिल करने की पूरी कोशिश की थी. लेकिन मायावती ने अकेले चुनाव लड़ने की ठानी.’
बीजेपी के लिए बी-टीम की तरह काम कर रही हैं मायावती?
मायावती पर अक्सर बीजेपी की टीम होने के आरोप लगते रहे हैं. उम्मीदवारों की घोषणा के बाद सपा नेता फखरुल हसन चांद ने कहा, ‘2022 यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी और बसपा में अघोषित गठबंधन था. ये गठबंधन 2024 चुनाव में भी जारी है. जिन सीटों पर विपक्ष मजबूत है उन पर कैसे बीजेपी को फायदा पहुंचाया जा सकें, वोट कटवा प्रत्याक्षी मैदान में उतारा जा सके, ये ध्यान में रखते हुए बसपा ने अपनी लिस्ट जारी की है.’
राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्रा का कहना है कि मायावती बीजेपी के लिए बी-टीम की तरह काम कर रही हैं. सहारनपुर, रामपुर, पीलीभीत में अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारा है. ये सीट ऐसी हैं कि जहां अगर अल्पसंख्यक उम्मीदवार थोड़े थोड़े वोट भी काटेगा तो बीजेपी के लिए ये सीट जीतना आसान हो जाएगी.
वहीं बीजेपी नेता राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि मायावती शुरुआत से जिस तरह की राजनीति करती आ रही हैं ये भी वही वोट बैंक की राजनीति है.
लगातार घट रहा है बसपा का वोट शेयर
मायावती के पास यूपी के 22 फीसदी दलितों का वोट बैंक है. ये वोट बैंक बीजेपी, सपा, कांग्रेस और चंद्रशेखर आजाद अपने पाले में करना चाहते हैं. ये दलित समुदाय के लोग दो हिस्से में बंटे हैं. एक जाटव (12%), दूसरा गैर जाटव (10%). मायावती जाटव समुदाय से आती हैं. ये बहुजन समाज पार्टी का हार्ड कोर वोटर माना जाता है.
हालांकि अब बसपा का वोट शेयर लगातार गिरता जा रहा है. 2009 लोकसभा चुनाव में बसपा का राज्य में 27.4 फीसदी वोट शेयर था. 2014 और 2019 चुनाव में ये घटकर ये 19 फीसदी रह गया था. वहीं 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में तो घटकर 12.8 फीसदी रह गया.
2014 लोकसभा चुनाव में बसपा अकेले चुनाव लड़ीं थी, तब 19 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर मिला था मगर एक भी सीट जीत नहीं सकी थी. 2019 में सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा तो भी 19 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर मिला और साथ में 10 सीटें भी जीत लीं. अब 2024 में मायावती एक बार फिर अकेले खड़ी हैं. इस बार ये देखना दिलचस्प होगा कि मायावती की पार्टी अकेले कितनी सीट जीत पाएगी और कितनी सीटों पर वोट काटेगी.







