उत्तराखंड की उत्तरकाशी टनल में 41 मजदूरों के फंसे होने का आज 11वां दिन हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे बड़ी उम्मीद अब ऑगर मशीन है। बुधवार को ऑगर मशीन की ड्रिलिंग में सफलता मिली। ऑगर मशीन के सामने रुकावट नहीं आई। अब तक ऑगर मशीन से 27 मीटर ड्रिलिंग करके 800 एमएम का पाइप टनल में डाला जा चुका है।
रेस्क्यू में जुटे एक्सपर्ट का कहना है कि अगर ऑगर मशीन के सामने रुकावट नहीं आई तो रेस्क्यू 2-3 दिन में पूरा हो सकता है। सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात यहां ड्रिलिंग हुई। वहीं, अंदर फंसे मजदूरों ने नमक की मांग की है। ऑगर मशीन से ड्रिलिंग के अलावा रेस्क्यू के दूसरे प्लान पर भी काम किया जा रहा है।
टनल में वर्टिकल ड्रिलिंग आज से शुरू हो सकती है। ओडिशा और गुजरात से आने वाली वर्टिकल ड्रिलिंग मशीनों के भी पहुंचने की उम्मीद। टनल की साइड से ड्रिफ्ट कर भी रास्ता बनाया जा रहा है। इसमें 10-12 दिन लगने की उम्मीद है। वहीं, डंडालगांव की ओर से छोटे ब्लास्ट कर ड्रिलिंग की जा रही है। हालांकि, यहां से सुरंग बनने में 30-35 दिन लगने की उम्मीद है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन टनल में फंसे 41 श्रमिकों को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चल रहा है. मंगलवार को सुरंग के अंदर से मजदूरों की वीडियो सामने आने के बाद उम्मीदें बढ़ गई हैं. वीडियो में मजदूर सुरक्षित दिखाई दिए. पीएम नरेंद्र मोदी भी रेस्क्यू ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं और लगातार अपडेट ले रहे हैं. बुधवार (22 नवबंर) को पीएम मोदी ने फिर सीएम धामी को फोन करके जानकारी ली.
सीएम पुष्कर धामी ने इस बारे में एक्स पर पोस्ट कर बताया, “प्रधानमंत्री मोदी ने आज फोन पर बात कर सिलक्यारा, उत्तरकाशी में निर्माणाधीन टनल में फंसे श्रमिकों के लिए भोजन, दवाइयां, अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति एवं उन्हें सकुशल बाहर निकालने हेतु चल रहे बचाव कार्यों की जानकारी ली.”
पीएम मोदी ले रहे पल-पल की जानकारी
उन्होंने आगे बताया, “प्रधानमंत्री को केंद्रीय एजेंसियों, अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट्स एवं प्रदेश प्रशासन के परस्पर समन्वय के साथ संचालित बचाव कार्यों से अवगत कराया, इस दौरान उन्हें गत 24 घंटों में हुई सकारात्मक प्रगति एवं श्रमिकों और उनके परिजनों की बातचीत से बढ़े मनोबल की भी जानकारी दी. प्रधानमंत्री का इस कठिन परिस्थिति से निपटने हेतु निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है जो हम सभी को पूरी ताकत से श्रमिक भाइयों को शीघ्र और सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नित नई उर्जा प्रदान करता है.”
36 मीटर तक सुरंग में पाइप डाला
ऑगर मशीन के जरिए रातभर ड्रिलिंग का काम चलता रहा. अब तक 36 मीटर पाइप पुश किया जा चुका है. रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले 35-40 घंटे में मजदूरों का बाहर निकालने में सफलता मिल सकती है. सुरंग के बाहर एंबुलेंस का भी इंतजाम कर लिया गया है. 40 एंबुलेंस सुरंग के बाहर पहुंच गई हैं.
कैमरे से मजदूरों पर नजर
इससे पहले सोमवार शाम को टनल में एक छह इंच का पाइप भी डाला गया था, जिससे मजदूरों के लिए प्लास्टिक की बोतलों में खिचड़ी भेजी गई थी. यहां से लगातार उनके पास खाना और पानी भेजा जा रहा है. अंदर कैमरा भी भेजा गया जिसके जरिए मजदूरों पर निगरानी रखी जा रही है और उनसे वॉकी टॉकी के जरिए बात भी हो रही है. उनके परिजनों से भी बात कराई जा रही है ताकि उनका हौसला बना रहे.
अभी वर्टिकल ड्रिलिंग के अलावा तीन अहम प्लान पर काम किया जा रहा है…
पहला प्लान: सबसे तेज ऑप्शन ऑगर मशीन का है। रुकावट नहीं आई तो दो-ढाई दिन में सुरंग बन जाएगी। इसमें मलबा आने का खतरा है। इसलिए दूसरी ओर से ड्रिलिंग की मशीनें बुलाई गई हैं। अगर ऑगर के रास्ते में हार्ड रॉक और स्टील आए तो उनको काटने का भी इंतजाम है।
दूसरा प्लान: दूसरा सबसे तेज ऑप्शन सिलक्यारा टनल को दोनों साइड से खोदकर रास्ता बनाने का है। इसमें 12-15 दिन लग सकते हैं।
तीसरा प्लान: सबसे लंबा तरीका डंडालगांव से टनल खोदना है। इसमें 35-40 दिन लग सकते हैं।
अब तक क्या हुआ?
21 नवंबर: एंडोस्कोपी के जरिए कैमरा अंदर भेजा गया और फंसे हुए मजदूरों की तस्वीर पहली बार सामने आई। उनसे बात भी की गई। सभी मजदूर ठीक हैं। मजदूरों तक 6 इंच की नई पाइपलाइन के जरिए खाना पहुंचाने में सफलता मिली। ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू हुई। केंद्र सरकार की ओर से 3 रेस्क्यू प्लान बताए गए। पहला- ऑगर मशीन के सामने रुकावट नहीं आई तो रेस्क्यू में 2 से 3 दिन लगेंगे। दूसरा- टनल की साइड से खुदाई करके मजदूरों को निकालने में 10-15 दिन लगेंगे। तीसरा- डंडालगांव से टनल खोदने में 35-40 दिन लगेंगे।
20 नवंबर: इंटरनेशनल टनलिंग एक्सपर्ट ऑर्नल्ड डिक्स ने उत्तरकाशी पहुंचकर सर्वे किया और वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए 2 स्पॉट फाइनल किए। मजदूरों को खाना देने के लिए 6 इंच की नई पाइपलाइन डालने में सफलता मिली। ऑगर मशीन के साथ काम कर रहे मजदूरों के रेस्क्यू के लिए रेस्क्यू टनल बनाई गई। BRO ने सिलक्यारा के पास वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए सड़क बनाने का काम पूरा किया।
19 नवंबर: सुबह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उत्तराखंड CM पुष्कर धामी उत्तरकाशी पहुंचे, रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और फंसे लोगों के परिजनों को आश्वासन दिया। शाम चार बजे सिलक्यारा एंड से ड्रिलिंग दोबारा शुरू हुई। खाना पहुंचाने के लिए एक और टनल बनाने की शुरुआत हुई। टनल में जहां से मलबा गिरा है, वहां से छोटा रोबोट भेजकर खाना भेजने या रेस्क्यू टनल बनाने का प्लान बना।
18 नवंबर: दिनभर ड्रिलिंग का काम रुका रहा। खाने की कमी से फंसे मजदूरों ने कमजोरी की शिकायत की। PMO के सलाहकार भास्कर खुल्बे और डिप्टी सेक्रेटरी मंगेश घिल्डियाल उत्तरकाशी पहुंचे। पांच जगहों से ड्रिलिंग की योजना बनी।
17 नवंबर: सुबह दो मजदूरों की तबीयत बिगड़ी। उन्हें दवा दी गई। दोपहर 12 बजे हैवी ऑगर मशीन के रास्ते में पत्थर आने से ड्रिलिंग रुकी। मशीन से टनल के अंदर 24 मीटर पाइप डाला गया। नई ऑगर मशीन रात में इंदौर से देहरादून पहुंची, जिसे उत्तरकाशी के लिए भेजा गया। रात में टनल को दूसरी जगह से ऊपर से काटकर फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्वे किया गया।
16 नवंबर: 200 हॉर्स पावर वाली हैवी अमेरिकन ड्रिलिंग मशीन ऑगर का इंस्टॉलेशन पूरा हुआ। शाम 8 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू हुआ। रात में टनल के अंदर 18 मीटर पाइप डाले गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन की रिव्यू मीटिंग की।
15 नवंबर: रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत कुछ देर ड्रिल करने के बाद ऑगर मशीन के कुछ पार्ट्स खराब हो गए। टनल के बाहर मजदूरों की पुलिस से झड़प हुई। वे रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी से नाराज थे। PMO के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली से एयरफोर्स का हरक्यूलिस विमान हैवी ऑगर मशीन लेकर चिल्यानीसौड़ हेलीपैड पहुंचा। ये पार्ट्स विमान में ही फंस गए, जिन्हें तीन घंटे बाद निकाला जा सका।
14 नवंबर: टनल में लगातार मिट्टी धंसने से नॉर्वे और थाईलैंड के एक्सपर्ट्स से सलाह ली गई। ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रोलिक जैक को काम में लगाया। लेकिन लगातार मलबा आने से 900 एमएम यानी करीब 35 इंच मोटे पाइप डालकर मजदूरों को बाहर निकालने का प्लान बना। इसके लिए ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रोलिक जैक की मदद ली गई लेकिन ये मशीनें भी असफल हो गईं।
13 नवंबर: शाम तक टनल के अंदर से 25 मीटर तक मिट्टी के अंदर पाइप लाइन डाली जाने लगी। दोबारा मलबा आने से 20 मीटर बाद ही काम रोकना पड़ा। तब से मजदूरों को पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन और खाना-पानी मुहैया कराया जा रहा है।
12 नवंबर: सुबह 4 बजे टनल में मलबा गिरना शुरू हुआ तो 5.30 बजे तक मेन गेट से 200 मीटर अंदर तक भारी मात्रा में जमा हो गया। टनल से पानी निकालने के लिए बिछाए गए पाइप ऑक्सीजन, दवा, भोजन और पानी अंदर भेजा जाने लगा। बचाव कार्य में NDRF, ITBP और BRO को लगाया गया। 35 हॉर्स पावर की ऑगर मशीन से 15 मीटर तक मलबा हटा।
12 नवंबर सुबह 4 बजे धंसी टनल
सिलक्यारा टनल हादसा 12 नवंबर की सुबह 4 बजे हुआ था। टनल के एंट्री पॉइंट से 200 मीटर अंदर 60 मीटर तक मिट्टी धंसी। इसमें 41 मजदूर अंदर फंस गए। रेस्क्यू के दौरान 16 नवंबर को टनल से और पत्थर गिरे जिसकी वजह से मलबा कुल 70 मीटर तक फैला गया। टनल के अंदर फंसे मजदूर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हैं।







