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इजरायल-हमास युद्ध का 36वां दिन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इजरायल से किया युद्धविराम का आग्रह

UB India News by UB India News
November 12, 2023
in अन्तर्राष्ट्रीय
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इजराइल और हमास की जंग का आज 14वां दिन , इजराइली हमले में गाजा का 900 साल पुराना चर्च तबाह

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इजरायल-हमास युद्ध का आज 36वां दिन है। इजरायली सेना गाजा में ताबड़तोड़ मिसाइल हमले कर रही है। इजरायली सेना के हवाई हमले में रिहाइशी इलाकों से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आतंकियों के ठिकाने सब ध्वस्त हो रहे हैं। कई मिसाइलें शरणार्थी शिविरों को भी निशाना बना रही हैं। शरणार्थी शिविरों में मिसाइलों और हवाई हमले में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। मगर अब इन शिविरों में रह रहे लोगों की मुख्य जंग रोटी, कपड़े और पानी के लिए है। पानी और रोटी के इंतजार में कई-कई घंटे तक लोग लाइनों में लगे हैं। भूख के आगे उनके दिल में बैठा मिसाइलों के खौफ की हवाइयां उड़ गई हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि इजरायल द्वारा गाजा के नागरिकों पर बमबारी का “कोई औचित्य नहीं” था. इस बमबारी से हुई मौतें “आक्रोश” पैदा कर रही हैं. उन्होंने कहा, “इन बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों पर बमबारी की गई और उन्हें मार दिया गया है. इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा, ” युद्धविराम से इज़रायल को फायदा होगा.हमारे सिद्धांतों के कारण यह हम सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम लोकतांत्रिक हैं.  मध्य से दीर्घावधि के साथ-साथ इज़रायल की सुरक्षा के लिए भी यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि सभी का जीवन मायने रखता है.”
अब इजराइल और फिलस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास के बीच जारी युद्ध के मध्य हालात ये हैं कि लोग रोटी लेने के लिए कतारों में झगड़ रहे हैं। खारे पानी की एक-एक बाल्टी लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। साथ ही खचाखच भरे शिविरों में खुजली, दस्त और सांस संबंधी संक्रमण से जूझ रहे हैं। दीर अल-बलाह शहर में संयुक्त राष्ट्र के एक शिविर में राहत कार्यों में लगी एक महिला और पांच बच्चों की मां सुजैन वाहिदी ने कहा, ” मेरे बच्चे भूख से रो रहे हैं और थक चुके हैं। यहां तक की वे शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर सकते।” दीर अल-बलाह शिविर में सैकड़ों लोगों को एक ही शौचालय का प्रयोग करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ”मेरे पास उनके लिए कुछ नहीं है।’

गाजा में करीब 11 हजार लोगों की हो चुकी मौत

इजराइल-हमास के बीच युद्ध के दूसरे महीने में अब तक गाजा में करीब 11 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही यहां फंसे हुए लोगों को बिना बिजली और पानी के जीवित रहने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उत्तरी गाजा में इजराइल के जमीनी हमले से बचकर भागने में कामयाब रहे फलस्तीनी लोगों को अब दक्षिण क्षेत्र में भोजन और दवा की कमी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों पर बिन बुलाए आई इस मुसीबत का फिलहाल कोई अंत होता नहीं दिख रहा है, जो हमास के इजराइल पर सात अक्टूबर को हमले के बाद से शरू हुई है। पांच लाख से ज्यादा लोग दक्षिण के अस्पतालों और संयुक्त राष्ट्र के स्कूलों से शिविरों में तब्दील हुए इमारतों में खचाखच भरे हुए हैं। कूड़े के ढेर और उनपर मंडराते हुए मच्छर-मक्खियों ने इन स्कूलों को संक्रमाक बीमारियों का स्थल बना दिया।

रोटी-पानी की जंग पड़ रही मिसाइलों पर भारी

वैसे तो शरणार्थियों के दिलों में मिसाइलों और हवाई हमलों का खौफ हर वक्त रहता था। पता नहीं कब, कहां और किधर से कोई मिसाइल या बम गिरे और उनकी जिंदगी एक पल में खत्म हो जाए। मगर भूख ऐसी होती है कि उसके आगे सब बेकार होता है। इसलिए लाइनों में भोजन और पानी के लिए लाइनों में लगे लोगों के दिल से मिसाइलों का खौफ अब गायब है।  युद्ध की शुरुआत से ही मदद के लिए सैकड़ों की संख्या में ट्रकों ने दक्षिणी रफा के माध्यम से गाजा में प्रवेश किया लेकिन राहत संगठनों का कहना है कि यह मदद समुद्र में एक बूंद के बराबर है। रोटी और पानी की तलाश में घंटों-घंटों कतारों में खड़े रहना अब रोजाना का किस्सा हो गया है। गाजा का सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो गया है, जिसने दशकों तक संघर्ष, इजराइल के साथ चार युद्ध और फलस्तीनी बलों से सत्ता छीनने वाले हमास के बाद 16 साल तक प्रतिबंधों को झेला है। दक्षिणी शहर खान यूनुस में ‘नॉर्वे रिफ्यूजी काउंसिल’ में राहत कार्यों से जुड़े शख्स यूसुफ हम्माश ने कहा,
”आप जहां भी जाएंगे आपको सिर्फ लोगों की आंखों में पीड़ा ही दिखाई देगी।” उन्होंने कहा,‘‘ आप कह सकते हैं कि वे अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।

खंडहर हो चुका शहर

सुपरमार्केट जैसी बड़ी दुकानें लगभग खाली हो चुकी हैं। आटा और ओवन के लिए ईंधन की कमी की वजह से बेकरी बंद हो गई हैं। गाजा के खेतों तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया है और प्याज व संतरे के अलावा ज्यादातर चीजें बाजारों से नदारद हैं। बहुत से परिवार सड़कों पर ही आग जलाकर दाल पका रहे हैं। दक्षिणी शहर रफा के एक शिविर में रह रहे फोटोग्राफर अहमद कंज (28) ने कहा, ”रात के वक्त आप बच्चों को मिठाइयों और गर्म खाने के लिए रोते हुए सुन सकते हैं। मुझे नींद नहीं आती।” बहुत से लोगों का कहना है कि उन्हें मांस, अंडे खाए और दूध पिए हफ्तों गुजर चुके हैं और नौबत यह है कि अब दिन में सिर्फ एक बार खाने को ही मिलता है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम की प्रवक्ता आलिया जकी ने कहा, ”लोगों पर कुपोषण और भूख से मरने का वास्तविक खतरा मंडरा रहा है।
” उन्होंने कहा कि राहत कार्यों से जुड़े लोग जिस ‘खाद्य असुरक्षा’ की बात करते हैं, गाजा के 23 लाख लोगों पर उसका खतरा मंडरा रहा है। गाजा शहर से भागकर दीर अल बलाह आने वाली 59 वर्षीय इताफ जामला ने कहा, ”मैंने अपने बेटों को बेकरी भेजा था और आठ घंटे बाद वे शरीर पर चोट के निशान लेकर पहुं‍चे। कभी-कभार तो खाने के लिए ब्रेड तक नहीं मिलती है। ” इताफ, दीर अल बलाह के एक खचाखच भरे अस्पताल में अपने परिवार के 15 सदस्यों के साथ रहती हैं। फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी की प्रवक्ता जुलिएट टौमा ने कहा, ”जिस सामाजिक ताने-बाने के लिए गाजा मशहूर था वो आज चिंता और अनिश्चितता से टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

इजरायल हमास युद्ध पिछले एक महीने से अधिक समय से लगातार जारी है. इजरायल-हमास युद्ध में हमास शासित गाजा में 11,000 से अधिक फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई है.वहीं, इजरायल में 1,400 से अधिक लोग मारे गए हैं .इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन द्वारा गाजा में बढ़ती मौतों के बीच नागरिकों पर बमबारी रोकने का आह्वान किया. हालाकि इसके बावजूद इजरायल ने हमले तेज कर दिए हैं.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि इजरायल द्वारा गाजा के नागरिकों पर बमबारी का “कोई औचित्य नहीं” था. इस बमबारी से हुई मौतें “आक्रोश” पैदा कर रही हैं. उन्होंने कहा, “इन बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों पर बमबारी की गई और उन्हें मार दिया गया है.”
  2. इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा, ” युद्धविराम से इज़रायल को फायदा होगा.हमारे सिद्धांतों के कारण यह हम सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम लोकतांत्रिक हैं.  मध्य से दीर्घावधि के साथ-साथ इज़रायल की सुरक्षा के लिए भी यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि सभी का जीवन मायने रखता है.”
  3. वहीं, हमास के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने युद्धविराम से इनकार करते हुए कहा, “हमास के साथ युद्धविराम का मतलब आत्मसमर्पण है.” उन्होंने कहा कि नागरिकों को किसी भी तरह के नुकसान की जिम्मेदारी हमास की है, इजरायल की नहीं.
  4. नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि इजरायल की फिलिस्तीनी क्षेत्र पर दोबारा कब्जा करने की योजना नहीं है, बल्कि वह इसे बेहतर भविष्य देना चाहता है. उन्होंने कहा, “गरीब और नाकाबंदी वाले क्षेत्र को” विसैन्यीकृत, कट्टरपंथ मुक्त और पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए.
  5. बता दें कि घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्र में युद्ध, जिसे प्रभावी ढंग से सील कर दिया गया है, ने नागरिकों के जीवन की रक्षा और अधिक मानवीय सहायता की अनुमति देने को लेकर युद्धविराम के लिए बार-बार आह्वान किया है.
  6. फिलिस्तीनियों ने कहा कि शुक्रवार को गाजा के सबसे बड़े अस्पताल परिसर पर एक घातक हमला हुआ. जिससे हजारों लोगों को आश्रय देने वाली चिकित्सा सुविधाएं इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष में फंस गईं. इज़रायली सेना ने बार-बार हमास पर अपने हमलों के लिए अस्पतालों, विशेषकर अल-शिफ़ा का उपयोग करने का आरोप लगाया है.
  7.  इजरायल-हमास  के बीच युद्ध पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडनोम घेबियस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि गाजा में स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा गई है.
  8. रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति ने कहा, “अत्यधिक खिंची हुई, कम आपूर्ति पर चल रही और तेजी से असुरक्षित, गाजा में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली ऐसे बिंदु पर पहुंच गई है जहां से वापसी संभव नहीं है.”
  9. 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद गाजा में एक महीने से अधिक समय से लड़ाई जारी है, जिसमें 1,400 से अधिक लोग मारे गए और 239 लोगों को बंधक बना लिया गया. हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जवाबी हवाई बमबारी और जमीनी हमले में गाजा में 11,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें ज्यादातर नागरिक और उनमें से कई बच्चे हैं.
  10. इस संघर्ष ने क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ा दिया है, साथ ही इजरायली सेना और लेबनान के हिजबुल्लाह के बीच सीमा पार आदान-प्रदान भी हुआ है. यमन के ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने दक्षिणी इज़रायल पर “बैलिस्टिक मिसाइलें” लॉन्च की हैं.
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