केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने नई संसद की लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश कर दिया है. पीएम मोदी ने इस बिल को नारी शक्ति अधिनियम नाम दिया है. वहीं कांग्रेस और विपक्ष के नेता लोकसभा में हंगामा काट रहे हैं.
लोकसभा में नारी शक्ति वंदन बिल पेश कर दिया गया है, उधर विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया है. विपक्ष का कहना है कि बिना बिल को सर्कुलेट किए हुए पेश कैसे कर दिया गया. जिस पर कानून मंत्री ने कहा कि बिल वेबसाइट पर अपलोड हो चुका है. बिल को जब सदन में इंट्रोड्यूस किया जाता है तो पहले कॉपी को सांसदों को देना जरूरी रहता है. विपक्ष इसी बात पर सवाल उठा रहा है.
लोकसभा की 181 सीटें हो जाएंगी महिलाओं के लिए आरक्षित
‘नारी शक्ति वंदन बिल’ के पास होने के बाद लोकसभा की 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। इसके अलावा विधानसभाओं की भी 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
कानून मंत्री ने लोकसभा में पेश किया ‘नारी शक्ति वंदन बिल’
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पेश कर दिया है। इस बिल को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ नाम दिया गया है। इस बिल के तहत लोकसभा एवं विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है।
अधीर के भाषण के बीच में बोले अमित शाह, कहा- ये गलत तथ्य रख रहे हैं
अधीर के भाषण के बीच में उठकर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उनके द्वारा रखे गए तथ्य गलत हैं। महिला आरक्षण बिल कभी लोकसभा में पास नहीं हुआ। वह अपनी बात को वापस लें।
अधीर के भाषण के बीच में बोले अमित शाह, कहा- ये गलत तथ्य रख रहे हैं
अधीर के भाषण के बीच में उठकर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उनके द्वारा रखे गए तथ्य गलत हैं। महिला आरक्षण बिल कभी लोकसभा में पास नहीं हुआ। वह अपनी बात को वापस लें।
27 साल तक क्यों लटका ये बिल?
महिला आरक्षण बिल बीते 27 सालों से लटका हुआ था। सबसे पहले साल 1996 में देवेगौड़ा की सरकार इसे लाई थी, फिर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय साल 1998,1999 और 2002 में भी महिला आरक्षण का बिल लाया गया। साल 1998 में तो लालू यादव की पार्टी ने बिल की कॉपी लाल कृष्ण आडवाणी के हाथ से छीन कर फाड़ दी थी और बिल पेश करने का विरोध किया था।
इसके बाद डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार ने 2008 में इसे राज्यसभा में पेश किया। उस वक्त बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी में भेज दिया गया, फिर इस बिल को 2010 में राज्यसभा ने पारित कर दिया लेकिन इस बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया, तब से बिल लटका हुआ था।
मोदी सरकार में बिल पास होने की कितनी संभावना?
दरअसल पिछली सरकारें या तो गठबंधन में बनी थीं या फिर राजनीतिक दलों में विल पावर की कमी थी। मोदी सरकार एक पूर्ण बहुमत की सरकार है, इसलिए उसे लोकसभा में इसे पास करवाने में विशेष समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। मोदी सरकार में कई अहम बिल पहले ही पेश किए जा चुके हैं, जिसमें आर्टिकिल 370, GST, आर्थिक आधार पर गरीबों को 10 प्रतिशत का रिजर्वेशन देने वाले बिल शामिल हैं।
विरोधी दल भी ये बात जानते हैं कि ये बिल पास होना संभव है, इसलिए वो अपने-अपने मुद्दे तो उठा रहे हैं लेकिन महिला रिजर्वेशन का विरोध कोई नहीं कर रहा है। दरअसल विरोधी दल ये कभी नहीं चाहेंगे कि इसका क्रेडिट पीएम मोदी को मिले।







