अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन शुक्रवार शाम G20 समिट के लिए भारत पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात पर PMO ने कहा कि कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई है। दोनों नेता इस बात पर फोकस्ड थे कि भारत और अमेरिका के रिश्ते और मजबूत किए जाएं। जो बाइडेन ने अमेरिका से 31 ड्रोन खरीदने के लिए भारत के रक्षा मंत्रालय से अनुरोध पत्र (रिक्वेस्ट लेटर) जारी करने का स्वागत किया भी किया।
बाइडेन से मुलाकात के बाद मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा- प्रेसिडेंट बाइडेन को 7 लोक कल्याण मार्ग पर रिसीव करके खुश हूं। हमारी मुलाकात काफी सार्थक रही। हमने कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। दोनों देशों के बीच आर्थिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ेगा। इसके साथ ही दोनों देशों के लोगों के बीच भी संपर्क बढ़ेगा।
इसके पहले बाइडेन के पालम एयरपोर्ट पर उतरने के बाद केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने उन्हें रिसीव किया। बाइडेन इसके बाद भारत में अमेरिकी ऐंबैस्डर एरिक गार्सेटी और उनकी बेटी माया से भी मिले।
अमेरिका के NSA जैक सुलीवान ने बताया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। इस दौरान छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों पर समझौता हो सकता है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच GE जेट इंजन डील पर भी बात आगे बढ़ सकती है।
मोदी और बाइडेन का जॉइंट स्टेटमेंट
- बाइडेन ने कहा कि भारत की G20 की अध्यक्षता बताती है कि ये फोरम कैसे अहम नतीजे दे सकता है। वहीं, मोदी-बाइडेन ने G20 के प्रति कमिटमेंट दोहराया और विश्वास जताया कि समिट अपने उद्देश्यों में सफल होगा।
- मोदी-बाइडेन दोनों ने कहा कि उनकी सरकारें इंडो-US स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप पर काम करते रहेंगी। साथ ही दोनों ने स्वतंत्र, खुले, समावेशी और लचीले इंडो-पैसिफिक का समर्थन करने में क्वाड की अहमियत बताई।
- PM मोदी और प्रेसिडेंट बाइडेन ने भरोसा दिया कि हम ग्लोबली सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए मिल-जुलकर काम करेंगे। साथ ही भारत और अमेरिका रक्षा क्षेत्र में पार्टनरशिप के लिए प्रतिबद्ध हैं।

व्हाइट हाउस के मुताबिक मोदी-बाइडेन गरीबी से लड़ने के लिए वर्ल्ड बैंक सहित दूसरे मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक की क्षमता बढ़ाने और कई दूसरे ग्लोबल चैलेंज पर भी बात करेंगे।
बाइडेन भारत आने वाले अमेरिका के 8वें राष्ट्रपति हैं। खास बात ये है कि भारत की आजादी के शुरुआती 50 साल में केवल 3 अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आए थे। वहीं, पिछले 23 सालों में ये किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का छठा दौरा होगा।
जानिए पिछले 77 सालों में किस तरह बदले भारत-अमेरिका के रिश्ते …
ड्वाइट आइजनहावर (दिसंबर 1959)
ड्वाइट आइजनहावर भारत का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। दौरा ऐसे वक्त पर हुआ था जब भारत भयंकर सूखे से उबर रहा था और देश में महंगाई अपने चरम पर थी। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और फॉरेन एक्सचेंज बेहद कम था।
दूसरी तरफ दुनिया में चल रहे शीत युद्ध के बीच भारत ने अमेरिका और सोवियत यूनियन, दोनों में किसी का भी साथ नहीं देने का फैसला किया था। वो उन 120 देशों में शामिल था, जिन्होंने 1961 में नॉन-अलाइंड मूवमेंट पर साइन किए थे।

हालांकि, दुनिया में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल से परे भारत अपनी सीमा पर चीन के साथ तनाव झेल रहा था। ऐसे में अमेरिका ने भारत को चीन के खिलाफ साथी के रूप में देखा। आइजनहावर की यात्रा के वक्त न्यू ऑर्लीन्स टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति और तत्कालीन PM नेहरू के बीच भारत-चीन सीमा विवाद पर चर्चा हुई थी।
वहीं सैन फ्रांसिस्को क्रॉनिकल ने कहा था कि आइजनहावर से मुलाकात के बाद एक रात में भारत गुट-निरपेक्ष से पश्चिमी समर्थक बन गया। वहीं द मिनट न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा था कि नेहरू अब चीन के खिलाफ एक्शन लेने के लिए तैयार हैं।
रिचर्ड निक्सन (अगस्त 1969)
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन भारत में सिर्फ 23 घंटे रुके थे। निक्सन पाकिस्तानी सपोर्टर थे और वो भारत की गुटनिरपेक्ष नीति के खिलाफ थे। उस वक्त अमेरिका का मानना था कि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। वो भारत को सोवियत संघ की कठपुतली मानते थे।
अल जजीरा के मुताबिक, रिचर्ड के इस दौरे का फोकस इंदिरा गांधी से रिश्ते सुधारना था। दरअसल, वो भारत और इंदिरा गांधी को लेकर कई मौकों पर रेसिस्ट कमेंट कर चुके थे। राष्ट्रपति बनने से पहले 1960 के दशक में जब निक्सन भारत आए थे तब नेहरू सरकार के सीनियर मिनिस्टर मोरारजी देसाई ने उनका स्वागत किया था।
देसाई ने निक्सन के लिए खाने में सिर्फ वेजिटेरियन डिश ही रखी थीं, जबकि निक्सन नॉन-वेज और अल्कोहल के खासा शौकीन थे। देसाई की खातिरदारी से नाराज होकर निक्सन भारत से चले गए थे। उनके दौरे में अगला स्टॉप पाकिस्तान था। यहां उनके स्वागत में कई तरह के गोश्त और दूसरी नॉन-वेज डिश रखी गई थीं। इससे निक्सन पाकिस्तान से और प्रभावित हो गए थे।
इसके बाद जब बांग्लादेश के पाकिस्तान से अलग होने पर 1971 में जंग हुई तो अमेरिका में रिचर्ड निक्सन राष्ट्रपति बन चुके थे। उन्होंने इस वॉर में पाकिस्तान का साथ दिया था।







