मणिपुर में 3 मई की रात को हिंसा भड़की थी. 2 महीने पूरे हो गए हैं. राज्य और केंद्र सरकार दोनों शांति के लिए प्रयास कर रहे हैं. लेकिन, हिंसा है कि थमने का नाम नहीं ले रही. मंगलवार, 5 जुलाई को मणिपुर के थौबल जिले में संघर्ष देखने को मिला. भीड़ ने कथित तौर पर इंडियन रिजर्व फोर्स (IRB) के एक कैंप से हथियार और गोला-बारूद लूटने की कोशिश की. भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने हवाई फायरिंग की, जिसमें 27 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई. इस पूरी झड़प के दौरान असम राइफल्स के एक जवान के पैर में भी गोली लगी है.
आजतक से जुड़े अनुपम मिश्रा की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि भीड़ ने हथियार और गोला-बारूद लूटने के लिए खंगाबोक इलाके में तीसरी आईआरबी बटालियन के शिविर पर हमला करने की कोशिश की. भीड़ ने सेना के वाहन को भी आग लगा दी. सुरक्षाबलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया. जैसे ही सशस्त्र भीड़ ने गोलियां चलाईं, सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की.
इस दौरान एक युवक को गोली लगी. युवक का नाम रोनाल्डो है, जिसे गोली लगने के बाद तुरंत थौबल जिला अस्पताल ले जाया गया, उसकी हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टर्स ने उसे इंफाल के एक अस्पताल में रेफर कर दिया, जहां ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. 10 अन्य लोग घायल भी हुए हैं. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है.
4 जुलाई को मणिपुर के थौबल जिले के खंगाबोक में इंडिया रिजर्व बटालियन से हथियार लूटने के प्रयास को सुरक्षाबलों ने विफल कर दिया. दंगाईयों को रोकने के प्रयास में एक दंगाई मारा गया, जबकि कुछ अन्य घायल हो गए. भीड़ ने अतिरिक्त बलों की आवाजाही को रोकने के लिए नाकेबंदी कर दी थी. हालांकि, असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स की अतिरिक्त टुकड़ियों ने स्थिति को नियंत्रण किया.
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में 3 मई को पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद राज्य में पहली बार हिंसा भड़क उठी. अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई सौ लोग घायल हुए हैं. हिंसा से बचने के लिए हजारों लोगों ने राहत शिविरों में शरण ले रखी है.







