वीर सावरकर, जिन्हें विनायक दामोदर सावरकर भी कहा जाता है, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, कवि, लेखक और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख व्यक्तियों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त की है। यहां वीर सावरकर के दस महान कार्यों का वर्णन किया गया है…
अपने वीर सपूत पर नाज कर रही होगी भारत माता
विनायक दामोदर सावरकर यानी वीर सावरकर महान स्वतंत्रता सेनानी, कवि, लेखक और राजनीतिज्ञ थे। आज उनकी 150वीं जयंती है। आज ही देश को नया संसद भवन मिलने जा रहा है।
सावरकर ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने 1904 में ‘अभिनव भारत’ नामक गुप्त समाज स्थापित किया, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य को खत्म करके भारत को आजाद कराना था।
दोहरा आजीवन कारावास
मॉर्ले-मिंटो सुधार का विरोध करने के कारण 1909 में ब्रिटिश सरकार ने सावरकर को गिरफ्तार कर लिया। 1911 में उन्हें 50 वर्ष की अवधि की दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप स्थित सेल्युलर जेल भेजा गया, जहां उन्हें जीते जी नरक की यातना झेलनी पड़ी। इसे ही कालापानी की सजा कहते हैं।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का सिद्धांत
सबसे पहले वीर सावरकर ने ही 1857 के सिपाही विद्रोह को ब्रिटिशों के खिलाफ भारत का ‘पहला स्वतंत्रता संग्राम’ घोषित किया था। उन्होंने 1857 के विद्रोह को भारतीयों के भावना को झकझोरने और भविष्य की पीढ़ियों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देनेवाला बताया।
प्रखर राष्ट्रवाद के प्रणेता
सावरकर भारतीय राष्ट्रवाद के प्रखर प्रणेता थे। उनका राष्ट्रवाद सर्वसमावेशी था ना कि विभाजनकारी जैसा उनके विरोधी लांछन लगाते हैं। सावरकर ने हिंदू, मुस्लिम, सिख समेत अन्य समुदायों की एकता पर जोर दिया और स्वतंत्रता के लिए एकजुट भारत के महत्व को समझाया।
लेखक, कवि, चिंतक
सावरकर एक प्रख्यात लेखक थे। उन्होंने कई प्रभावशाली कृतियां प्रकाशित कीं, जिनमें ‘पहला स्वतंत्रता संग्राम’, ‘हिंदुत्व: कौन हिंदू है?’ और ‘भारतीय इतिहास के छः महान युग’ शामिल हैं। उनकी रचनाओं ने अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया और स्वतंत्रता और स्वाधीनता को लेकर जागरूक किया।
महिला अधिकारों के प्रबल समर्थक
सावरकर महिला अधिकारों और समानता के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने महिलाओं के स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी की प्रशंसा की और उनकी शिक्षा और सामाजिक उत्थान को समर्थन दिया।
समाज सुधार के अग्रदूत
सावरकर ने राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ बहुआयामी सामाजिक सुधारों के लिए काम किया। उन्होंने छुआछूत और जातिवाद का घोर विरोध किया। सावरक ने भारतीय समाज में जाति व्यवस्था के खिलाफ पुरजोर अभियान चलाया। उन्होंने समानता, बंधुत्व और सामाजिक न्याय पर आधारित समाज बनाने की कोशिश की।
हिंदुत्व के प्रखर पैरोकार
सावरकर को हिंदूत्व की विचारधारा के संस्थापकों में से एक माना जाता है, जो हिंदू धर्म के सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी पहलुओं पर जोर देती है। उन्होंने इस विचारधारा को आकार दिया और हिंदुओं के संघर्ष के लिए सैद्धांतिक आधार प्रदान किया। वो हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने भारत के विभाजन का पुरजोर विरोध किया।
विदेश में भारतीय छात्रों के प्रति कार्य
इंग्लैंड में रहते हुए सावरकर ने भारतीय छात्रों की सहायता करने और भारतीय स्वतंत्रता के मुद्दे को प्रचारित करने के लिए ‘फ्री इंडिया सोसायटी’ स्थापित की। उन्होंने विदेश में रह रहे भारतीय राष्ट्रवादियों का नेटवर्क बनाने और भारत की आजादी के बारे में अंतरराष्ट्रीय जागरूकता को बढ़ाने की कोशिश की।







