लोजपा रामविलास ने बिहार में शराबबंदी के बाद होम्योपैथी चिकित्सकों के सामने उत्पन्न हुई समस्या के खिलाफ आवाज बुलंद की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान का कहना है कि जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने होम्योपैथ और आयुर्वेद के बढते वर्चस्व और लोकप्रियता को देखते हुए अलग से आयुष मंत्रालय का गठन किया‚ वहीं शराबबंदी की आड में बिहार सरकार प्रदेश से होम्योपैथ चिकित्सा पद्धति को खत्म करने का षड्यंत्र रच रही है। प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि होम्योपैथ एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है‚ जिस पर भारत के लोग लंबे समय से विश्वास करते आ रहे हैं। यह सस्ती और सुलभ चिकित्सा पद्धति है‚ जिससे गरीब–गुरबा को कम खर्च में बडी राहत पहुंचती है।
मीडिया प्रभारी निशांत मिश्रा ने बताया कि चिराग पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने २०१६ में शराबबंदी कानून लागू किया‚ लेकिन शराब तो बंद हुई नहीं‚ होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली प्रभावित हो गई। श्री चिराग ने कहा कि सबको पता है कि एलोपैथ हो या होम्योपैथ एक सीमित मात्रा में इन सबमें अल्कोहलिक कंटेट का इस्तेमाल किया जाता है। होम्योपैथ में तो स्पिरिट एक मुख्य संघटक होता है‚ जिसके लिए बाकायदा लाइसेंस भी प्रदान किया जाता है‚ लेकिन शायद सरकार को इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार शराबबंदी पर अपनी नाकामी को छिपाने के लिए जहरीली शराब से हुई हत्याओं का जिम्मेदार होम्योपैथी चिकित्सकों को ठहरा रही है। सरकार अवैध शराब के कारोबार और कारोबारियों पर नकेल नहीं कस पा रही है‚ तो जनता को गुमराह करने के लिए वह होम्योपैथ चिकित्सकों को टारगेट कर रही है। सरकार के इस निराधार कदम से होम्योपैथी चिकित्सकों और इस चिकित्सा प्रणाली दोनों का नाम खराब हो रहा है। श्री पासवान ने कहा कि सरकार पूरी तरह से बिहार से होम्योपैथ को खत्म कर देना चाहती है।







