मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानना है कि रेलवे का बजट अलग से होना चाहिये‚ क्योंकि आने–जाने को लेकर एक–एक लोग को रेलवे में रुचि रहती है। शुक्रवार को समाधान यात्रा के क्रम में नालंदा जिले का भ्रमण कर विभिन्न विभागों के अंतर्गत चल रही विकास योजनाओं का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों द्वारा केंद्र सरकार की ओर से कैम्प लगाकर नौकरी देने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयीजी की सरकार में रेल मंत्री थे‚ तो हमने रेलवे में काफी तादाद में युवकों को नौकरी दिलवायी थी। हमलोगों ने रेलवे को काफी विकसित किया था। रेलवे में युवाओं को नौकरी मिलनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि रेलवे बजट पर जब सदन में चर्चा होती थी‚ तो रात भर सदन को चलाना पडता था। हम जितने दिन केंद्र सरकार में मंत्री रहे‚ तो बजट के समय रात भर सदन में चर्चा होती थी। इसको लेकर उस समय काफी चर्चा होती थी। संसद के सभी सदस्य इस पर अपनी राय रखते थे। रेलवे का काफी महत्व है। हमलोग तो चाहते हैं कि रेलवे का बजट अलग से हो। आने–जाने को लेकर एक–एक लोगों को रेलवे में रुचि रहती है। सीएम ने कहा कि आबादी बढी है‚ तो रेलवे को और आगे बढाना जरूरी है। युवाओं की बहाली होनी ही चाहिए। हमलोग तो चाहते हैं कि पहले की तरह रेलवे का अलग से बजट होना चाहिए। पता नहीं क्या इनलोगों को हुआ कि रेलवे को आम बजट के साथ मिला दिया गया। पहले रेलवे बजट की पूरे देश में चर्चा होती थी। रेलवे बजट में सभी पार्टी के संसद सदस्य हिस्सा लेते थे। केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में हमलोग जब काम करते थे‚ तो सभी लोग उसको पसंद करते थे। सभी लोगों को बैठाकर उनका काम करते थे। ऐसा करने में मुझे काफी खुशी होती थी। इन सब चीजों को याद रखना जरूरी है। हमलोग सब दिन श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयीजी को याद रखेंगे। उनके प्रति मेरा हमेशा सम्मान रहेगा। आपलोग कभी लालकृष्ण आडवाणी जी से भी पूछ लीजिये।
जाति आधारित गणना पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि जाति आधारित गणना लोगों के हित में है। लोगों के विकास के लिए ही राज्य में यह काम करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत लोग समझ रहे थे कि फैसला इसके विपरीत आयेगा‚ जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके पक्ष में अपना फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि जाति आधारित गणना सबके हित में है। यह केंद्र सरकार का काम है‚ हमलोग जाति आधारित गणना करवा रहे हैं। हमलोग अपने राज्य में एक–एक चीज की जानकारी के लिए इसे कर रहे हैं। हमलोग सभी लोगों की आर्थिक स्थिति की जानकारी चाहते हैं। जब एक–एक चीज की जानकारी होगी‚ तो विकास के काम को आगे बढाने में सुविधा होगी। कैसे लोगों की मदद करें‚ कैसे लोगों को आगे बढायें‚ इसी मकसद से जाति आधारित गणना करवायी जा रही है। इसे सभी पार्टी की सहमति से करवायी जा रही है। हमने अखबार में देखा था कि बिहारशरीफ के ही किसी व्यक्ति ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।







