सौ वर्षों से ज्यादा पुरानी कांग्रेस पार्टी के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि कांग्रेस का इतिहास ही देश की आजादी का इतिहास है‚ लेकिन कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को देखकर अब यह कहा जा सकता है कि वह इस समय अपनी विचारधारा‚ अपने संगठन‚ अपनी गुणात्मकता या अपने राजनीतिक कौशल के आधार पर जीवित नहीं है‚ बल्कि मोदी विरोधी तत्व पर जीवित है। अभी हाल ही में एक चुनावी सर्वेक्षण में बताया गया है कि यदि आज लोक सभा के चुनाव हो जाएं तो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को ४० फीसद से ज्यादा वोट मिलेंगे और ३०० से ज्यादा सीटें। यह स्थिति तब है जबकि ५५ से ६० फीसद वोट भाजपा के विरु द्ध है। इस समय स्थिति यह है कि तृणमूल कांग्रेस‚ समाजवादी पार्टी‚ राष्ट्रीय जनता दल‚ तेलंगाना राष्ट्र समिति‚ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम सहित जितनी भी क्षेत्रीय पार्टियाँ हैं‚ उन सभी के पास सत्ता संघर्ष में आज भाजपा का विरोध करना ही एकमात्र एजेंड़ा है। सत्ता के लिए उनकी प्रतिद्वंद्विता केवल भाजपा से है और जहां क्षेत्रीय पार्टियां नहीं हैं वहां कांग्रेस विरोधी दल है‚ लेकिन क्षेत्रीय दल ही नहीं कांग्रेस के पास भी कोई ऐसा राष्ट्रीय एजेंडा नहीं है‚ जिसके आधार पर उनकी समग्र राजनीतिक द्ृष्टि स्पष्ट होती हो या मोदी विरोधी ताकतों के बीच चुनाव संबंधी कोई एकीकृत रणनीति बनाने का संकेत मिलता हो। ऐसे में कांग्रेस की वर्तमान स्थिति ने मोदी की पराजय की किसी भी संभावना को निरस्त कर दिया है। इस समय कांग्रेस के पास एक बड़ा अवसर था कि वह स्वयं को विचाराधारात्मक और संगठनात्मक तौर पर पुनर्जीवित करती‚ लेकिन ऐसा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता जिस तरह पार्टी छोड़ रहे हैं‚ असंतुष्ट चल रहे हैं‚ उससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि पार्टी के एक बड़े तबके में अपने शीर्ष नेतृत्व के प्रति गहरा असंतोष व्याप्त है। यह असंतुष्ट वर्ग अगर कांग्रेस में किसी वांछित सुधार की संभावना देखता तो हताश होकर पार्टी से किनारा नहीं करता। अगर किनारा कर रहा है तो इसका अर्थ यह है कि कांग्रेसजन स्वयं ही अपने भविष्य के प्रति आश्वस्त नहीं हैं। यह स्थिति कांग्रेस के लिए दुर्घटनापूर्ण है ही‚ एक मजबूत विपक्ष के अभाव के तौर पर देश के लिए भी दुर्घटनापूर्ण है। स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र के लिए विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि कांग्रेस न सबक सीखना चाहती है और ना ही आवश्यक बदलाव करना चाहती है।
वैभव सूर्यवंशी: प्रतिभा का उदय या अपेक्षाओं का दबाव? भारतीय क्रिकेट के सामने सबसे बड़ी परीक्षा………
भारतीय क्रिकेट में जब भी कोई असाधारण युवा प्रतिभा उभरती है, देश की करोड़ों उम्मीदें उसके कंधों पर आ जाती...







