10 लाख सदस्य बनायेगी हम

0
133
file photo

लोकसभा चुनाव में मिली असफलता के बाद हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से) अब काफी तल्ख तेवर के साथ विधान सभा चुनाव की वैतरणी पार करने की रणनीति बनाने में जुट गया है। गौरतलब है कि यह तेवर न केवल राज्य की सत्ताधारी एनडीए के घटक दलों को लेकर है बल्कि यह महागठबंधन के घटक दलों को लेकर भी बरकरार है। यही वजह है कि हम (से) चुनावी मोड में आ चुका है और उसके रणनीतिकार आगामी विधान सभा चुनाव में सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों को लेकर रणनीति बनाने में जुट गये हैं।हालांकि हम (से) को मलाल महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने को ले कर भी है। हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने कहा है कि ‘‘लोकसभा चुनाव में पार्टी को एक सीट ही मिली। शेष दो सीटों पर राजद की तरफ से उम्मीदवार दे कर पार्टी की प्रासंगिकता को कम आंका गया था। बावजूद हम (से) इस बात की गुंजाइश से इंकार करने में लगा है कि वह एनडीए की तरफ मुड़ कर देखने वाला नहीं है। वैसे पार्टी के तेवर जो इन दिनों सांगठनिक ढ़ाचां के निर्माण को ले कर दिख रहा है वह गठबंधन की राजनीति में दब कर राजनीति करने वाला तो नहीं है। लोकसभा चुनाव से सबक सिखे पार्टी के रणनीतिकार विधान सभा चुनाव में सम्मान जनक समझोता की उम्मीद किये बैठे हैं वह भी इस अंदाज में कि टिकट उनकी तो उम्मीदवार भी उनके । तभी वे 100 प्रतिशत परिणाम देने की स्थिति में हो सकते हैं। पार्टी अपने इसी अंदाज को महागठबंधन की राजनीति में हावी करने के लिए दल के सांगठनिक ढांचा को दुरूस्त करने में लगे हैं। यही वजह भी है कि तीन चरणों में चलने वाले सदस्यता अभियान में 10 लाख सदस्य बनाने का टारगेट ले कर चला जा रहा है। इस दस लाख सदस्यता को राज्य के सभी 243 विधान सभा सीटों को ध्यान में रख कर जमीन पर उतारा जाना है। इस अभियान का मूल तय यह है कि हम के रणनीतिकार प्रत्येक बूथ पर पांच सक्रिय सदस्य बनाना भी चाहता है। वैसे हम(से) के भीतरखाने की माने तो पार्टी का एक सच यह भी है कि वोट प्रतिशत के गणित के आगे राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय पार्टी बनने को ले कर वोट प्रतिशत की अर्हताएं वाधा बन रही है। इस वजह से पार्टी की मजबूरी है कि ज्यादा-से-ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ कर वह आंकड़ा प्राप्त किया जा सके। यह तभी हो सकता है जब महागठबंधन के भीतर ज्यादा-से-ज्यादा सीटें मिले। नहीं तो 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की वाध्यता के साथ हम(से) आगामी विधान सभा चुनाव 2020 में उतरे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं। वैसे इस सच को तो श्री मांझी ने खुद स्वीकार करते कहा कि गत लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के राज्यस्तरीय व राष्ट्रीय बने रहने में वाधा आई है। मगर उसे 2020 के विधान सभा चुनाव में पूरा कर लिया जाएगा। 

यह भी पढ़े  एक मंत्री विशेष का इस्तीफा न लेने पर नया खुलासा करेंगे तेजस्वी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here