मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री और बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता बाबूलाल गौर (89) का निधन

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मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री बाबूलाल गौर (89) का बुधवार सुबह निधन हो गया. लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था. पिछले 7 अगस्‍त को तबीयत खराब होने के बाद उन्हें भोपाल के नर्मदा अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया था. वे फेफड़ों में इन्फेक्शन से पीड़ित थे. अस्‍पताल में उन्‍हें कई दिनों से वेंटिलेटर पर रखा गया था. बाबूलाल गौर को सांस लेने में तकलीफ होने के बाद भोपाल के नर्मदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्‍टरों ने उन्‍हें निमोनिया होने की भी पुष्‍टि की थी.बाबूलाल गौर 27 जुलाई को ही गुरुग्राम के निजी अस्पताल से हार्ट का इलाज कराकर वापस लौटे थे.

भर्ती होने के बाद से ही बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता बाबुलाल गौर के स्वास्थ्य में कोई सुधार दर्ज नहीं किया जा रहा था. अस्‍पताल में भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता स्वास्थ्य का हाल जानने पहुंचे थे. इनमें पूर्व सीएम शिवराज सिंह और नरोत्तम मिश्रा भी शामिल रहे. बीजेपी नेताओं के अलावा मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री कमलनाथ भी बाबूलाल गौर का हालचाल लेने अस्‍पताल गए थे.

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बाबूलाल गौर का प्रोफाइल

उत्तरप्रदेश के प्रतापनगर जिले में 2 जून 1930 को पैदा होने होने वाले बाबूलाल गौर की गिनती बीजेपी के वरिष्‍ठ नेताओं में होती थी. वे 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे थे. शिवराज सिंह चौहान की सरकार में वे नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री थे. गौर पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय विधायक चुने गए थे. उन्होंने 1977 में गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और 2003 तक वहां से लगातार सात बार विधानसभा चुनाव जीतते रहे.

1993 के विधानसभा चुनाव में 59 हजार 666 मतों से जीतकर बाबूलाल गौर ने इतिहास रचा था. 2003 के विधानसभा चुनाव में 64,212 मतों से जीतकर उन्‍होंने अपने ही कीर्तिमान को तोड़ा था. 7 मार्च 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक वे मध्‍य प्रदेश के स्थानीय शासन, विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, जनसंपर्क, नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री रहे थे.

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4 सितंबर 2002 से 7 दिसंबर 2003 तक मध्य प्रदेश की विधान सभा में वे नेता प्रतिपक्ष भी रहे. बाबूलाल गौर 1946 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे. दिल्ली तथा पंजाब आदि राज्यों में आयोजित सत्याग्रहों में उन्‍होंने भाग भी लिया था. आपातकाल के दौरान बाबूलाल गौर 19 माह तक जेल में भी रहे थे.

मध्य प्रदेश सरकार ने 1974 में बाबूलाल गौर को ‘गोआ मुक्ति आंदोलन’ में शामिल होने के कारण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सम्मान भी दिया था. सक्रिय राजनीति में आने से पहले बाबूलाल गौर ने भोपाल की कपड़ा मिल में नौकरी की थी और श्रमिकों के हित में अनेक आंदोलनों में भाग लिया था. वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य रहे थे.

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