सूखा पीड़ितों को भी मिलेगी सहायता : नीतीश

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बाढ़ पीड़ितों की तरह सूखा पीड़ितों की भी सहायता की जाएगी। जिलाधिकारी एक समय सीमा के अंदर पंचायतवार इसका आकलन करवा लें। आकलन के आधार पर किस प्रकार हम उनकी सहायता कर सकते हैं, उसका निर्णय किया जाएगा।ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को सचिवालय स्थित संवाद में बाढ़ एवं सुखाड़ के संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में कहीं। उन्होंने कहा कि मौसम विज्ञान केन्द्र के प्रतिनिधि ने जिस तरह से जानकारी दी है, उससे दक्षिण बिहार में सूखे की संभावना बन रही है। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने प्रखण्डों एवं पंचायतवार सूखे की स्थिति का आकलन जल्द से जल्द करा लें। मौसम विज्ञान केन्द्र के आकलन के अनुसार यदि आगे अच्छी वष्ा होती है तो यह अच्छी स्थिति होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीजल सब्सिडी के तहत अब एक लीटर डीजल पर सरकार 60 रुपये का अनुदान दे रही है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देशि दें ताकि जल्द से जल्द किसानों कोडीजल अनुदान का लाभ मिल सके। वैकल्पिक फसल लगाने की भी व्यवस्था की जाए। वैकल्पिक फसल के लिए जिन फसलों का चयन हो, उसकी मार्केटिंग की क्या संभावना है, उसका भी विश्लेशण ठीक से कर लेना चाहिए। जहां सूखे की संभावना बन रही है, उस पर विचार करने की जरूरत है ताकि उन्हें किस प्रकार की सहायता की जा सकती है। जो किसान फसल नहीं लगा पाए, उनकी सहायता के बारे में योजना बनाने पर विचार करना पड़ेगा। खेती नहीं कर पाने की स्थिति में वैकल्पिक रोजगार के और क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं ? मौसम विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि ने वष्ापात की स्थिति के संबंध में जानकारी दी।आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि 14 अगस्त को अर्थ नेटवर्क कम्पनी के साथ वज्रपात आपदा पूर्व चेतावनी पण्राली के संबंध में एमओयू साइन किया गया। सात जगहों सासाराम, नवादा, पटना, खगड़िया, पूर्णिया, मोतिहारी एवं दरभंगा में इसके सेंसर 15 अक्टूबर तक लगाए जाएंगे। एक सेंसर दो सौ किलोमीटर का रेंज कवर करेगा। 3 एवं 4 अगस्त को सभी जिलों में प्रभारी मंत्री एवं प्रभारी सचिवों की जो बैठक हुयी थी, उसके रिपोर्ट एवं सुझाव प्राप्त हुये हैं। बाढ़ पीड़ित 17,51,284 परिवारों को जीआर की 1050 करोड़ रुपये की राशि भुगतान कर दी गयी है। बचे हुये परिवारों को 25 अगस्त तक जीआर की राशि भुगतान कर दी जायेगी। एन श्रवण कुमार ने आकस्मिक फसल योजना की तैयारी के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बालू सिल्ट के जमाव के बारे में जानकारी दी। डीजल अनुदान के संबंध में प्राप्त आवेदनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक पूरे राज्य में 76.98 प्रतिशत रोपनी हुयी है। उन्होंने जिलावार, प्रखण्डवार रोपनी की भी जानकारी दी। जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने तटबंधों की सुरक्षा के संबंध में जिलावार जानकारी दी। प्रमुख नदियों का अधिकतम जलस्रव दक्षिण बिहार में वृहद सिंचाई योजनाओं से सिंचाई की स्थिति, बाढ़ से क्षतिग्रस्त नहरों की स्थिति एवं खरीफ फसलों की सिंचाई के लक्ष्य के संबंध में भी जानकारी दी। इसके पश्चात सभी जिलों के डीएम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बाढ़ एवं सुखाड़ की अद्यतन स्थिति के संबंध में जानकारी ली गयी। मुख्यमंत्री ने कहा पर्यावरण संरक्षण का बचाव जरूरी है, इसके लिये पेड़ लगाना है, साथ ही अक्षय ऊर्जा को प्रोत्साहित करना है। तालाब, कुओं का जीर्णोद्धार कराना है। किसी भी निर्माण कार्य में वृक्ष को काटा नहीं जायेगा बल्कि उसे उखाड़कर दूसरी जगह लगाया जायेगा। लोगों को वृक्ष लगाने और जल के दुरूपयोग से रोकने केसंबंध में जागरूक करना होगा। उन्होंने कहा कि कल ही लघु जल संसाधन विभाग ने सभी जिलों एवं प्रखण्डों में जन जागृति के लिये नौ वाहनों को रवाना किया है। उन्होंने कहा कि राज्य का हरित आवरण क्षेत्र 17 प्रतिषत करने के लक्ष्य के लिये हमलोग काम कररहे हैं। उन्होंने कहा कि क्रॉप साइकिल के बारे में कृषि विभाग को जल्द से जल्द योजना बनानी चाहिये, इससे जल संरक्षण भी होगा और अन्य फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा।

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