भाकपा सात से नौ अगस्त तक मनाएगी राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस

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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने देश में दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर हो रहे हमले खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस मनाने का ऐलान किया है। भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा के द्वारा शनिवार को राज्य सचिव को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि पार्टी ने सात से नौ अगस्त तक दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया है। वाम दलों और अन्य दलों के कड़े विरोध के बावजूद, भाजपा सरकार संसद में सभी विधायी कानून पारित करवा रही है। सरकार संसद में अपने नम्बर का इस्तेमाल करती है और कुछ दलों पर दबाव बढ़ाने के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ भी करती है। देश में स्थिति डरावनी है। जनता सुरक्षित महसूस नहीं करती है। दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार में वृद्धि हुई है। महिलाएं और बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। जो आरएसएस-बीजेपी के सहयोगी हैं और उनके संगठन कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं और नफरत और हिंसा फैला रहे हैं। मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने भयानक स्तर को छू लिया है और समाज को अमानवीय बनाने की कोशिश कर रही है। भाकपा राष्ट्रीय महासचिव ने अपने पत्र में कहा है कि नाबालिग लड़कियों और दलितों के खिलाफ भयानक अपराध किये जाते हैं। कठुवा के बाद उन्नाव की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। भाजपा अपने समर्थकों की भागीदारी और उन अभियुक्तों के संरक्षण से पूरी तरह से परिचित है। भूमि अधिकारों को छीनने और वंचित समुदायों से जीवन का अधिकार छीनने के मद्देनजर हाल ही में सोनभद्र हुई हत्याओं ने उत्तर प्रदेश और केंद्र में बैठी दमनकारी सरकारों का असली चेहरा फिर से दिखाया है।

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