नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में हड़ताल , लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्‍य सभा में पेश होना है

0
105

आज ईश्‍वर करे कि आप बीमार न पड़ें, क्‍योंकि आज एम्‍स स‍मेत पूरी दिल्‍ली के बड़े अस्‍पतालों के रेजिडेंट डॉक्‍टर्स हड़ताल पर हैं। डॉक्‍टर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल का विरोध कर रहे हैं। यह बिल लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्‍य सभा में पेश होना है। जिसके विरोध में अब राजधानी दिल्ली के रेजिडेंट्स डॉक्टर्स ने इसके खिलाफ हड़ताल का ऐलान किया है। गुरुवार सुबह आठ बजे से इन डॉक्टर्स की स्ट्राइक शुरू हो गई है। हड़ताल की वजह से गुरुवार को दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। आरएमएल हॉस्पिटल ने एक बयान जारी कर कहा है कि गुरुवार से रूटीन ऑपरेशन अगले आदेश तक निलंबित रहेंगे। बता दें कि बुधवार को देश भर के 3 लाख से अधिक डॉक्‍टर्स इस बिल को लेकर हड़ताल पर थे। जिसके चलते देश भर में ओपीडी सेवाएं प्रभावित रही।

संसद की ओर कूच करेंगे डॉक्‍टर्स
दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के डॉक्टरों ने गुरुवार को संसद चलो का आह्वान किया है। AIIMS के रेजिडेंट डॉक्टरों ने संस्थान के सभी डॉक्टरों से NMC बिल के विरोध में गुरुवार को एम्स से लेकर संसद तक विरोध मार्च में शामिल होने की अपील की है। डॉक्टरों की मांग है कि बिल को जिस तरह लोकसभा में पास किया गया है, उसी तरह राज्यसभा में पेश ना किया जाए। इसमें डॉक्टरों की मांग के अनुसार संशोधन करके इसे राज्यसभा में पेश किया जाए। ऐसा नहीं होता है तो गुरुवार से सभी अस्पतालों में हड़ताल की जाएगी।

लोकसभा से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक, 2019 पास होने के खिलाफ बुधवार को देश भर के डॉक्टरों ने हड़ताल का एलान किया है. इस हड़ताल का असर राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में है. बिहार के डॉक्टर भी इस विधेयक के खिलाफ हड़ताल पर हैं.

मरीज विरोधी है बिल

यह भी पढ़े  पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति पर गिरफ्तारी वारंट जारी

आइएमए के नेतृत्व में सुबह से ही सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में इमरजेंसी छोड़ ओपीडी समेत सभी तरह की व्यवस्था ठप्प की जा रही है. यानि मेडिकल कॉलेज से लेकर पीएचसी तक डॉक्टर कार्य बहिष्कार पर हैं. डॉक्टरों ने एनएमसी बिल को डॉक्टर और मरीज विरोधी बताया और कहा कि किसी भी सूरत में राज्यसभा में यह बिल अब पास नहीं होने देंगे.

डॉक्टर्स बोले

डॉक्टरों ने यह भी कहा कि इस बिल से साइंस को गिरवी रख दिया गया है और अब छात्रों का भी डॉक्टर बनने का सपना टूट जाएगा क्योंकि अब सीट बेचे जाएंगे, साथ ही नन मेडिकल पर्सन को इस बिल के बाद मॉडर्न मेडिसिन के लिए परमिशन मिलना दुर्भाग्य बताया डॉक्टरों के एसोसिएशन ने बताया कि इस हड़ताल में पटना सहित पूरे बिहार के निजी और सरकारी डॉक्टर भी शामिल होंगे.

24 घंटे तक होगी हड़ताल
डॉक्टरों की ये हड़ताल सुबह छह बजे से 24 घंटे तक के लिए होगी और इसका सीधा असर अस्पतालों खास कर के सरकारी अस्पतालों पर पड़ेगा. हड़ताल के दौरान बिहार के अस्पतालों के ओपीडी और वार्ड में डॉक्टर सेवाएं नहीं देंगे हालांकि डॉक्टरों ने इस हड़ताल से इमरजेंसी सेवाओ को अलग रखा है और सभी अस्पतालों में इमरजेंसी की सेवाएं चालू रहेंगी.

बिहार के सबसे बड़े हड़ताल यानि पीएमसीएच, आइजीआइएमएस सहित तमाम सरकारी और निजी अस्पतालों में इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है और इस हड़ताल से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

आईएमए के राष्ट्रस्तरीय आह्वान पर सूबे के सभी आधुनिक चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों ने लोकसभा में एनएमसी बिल पारित होने के विरोध में बुधवार की सुबह 6 बजे से 24 घंटे के लिए इमरजेंसी सेवा छोड़कर सभी रूटीन कायरे का बहिष्कार किया। आईएमए, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और मेडिकल स्टूडेंट्स का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक केन्द्र सरकार इस काले कानून को वापस नहीं ले लेती है। यह जानकारी आईएमए, बिहार के अध्यक्ष शालीग्राम विश्वकर्मा और अवैतनिक राज्य सचिव ब्रजनंदन कुमार ने दी। आईएमए, बिहार ने देशव्यापी सफल आंदोलन के लिए संपूर्ण चिकित्सक समाज को धन्यवाद दिया है। आईएमए, बिहार के सचिव ने कहा कि एनएमसी बिल गरीब विरोधी है। बिल का प्रावधान गरीब मेधावी छात्रों के चिकित्सक बनने में बाधा डालेगा। इससे चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा कार्य महंगे होंगे। एनएमसी बिल में फाइनल एमबीबीएस परीक्षा को पीजी एडमिशन का आधार बनाए जाने से गंभीर भेदभाव पैदा होगा। पीजी पाठय़क्रम में प्रवेश के लिए स्टूडेंट्स के अवसरों को सीमित कर देगा। उन्होंने एनएमसी बिल को चिकित्सकों एवं राज्य के संघीय अधिकारों का हनन करना बताया। यह संपूर्ण अधिकार केन्द्रीय स्वास्य मंत्रालय के अधीन करने का प्रयास है। यह बिल चिकित्सा विज्ञान एवं चिकित्सकों की पात्रता का घोर अवमूल्यन करने का प्रस्ताव है। नीम-हकीमी, क्रॉसपैथी एवं मिक्सोपैथी के जरिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को समाप्त करने का प्रयास है।

यह भी पढ़े  जेम्स पीबल्स, माइकल मेयर और डिडियेर क्वीलोज को संयुक्त रूप से मिला भौतिकी का 2019 का नोबेल पुरस्कार

पटना एम्स के प्रशासनिक भवन के बाहर डॉक्टरों ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2019 के खिलाफ प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने यह विरोध-प्रदर्शन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर किया। विधेयक के कुछ प्रावधानों का विरोध करते हुये सीनियर और जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने सुबह नौ बजे से काम को बहिष्कार किया। हड़ताल की वजह से दूर दराज से आए मरीजों को अस्पताल से वापस लौटना पड़ा। हालांकि वार्ड में भर्ती रोगी को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। एसआर और जेआर की हड़ताल के कारण फैकलटी ने मोर्चा संभाला। इधर, डॉक्टरों ने बिल के विरोध में नाटक का मंचन किया। नाटय़ में बिल की खामियों को दिखाया गया। एम्स के सीनियर रेजीडेंसी एसोसिऐशन के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि डॉक्टर ग्रमीण क्षेत्र में काम करने को तैयार है, शर्त है कि उनकी सुरक्षा और सुविधा मिले। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के सदस्य निर्वाचित होने चाहिए, मनोनीत नहीं । साथ ही जो सदस्य निर्वाचित हों वे किसी के अधीन न हों। स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकारी हो। नॉन मेडिकल को एलौपैथ इलाज की छूट मिली है, यह रोगियों की जिंदगी से खिलवाड़ है। 50 प्रतिशत सीट की फीस के लिए सरकार ने प्राइवेट कॉलेजों को पूरी छूट दी गयी है, इससे कॉलेज मनमानी करेंगे। अस्पताल अधीक्षक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि नये रोगी नहीं देखे गये। इमरजेंसी एंड ट्रामा में मरीजों का इलाज हुआ। डॉ. संजीव ने बताया कि इमरजेंसी एंड ट्रामा में सामान्य तौर पर काम चला। ओटी में ऑपरेशन हुए और जो भी इमरजेंसी इलाज थे वे सामान्य दिनों की तरह किये गये।

यह भी पढ़े  राज्य में किसान चौपाल 10 से 30 जून तक ,सीएम भी हो सकते हैं शामिल

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में नालंदा मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टरोें ने कार्य का बहिष्कार किया। कार्य बहिष्कार के कारण जेनरल ओटी, ईएनटी ओटी, आर्थो ओटी और गायनी ओटी मे करीब दो दर्जन ऑपरेशन नही हुआ। आउटडोर में आने वाले मरीजों को बिना इलाज कराये ही वापस लौटना पड़ा। बिल के विरोध में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के सदस्यों ने प्रदर्शन और नारेवाजी किया। प्रदर्शनकारी बिल वापस लेने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने निबंधन काउंटर, दवा काउंटर को बंद करा दिया। निबंधन काउंटर बंद होते ही अस्पताल के आउटडोर, जांच घर, अल्ट्राससाउंड, एक्स-रे कार्य ठप हो गया। इलाज के लिए आये मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। मरीज घंटों आशा देखकर वापस लौट गये। इमरजेंसी और इनडोर में भर्ती मरीजों को सामान्य दिनों की तरह चिकित्सकों ने देखरेख किया। बताते चले कि आईएमए के आह्वाहन पर इस बिल के खिलाफमेडिकल छात्र और चिकित्सक 24 घंटे के हड़ताल पर चले गये हैं। 31 जुलाई की सुबह छह बजे से आरंभ हुआ चिकित्सकों का यह हड़ताल 1 अगस्त के सुबह छह बजे तक चलेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here