मुस्लिम महिलाओं के लिए मुक्ति का दिन : उपमुख्यमंत्री

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लोकसभा के बाद आज राज्यसभा से तीन तलाक बिल पारित होने पर प्रदेश भाजपा में खुशी की लहर है। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने बिल पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया है। उपमुख्यमंत्री श्री मोदी ने राज्यसभा से तीन तलाक बिल पारित होने पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि आज मुस्लिम महिलाओं के लिए ‘‘मुक्ति का दिन’ है। मुस्लिम बहनों को आजादी से जीने का हक और न्यायपूर्ण जीवन का अधिकार दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब उन्हें अपमान और प्रताड़ना की जिन्दगी से छुटकारा मिलेगा। श्री मोदी ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। इस देश की सभी महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि इस देा की महिलाओं को सती प्रथा, बाल विवाह व विधवा विवाह निषेघ की कुप्रथाओं से मुक्ति तथा मतदान व अन्य नागरिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा है। संसद की दोनों सदनों से तीन तलाक बिल का पारित होना सरकार की नहीं बल्कि देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं की जीत है। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि मस्लिम महिलाओं के जीवन को नयी दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम है। प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन व निखिल आनंद ने भी इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया है।संसद से तीन तलाक विधेयक की मंजूरी ऐतिहासिक : नीतीश मिश्रापटना (एसएनबी)। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीतीश मिश्रा ने संसद से तीन तलाक संबंधी विधेयक पारित होने को ऐतिहासिक कदम करार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्ववाली सरकार ने पूरे देश का दिल जीत लिया है।पूर्व मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री मिश्रा ने कहा कि भाजपा सबका साथ, सबका विकास व सबका विास जीतने के उद्देश्य पर चल रही है और इस कार्य में जनता का पुरजोर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने आज राज्यसभा से ऐतिहासिक बिल पास होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का आभार प्रकट करते हुए उन्हें बधाई दी है। ज्ञात हो कि लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास हो जाने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही बिल कानून बन जाएगा। अब पहले से देश में चला आ रहा तीन तलाक गैर-कानूनी होगा। दोषी को 3 साल की सजा होगी। पीड़ित महिलाएं अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा-भत्ता मांग सकेंगी। अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह बिल दो बार लोकसभा से पास हो चुका था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया। इस बार यह बिल 25 जुलाई को लोकसभा से पास हुआ और 5 दिन बाद ही राज्यसभा से मतविभाजन के बाद पारित कर दिया गया। राज्यसभा में वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े।

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