बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 पारित

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बिहार में वित्त वर्ष 1977-78 से 2015-16 तक अलग-अलग अवधि में अपरिहार्य कारणों से विधानमंडल से स्वीकृत राशि से अधिक खर्च किये गये 142 करोड़ 47 लाख 2239 रुपये से संबंधित बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 आज विधानसभा में पारित हो गया। उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने विधानसभा में बिहार अधिकाई व्यय विनियोग विधेयक 2019 पर हुई र्चचा का जवाब दते हुए कहा कि वित्त वर्ष 1977-78 से 2015-16 तक अलग-अलग अवधि में अपरिहार्य कारणों से विधानमंडल से स्वीकृत की गई राशि से 142 करोड़ 47 लाख 2239 रुपये अधिक व्यय किये गये, जिसे ध्यान में रखते हुये इस विधेयक को लाने की जरूरत पड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य की संचित निधि से कोई राशि संविधान के अनुच्छेद 204 के अधीन बनी विधि के अनुसार ही विनियोजित की जाती है, अन्यथा नहीं। श्री मोदी ने कहा कि अपरिहार्य कारणों से बिहार विधानमंडल से स्वीकृत राशि से अधिकाई व्यय को लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में की गई अनुशंसा के आधार पर विनियमित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 1977-78, 1978-79, 1984-84, 1987-88, 1988-89, 1990-91, 1998-99, 1999-2000, 2003-04, 2010-11 और 2015-16 स्वीकृत राशि से अधिक कुल 142 करोड़ 47 लाख 2239 रुपये खर्च किये गये हैं। र्चचा के बाद, बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सदन में बिहार मोटर वाहन कर (संशोधन) विधेयक 2019 को भी ध्वनिमत से पारित किया गया।

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उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज सदन में 27 वर्ष पहले के चारा घोटाले को फिर से ताजा करते हुए मुख्य विपक्षी दल राजद पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1990-91 में पशुपालन विभाग के बजट प्रावधान 54.92 करोड़ के विरुद्ध 84.21 करोड़ यानी 29.29 करोड़ अधिक की निकासी की गयी। दूसरे साल 1991-92 में 59.10 करोड़ के प्रावधान के विरुद्ध 129.82 करोड़ (70.72 करोड़ अधिक) तीसरे वर्ष 1992-93 में 66.93 करोड़ की जगह 154.70 करोड़ (87.77 करोड़ अधिक) की निकासी की गई।बिहार विधानसभा में 142 करोड़ 47 लाख 2,239 रुपये के बिहार विनियोग अधिकाई व्यय को पारित कराने के दौरान श्री मोदी ने कहा कि चौथे साल 1993-94 में 74.14 करोड़ की जगह 199.17 करोड़ (125.03 करोड़ अधिक), पांचवें साल 1994-95 में 74.40 करोड़ की जगह 245.01 करोड़ (170.61 करोड़ अधिक) व छठे वर्ष 1995-96 में 82.12 करोड़ की जगह 205.06 करोड़(122.94 करोड़ अधिक) की निकासी की गई। श्री मोदी ने सदन को अवगत कराया कि 959 भेंड़, 5664 सूअर, 40,504 मुर्गी, 1577 बकरी के लिए 6 जिलों रांची, चाईबासा, दुमका, जमशेदपुर,गुमला और पटना में 10.5 करोड़ के चारे की आवश्यकता थी जिसके विरुद्ध 253.33 करोड़ की फर्जी खरीद की गयी। पशु चारा में पीला मक्का केवल 10 प्रतिशत होता है परंतु 3 वर्षो में केवल उपरोक्त 6 जिलों में आवश्यकता का 115 गुना अधिक 154.72 करोड़ रुपये का पीले मक्के की फर्जी खरीद दिखा दी यी। बादाम की खल्ली संयुक्त आहार में 15 प्रतिशत होती है परंतु 33 गुना अधिक जिसकी कीमत 72.69 करोड़ रुपये होती है,खरीद दिखा दी गयी।

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