कर्नाटक: गठबंधन सरकार को मिला ‘जीवनदान’, सुप्रीम कोर्ट ने आज ही बहुमत परीक्षण कराने से इनकार किया

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कर्नाटक के राजनीतिक संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर आई है. बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि वो आदेश दें कि कुमारस्वामी बहुमत साबित करें, फ्लोर टेस्ट कराएं. सुप्रीम कोर्ट ने आज कोई आदेश देने से मना कर दिया है. इससे कुमारस्वामी को राहत मिली है और बागियों को झटका लगा है. बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने आज ही बहुमत परीक्षण का आदेश देने का अनुरोध किया. इस पर कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आदेश नहीं देना चाहते, कल देखेंगे. इसके जवाब में रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि ठीक है फिर आप कल सुनवाई तय दीजिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि कल देखेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने आज की इस टिप्पणी के बाद गठबंधन खेमे में थोड़ी राहत महसूस की जा सकती है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश गुंडू राव ने एलान किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत परीक्षण को लेकर कुछ भी नहीं कहा है, ऐसे में हम कल इस पर सुप्रीम कोर्ट का रुख देखना चाहते हैं. माना जा रहा है कि कोर्ट ने इस आदेश के बाद आज विधानसभा में वोटिंग नहीं होगा और एक दिन के लिए गठबंधन सरकार बनी रहेगी.

 दरअसल, गठबंधन के विधायकों के इस्तीफों के बाद एचडी कुमारस्वामी नीत सरकार ने 19 जुलाई को बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल द्वारा दी गई दो समय-सीमाओं का पालन नहीं किया था। मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी द्वारा लाये गए विश्वास प्रस्ताव पर गठबंधन सरकार के चर्चा खींचने की अब भी कोशिशें करने की खबरों और उच्चतम न्यायालय से कोई ना कोई राहत मिलने की उम्मीद के बीच कांगेस तथा जद(एस) बागी विधायकों का समर्थन वापस हासिल करने के लिए अब तक प्रयासरत हैं।

कर्नाटक में राजनीतिक उठापटक लगातार जारी है. इस बीच कांग्रेस के कद्दावर नेता और ‘संकट मोचक’ की भूमिका निभाने वाले डीके शिवकुमार ने एक नया दावा पेश किया है. उन्होंने कहा है कि वे जेडीएस गठबंधन को बचाने के लिए सीएम पद त्यागने को तैयार है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए वो सिद्दारमैया, जी पर्मेश्वर या खुद शिवकुमार के नाम पर सहमत हैं.

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हालांकि कर्नाटक कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने इस दावे को खारीज किया है. साथ ही कहा है कि पार्टी कल होने वाली फ्लोर टेस्ट की तौयारी कर रही है. इस तरह का कोई प्रस्ताव हमारे पास नहीं आया है और न ही हम इसके बारे में सोच रहे हैं. हमें पूरा भरोसा है कि हम विश्वासमत जीतेंगे और बीजेपी की सच्चाई सबके सामने लाएंगे.

सोमवार को विश्वासमत
कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक घमासान सोमवार को विश्वासमत के बाद खत्म हो सकता है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार को सदन में बहुमत साबित करना है. शुक्रवार को कर्नाटक में राजनीतिक उठापटक देखने को मिली. दरअसल, शुक्रवार को भी सदन में विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी थी. जो राजनीतिक अस्थिरता की वजह से नहीं हो पाई. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने सदन की कार्यवाही 22 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी थी.

22 जुलाई को होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले कांग्रेस खुद को मजबूत स्थिति में लाने की कोशिश में लग गई है. इसी क्रम में रविवार को बेंगलुरु के ताज होटल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी.

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खत्म नहीं हो रहीं मुश्किलें
बता दें कर्नाटक में संकट से घिरी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. कल राज्य के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी विश्वासमत पेश करने जा रहे हैं. शुक्रवार को विधानसभा सरकार के भाग्य का फैसला करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान नहीं कर पाई. अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने सदन को सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया.

कुमारस्वामी और कांग्रेस भी पहुंचे से सुप्रीम कोर्ट
कुमारस्वामी और कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें राज्यपाल पर विधानसभा की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया था,. अदालत ने माना था कि विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. कुमारस्वामी ने अदालत को बताया कि राज्यपाल सदन को उस तरीके से निर्धारित नहीं कर सकते हैं जिस तरह से विश्वास प्रस्ताव पर बहस होती है.

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