BPSC के मुख्य परीक्षा में पूछा सवाल, ‘क्या बिहार के राज्यपाल कठपुतली हैं?’आयोग ने जताया खेद

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क्या बिहार के राज्यपाल की भूमिका राज्य की राजनीति में कठपुतली की है? बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की मेन्स परीक्षा में पूछे गए इस सवाल को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों ही आयोग पर सवाल उठा रहे हैं. यह प्रश्न संवैधानिक पद से जुड़ा हुआ है, ऐसे में सरकार ने भी सवाल बनाने वालों पर उंगली उठा दी. जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा कि ऐसा प्रश्न नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीपीएससी में सरकार इंटफेयर नहीं करती है. वो एक आटोनॉमस बॉडी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी पूछ लीजिएगा. यह प्रश्न बिल्कुल नहीं होना चाहिए.

राज्यपाल से जुड़े सवाल पर बिहार लोक सेवा आयोग ने खेद जताया है. उसने कहा कि प्रश्न पत्र में संवैधानिक पद के संबंध में गलत तरीके से सवाल पूछा गया है. पेपर सेट करने वाले से कारण पूछते हुए ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है. सवाल में पूछा गया था कि क्या बिहार की राजनीति में राज्यपाल की भूमिका केवल एक कठपुतली की तरह है?

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जबकि शिक्षा मंत्री कृष्णनन्दन वर्मा ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के बारे में इस तरह की बात बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि ये मामला उनके विभाग से जुड़ा हुआ नहीं है. इसके अलावा मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि जो लोग भी इस तरह का सवाल तैयार कर रहे हैं वो बिल्कुल अनपढ़ हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की कि वे इसका संज्ञान लें और जिसने इसतरह का प्रश्न सेट किया है उसे बाहर करने का काम करें.

बिहार में राज्यपाल की भूमिका पर उठते रहे हैं सवाल

हालांकि कई ऐसे मौके आए जब बिहार में राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं. खासतौर पर जब अल्पमत की सरकार बनाने का मामला आया हो. साल 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बहुमत नहीं होते हुए भी सरकार बनाने का मौका दिया गया था. तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार थी.

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इसके बाद 2005 के फरवरी महीने में मनमोहन सिंह सरकार पर विधानसभा को भंग किए जाने का आरोप लगा था. उस समय किसी को बहुमत नहीं मिलने का और सरकार नहीं बनाए जाने का बहाना लगाकर लालू प्रसाद के दबाव में आधी रात को विधान सभा भंग कर दिया गया था. कई बार कानून व्यवस्था खराब होने के आरोप में राज्यपाल की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति शासन भी लगाया गया.

रविवार को हुए बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की मुख्य परीक्षा (मेन्स) में एक अजीबोगरीब सवाल पूछ गया जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है. सवाल में भारतीय राजनीति में राज्यपाल की भूमिका की आलोचनात्मक परिक्षण करने के लिए कहा गया है. बिहार के संदर्भ में इसका विशेष रूप से परिक्षण करने के लिए कहा गया और इसमें पूछा गया कि क्या वह केवल एक कठपुतली है?

पूरा सवाल कुछ इस प्रकार था, ”भारत में राज्य की राजनीति में राज्यपाल की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से राज्य के संदर्भ में. क्या वह केवल कठपुतली है?’’ ये सेक्शन-1 का दूसरा सवाल था. ये प्रश्न 38 नंबर के लिए पूछा गया था.

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बता दें कि बीपीएससी 64वीं मेन्स परीक्षा 12 जुलाई से 16 जलाई के बीच ली जा रही है. मेन्स की परीक्षा को दोपहर एक बजे से चार बजे के बीच कंडक्ट किया जा रहा है. तीन परिक्षाएं हो चुकी हैं. इसमें 12 जुलाई को जेनरल हिंदी, 13 जुलाई को जेनरल स्टडीज पेपर 1 और 14 जुलाई को जेनरल स्टडीज पेपर 2 की परीक्षा हो चुकी है. 16 जुलाई को ऑप्शनल परीक्षा ली जाएगी. इस परीक्षा के जरिए बिहार में कुल 1395 रिक्त पदों को भरना है. प्रिलिमनरी एग्जाम दिसंबर 2018 में लिया गया था. इसके रिजल्ट की घोषणा फरवरी 2019 में की गई. इसमें कुल 190109 कैंडिडेट्स ने क्वालिफाई किया था.

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