क्रिकेट को मिलेगा नया बादशाह : वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 242 रनों का लक्ष्य दिया

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वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 242 रनों का लक्ष्य दिया है. जवाब में इंग्लैंड ने छठे ही ओवर में अपना पहला विकेट गंवा दिया. हेनरी की आउट स्विंग पर जेसन रॉय 17 रन बनाकर आउट हुए. पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 8 विकेट पर 241 रन बनाए. कीवी टीम के लिए सबसे ज्यादा निकोल्स 55, लैथम ने 47 रनों की पारी खेली. कप्तान विलियमसन 30 रन बनाकर आउट हुए. इंग्लैंड के लिए प्लंकेट और वोक्स ने 3-3 विकेट हासिल किए.

क्रिकेट को एक नया विश्व चैम्पियन मिलेगा जब रविवार को खिताब के लिए क्रि केट का जनक इंग्लैंड और हमेशा ‘‘अंडरडाग’ मानी जाने वाली न्यूजीलैंड टीम एक दूसरे के सामने होंगे। क्रि केट का जनक होने के बावजूद इंग्लैंड क्रि केट का बादशाह नहीं बन पाया है। इयान मोर्गन की टीम का सफर भी उतार चढ़ाव भरा रहा लेकिन यह जीत के तेवरों वाली टीम बनकर उभरी। पहली बार इंग्लैंड में किसी वनडे टीम ने अपने जबर्दस्त आक्रामक खेल से क्रि केटप्रेमियों का दिल जीत लिया है। दूसरी ओर न्यूजीलैंड के पास केन विलियमसन के रूप में ‘‘कूल ’ कप्तान है जो समय समय पर उनके लिए संकटमोचक भी साबित हुआ है। सेमीफाइनल में भारत को हराने के बाद उनके हौसले बुलंद।

दो टीमें, दो कप्तान, 22 खिलाड़ी और एक खिताब. आईसीसी क्रिकेट वर्ल्डकप 2019 का फाइनल रविवार को लॉर्ड्स के मैदान पर खेला जाएगा. जब इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड की टीमें इतिहास रचने के लिए मैदान पर उतरेंगी, तो दो ऐसे खिलाड़ियों पर आज नजरें होंगी, जिनमें से कोई एक इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा लेगा. उनपर ना सिर्फ अपनी टीम, बल्कि पूरे देश की उम्मीदों को पार लगाने का दबाव होगा. ऑयन मॉर्गन और केन विलियम्सन. दो ऐसे कप्तान जो शायद अपने बयानों और तेज तर्रार व्यवहार के कारण कभी चर्चा में नहीं आए, लेकिन हकीकत में आज इनमें से कोई एक विश्व विजेता बनने वाला है.

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अगर आज कीवी और इंग्लिश टीम के पास ये मॉर्गन और विलियमसन ना हाेते तो शायद ये दोनों टीमों आज उस मुकाम पर भी नहीं दिखती. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोनों कप्तानों की सफलता के पीछे सिर्फ एक ही इंसान का हाथ है.

दोनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे जिस एक दिग्‍ग्ज का हाथ है, वो हैं न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान ब्रेंडन मैक्कलम. दोनों ही मैक्कलम के ज़िंदगी को लेकर नज़रिए से बहुत प्रभावित हैं. मैदान पर हमेशा कूल रहने वाले विलियमसन ने ज़िंदगी और खेल की तरफ अपने नज़रिए को मैक्कलम से प्रभावित होकर बदला. वहीं मॉर्गन और मैक्कलम पुराने दोस्त हैं और उनके काफी शौक मिलते जुलते हैं. यही वजह है कि मॉर्गन ने अपनी शादी में मैक्कलम को बेस्ट मैन बनने का न्यौता दिया था.

ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज़ फिलिप ह्यूज़ के निधन के बाद मैक्कलम ने अपनी टीम को क्रिकेट को एक खेल की तरह ना देखने की बजाया इसे एक ऐसे अनुभव की तरह देखने की सलाह दी थी जो उनकी ज़िंदगी और बेहतर बना सकता है. इस बात को मॉर्गन और विलियमसन ने अपनी टीम और खेल पर लागू करते हुए वो मुकाम हासिल किया जहां वे आज हैं.

विलियमसन बेहद ही सुलझे हुए कप्तान हैं. उनका क्रिकेट बेहद ही सादा और उनके फैसले बहुत सोच-विचार वाले होते हैं. मैक्कलम से उन्होंने सबसे बड़ा सबक यही लिया था कि उन्हें अपने गेम को थोड़ा कम सीरियस होकर देखना चाहिए. इससे उन्हें हार और जीत, दोनों में ही मदद मिलेगी.

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उनकी बल्लेबाज़ी बिल्कु‍ल कॉपी-बुक अंदाज़ की है और शायद आप बहुत मुश्किल से उनकी बल्लेबाज़ी में कोई खामी निकाल पाएंगे. विलियम्सन ने इस वर्ल्डकप में अब तक कुल 548 रन बनाए हैं और अपनी टीम की ओर से एक तिहाई रन विलियम्सन ने बनाए हैं. अपनी टीम का बोझ विलियम्सन ने एक तरह से अकेले अपने कंधों पर उठाकर इस वर्ल्डकप में न्यूज़ीलैंड के लिए ‘वन मैन आर्मी’ का रोल निभाया है.

विलियमसन ने भारत के खिलाफ जो खेल दिखाया, वो दर्शाता है कि वे कितने अच्छे बल्लेबाज़ और कप्तान हैं. अपने टॉप आर्डर को जल्दी खो चुकी न्यूज़ीलैंड की पारी में विलियमसन आए और उन्होंने वो स्थिरता लाई जिसकी टीम को ज़रुरत थी. जब न्यूज़ीलैंड की पारी 239 रनों पर सिमट गई. विलियमसन ने आत्मविश्वास नहीं खोया और टीम को जीत का भरोसा दिलाया. गेंदबाज़ी के दौरान जब न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों ने भारतीय टॉप आर्डर की धज्जियां उड़ा दी तो विलियमसन अति उत्साहित नज़र नही आए. वे जानते थे कि मैच आखिरी गेंद पर ही खत्म होगा और उन्होंने अंतिम समय तक लड़ाई जारी रखी और शायद इसी का नतीजा है कि न्यूज़ीलैंड लगातार दूसरा विश्व कप खेल रही हैङ

2015 वर्ल्डकप में शुरुआती दौर से ही बाहर होने के बाद इंग्लिश टीम चौतरफा आलोचनाओं से घिर गई थी. उस समय टीम को एक ऐसा कप्तान चाहिए था जो उदाहरण देकर टीम का नेतृत्व करें. उस समय मॉर्गन ने ये ज़िम्मेदारी निभाते हुए टीम को एक सूत्र में जोड़ा और अपनी शैली के क्रिकेट से बाकी खिलाड़ियों को भी प्रभावित कर अच्छा खेलने की प्रेरणा दी.

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मॉर्गन ने इस टूर्नामेंट में ना सिर्फ अपने करियर की सबसे बेहतरीन पारी खेली, बल्कि उन्होंने वर्ल्डकप इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक पारी अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ खेली. उस पारी में उन्होंने रिकॉर्ड 17 छक्के लगाए. उन्हें बल्लेबाज़ी करते देख ऐसा लग रहा था कि वे अफ़ग़ानिस्तान के फील्डरों को कैचिंग प्रैक्टिस करवा रहे हों.

शायद मैक्कुलम की आक्रामकता उस दिन मॉर्गन के खेल में दिखी और इंग्लैंड ने पिछले 4 सालों में इसी तरह का आक्रामक खेल दिखाते हुए आज वर्ल्डकप फाइनल में जगह बनाई है. यही मैक्कलम की मॉर्गन और इस टीम पर सबसे बड़ी छाप है जिसने आज इंग्लैंड को विश्व विजय की दहलीज़ पर ला कर खड़ा कर दिया है.

रविवार को जब ये फाइनल ख़त्म हो जाएगा तो दोनों ही कप्तान के भाव अलग अलग होंगे. एक की आंखों में जीत की खुशी होगी और दूसरे की आंखों में हार के आंसू, लेकिन चाहे कोई भी जीते, एक बात तो निश्चिन्त है कि दोनों ही अपनी उस शालीनता से जिसे वे पिछले इतने साल से अपने साथ लिए चल रहे हैं, उससे जीत के बाद परदे के पीछे जाकर अपनी टीम को जीत का लुत्फ़ उठाने देंगे या हार के बाद सबके सामने आकर अपनी टीम की हार का सारा ज़िम्मा उठाते हुए अपने पूरे देश को जवाब देने को तैयार होंगे.

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