प्राचीन भारतीय परंपरा व आधुनिक तकनीक के समावेश से बनेगा नया भारत : राज्यपाल

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राज्यपाल सह कुलाधिपति लालजी टंडन ने कहा कि यदि हम प्राचीन भारतीय परंपरा व आधुनिक तकनीक का सही ढंग से समावेश कर लें तो नया भारत बनने से हमें कोई रोक नहीं सकता। मंगलवार को पूर्णिया यूनिवर्सिटी में पहले ग्लोबल कांग्रेस के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने शोधपरक शिक्षा पद्धति पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि क्या कारण था कि दुनिया में हम ही विश्वगुरु कहलाते थे। इसकी वजह-हमारी शोधपरक शिक्षा पद्धति थी। आज फिर प्राचीन भारतीय परंपरा और आधुनिक तकनीक का सही ढंग से समावेश कर हमें नया भारत बनाना है। हमलोग आज यह नहीं कर पा रहे हैं। हमारे ऋषि-मुनि चिंतन-मनन करते थे। दुर्भाग्य है कि हम अपने पूर्वजों को याद नहीं करते। बिहार भारत ही नहीं विश्व को शिक्षा का ज्ञान दिया है। नालंदा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी जैसी दुनिया में कहीं पुस्तकालय नहीं थी। आज जो प्लास्टिक सर्जरी की जा रही है, उसकी शुरुआत इसी बिहार से हुई।

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राज्यपाल ने कहा कि बाजार के चक्कर में हमने पारंपरिक खेती बंद कर दी. रासायनिक खाद और कीटनाशक का बेतहाशा प्रयोग करने लगे. नतीजा यह है कि आज हमारे खेतों में जहर फैल गया है. उर्वराशक्ति क्षीण हो गयी.

उपज की लागत का बड़ा हिस्सा उर्वरक और कीटनाशक पर खर्च होता है. किसान हताश हैं और अन्न खानेवाले रोगों के शिकार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब भी वक्त है. हम अपने पूर्वजों का स्मरण कर परंपरा की और लौटें.

 जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं. यह जीरो बजट की खेती है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसान पशुपालक भी होते हैं. इसलिए वे बेहतर जानते हैं कि गौमूत्र जहां कीटनाशक का काम करता है तो वहीं गोबर खाद सबसे बढ़िया उर्वरक है.बस अब इनका खेतों में उपयोग करने की जरूरत है ताकि मिट्टी के साथ-साथ मानव शरीर की सेहत भी लौट जाये. उन्होंने कहा कि राज्य में सृजित तीन नये विश्वविद्यालय से जो उम्मीद है उसपर पूर्णिया विवि अग्रसर दिखाई पड़ रहा है.

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