दिव्यांगों को मिलीं कई सुविधाएं

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अन्तज्यरेति बालिका विद्यालय, कुम्हरार के स्थापना दिवस व हेलर केलर जयंती समारोह को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि दिव्यांग जनों को सरकारी नौकरियों में चार प्रतिशत तथा सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए पांच फीसद आरक्षण का प्रावधान किया गया है। बिहार में करीब नौ लाख दिव्यांगों को प्रतिवर्ष 400 करोड़ खर्च कर 400 रुपये प्रति माह पेंशन दी जा रही है। श्री मोदी ने कहा कि भारत सरकार से वृद्ध, विधवा के साथ ही दिव्यांगजनों की पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी करने की मांग की गई है। राज्य सरकार लड़की के पैदा होने से लेकर उसके स्नातक उत्तीर्ण करने पर विभिन्न मदों में करीब 54 हजार रुपये का भुगतान उसके खाते में कर रही है। सामाजिक सुरक्षा के तहत 70 लाख वृद्ध, विधवा व दिव्यांगों के अतिरिक्त 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके 35 लाख वृद्धजनों को भी पेंशन देने का निर्णय लिया गया है, जिस पर सालाना 4,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दिव्यांगों की सुविधा के लिए पूर्व में ही सभी सार्वजनिक स्थलों व सरकारी भवनों में रैम्प निर्माण का निर्णय लिया गया है। 26 वर्षो से संचालित अन्तज्यरेति बालिका विद्यालय के विकास व ब्रेललाइब्रेरी के लिए उपमुख्यमंत्री ने अपनी मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास निधि से पांच लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने बिहार नेत्रहीन परिषद से विद्यालय से पढ़ चुके और पढ़ रहे छात्राओं की आर्थिक-सामाजिक सव्रे कराने का सुझाव तथा समाज के सभी लोगों से आर्थिक सहयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बिहार नेत्रहीन परिषद के अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह, उपाध्यक्ष प्रो. आनन्द मूर्ति, प्रो. अनुराधा सिंह, सचिव रमेश प्रसाद सिंह, कर्नल एसके सिन्हा और कोषाध्यक्ष जसवंत सिंह आदि मौजूद थे।

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की गिरफ्तारी, उनकी सिक्यूरिटी वापस लेने और टेरर फंडिंग जैसे मामलों में कड़ी पूछताछ का असर है कि 30 साल में पहली बार देश के गृहमंत्री की कश्मीर यात्रा पर किसी अलगाववादी संगठन ने घाटी में बंद का आह्वान करने की जुर्रत नहीं की। श्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि हाल के संसदीय चुनाव में जब कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और अलगाववाद पर कड़े रुख के लिए जनादेश मिला है, तब इस मुद्दे पर परंपरागत नरम रुख रखने वाले दलों को भी पुनर्विचार करना चाहिए। कश्मीर नीति की पहली सफलता के लिए गृहमंत्री अमित भाई शाह को बधाई। एनडीए सरकार ने स्वास्य सेवाओं में सुधार, शिशु मृत्यु दर पर अंकुश, टीकाकारण में तेजी, संस्थागत प्रसव और छोटे परिवार जैसे कई मामले में अच्छा काम किया, लेकिन अब भी बहुत-कुछ करने की जरूरत है। दस साल पहले 2009 में राज्य की पहली एनडीए सरकार के समय टीकाकरण मात्र 12 फीसद था। उससे पहले राजद सरकार के 15 साल में टीकाकरण सहित सभी मानकों पर हालत बहुत खराब थी। एनडीए सरकार ने ही टीककरण को 84 फीसद तक पहुंचाया और परिवार नियोजन में बिहार देश के टाप फाइव में पहुंचा। 

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