मुजफ्फरपुर में 100 बिस्तर के अस्पताल का डिजाइन तैयार

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केन्द्रीय स्वास्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि दिमागी बुखार के कहर से जूझ रहे बिहार के मुजफ्फरपुर में 100 बिस्तर के अस्पताल के लिए जगह और उसके डिजायन को अंतिम रूप दे दिया गया है। डॉ. हर्षवर्धन ने यहां मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक में बिहार में दिमागी बुखार के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के बाद कहा कि यह अस्पताल केन्द्र की योजना के तहत बनाया जायेगा।

उन्होंने कहा कि दिमागी बुखार के कारण शनिवार को एक और रोगी की मौत हुई और एक नये मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अभी श्री कृष्ण मेडिकल अस्पताल में 84 मरीजों का उपचार किया जा रहा है जिनमें से चार की हालत गंभीर है और उनकी स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। स्वास्य मंत्री ने कहा कि केन्द्र की टीम पिछले एक सप्ताह से मुजफ्फरनगर में डेरा डाले हुए है।

राज्य और जिला प्रशासन की मदद से यह टीम लोगों में जागरुकता बढ़ा रही है और प्राथमिक स्वास्य केन्द्रों में सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। अस्पतालों में रोगियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

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केन्द्रीय स्वास्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मनोज झालानी ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुजफ्फरपुर के कई अस्पतालों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। संयुक्त सचिव लव अग्रवाल भी शनिवार तक मुजफ्फरपुर में निगरानी कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री ने राज्य में चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) और जापानी बुखार (जेई) के मामलों की स्थिति पर मंत्रालय के अधिकारियों के साथ चर्चा की है.

हर्षवर्द्धन ने कहा, ‘‘केंद्र और राज्य की टीमों ने मुजफ्फरपुर में 100 बिस्तरों वाले ‘पी-आईसीयू’ के स्थान और डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया है, इसे केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मदद दी जाएगी.’’

उन्होंने बताया कि चमकी बुखार (एईएस) से शनिवार को एक पीड़ित की मौत हुई जबकि एक नये मरीज को भर्ती किया गया.

मंत्री ने बताया कि एसकेएमसीएच में इस रोग से पीड़ित 84 रोगी हैं, जिनमें से चार की हालत नाजुक है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है.

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उन्होंने बताया कि पिछले एक हफ्ते से मुजफ्फरपुर में एक केंद्रीय टीम डेरा डाले हुए है.

उन्होंने बताया कि राज्य और जिला प्रशासन के सहयोग से सामुदायिक स्तर पर सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन की कोशिशें की जा रही हैं तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इस रोग की शुरूआत में ही पहचान एवं प्रबंधन को मजबूत किया गया है.

अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (एनएचएम) मनोज झलानी, वरिष्ठ अधिकारी तथा विशेषज्ञों ने एसकेएमसीएच सहित मुजफ्फरपुर का दौरा किया और हालात का जायजा लिया.

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