सूरत अग्निकांड में 21 की दर्दनाक मौत, चश्मदीदों ने बताई रुह कपां देने वाली कहानी

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गुजरात में हीरो का शहर सूरत आज सदमे में है. कल दोपहर तक्षशिला कॉम्प्लेक्स के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने 21 जिंदगियां एक पल में खत्म कर दी. कोचिंग में पढ़ रहे 20 बच्चे और एक महिला टीचप इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठे. सिर्फ सूरत ही नहीं पूरा गुजरात और पूरा देश इस हादसे से दहल गया है. आग और धुएं से जान बचाने के लिए बच्चे कोचिंग सेंटर की छत से कूदे, लेकिन उन्हें जिंदगी नहीं मौत मिली.

तीन लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज

इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है. आरोपियों में हरसुल वेकरिया उर्फ एचके, जिज्ञेश सवजी पाघडाल और भार्गव बूटाणी शामिल हैं. पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि हरसुल और जिज्ञेश ने बिल्डर से पूरी मंजिल खरीदी थी. उसके बाद अवैध निर्माण करवाया था, जबकि, भार्गव बूटाणी ड्राइंग क्लासेस का संचालक है.

कैसे हुआ हादसा?
बताया जा रहा है कि सूरत के जिस कॉम्प्लेक्स में आग लगी वहां की चौथी मंजिल पर कोचिंग क्लास चल रही थी. ये आग दोपहर करीब 3.30 बजे लगी थी. उस वक्त कोचिंग में 40 बच्चे मौजूद थे. शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की वजह सामने आ रही है. बाद में आग बैनर में लगकर बिल्डिंग में फैल गई और आग ने विकराल रूप ले लिया.

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आग फैली तो चौथी मंजिल से कूदे बच्चे
कोचिंग में मौजूद बच्चों ने जैसी ही आग फैलती देखी, वह खुद को बचाने लिए वहां से भागे. लेकिन आग ने इतना विकराल रूप ले लिया था कि बच्चों को वहां से निकलने का रास्ता नहीं मिला. जिसके बाद कई बच्चों ने जान बचाने लिए चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी. मंजिल के बाहर वह खिड़की, बालकनी से लटके नज़र आए लेकिन यहां भी मौत ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. जब वह कूदे तो सीधे नीचे सड़क पर गिर गए. बाद में अस्पताल ले जाते वक्त उनकी मौत हो गई.

चश्मदीदों के मुताबिक, जिस वक्त बच्चे ऊपर से कूद रहे थे, उस वक्त नीचे काफी भीड़ जमा थी. भीड़ ने बच्चों को कैच करने की कोशिश की लेकिन बच्चों का वजन ज्यादा होने की वजह से भीड़ उन्हें कैच करने में नाकाम रही. इस दौरान भीड़ में मौजूद गई लोग घायल भी हो गए.

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पूरी तरह फेल हुई फायर ब्रिगेड सर्विस
चश्मदीदों और वीडियो के मुताबिक, इस हादसे के तुरंत बाद बुलाई गई फायर ब्रिगेड की टीम भी बच्चों को बचा नहीं पाई. चश्मदीदों का कहना है कि फायर ब्रिगेड के पास ना तो नेट (जाल) था. और उनकी सीढ़ियां इतनी छोटी थी कि वह चौथी मंजिल तक भी नहीं पहुंच सकी. कई बच्चों ने सीढ़ियां पकड़ने की कोशिश की, लेकिन इस कोशिश में वह ऊपर से नीचे आ गिरे. इस हादसे के बाद बदइंतजामी को देखते हुए गुजरात सरकार पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं.

अग्निकांड में बाल बाल बचीं आर्ट टीचर दर्शिता
इस भयानक अग्निकांड में कोचिंग की आर्ट टीचर दर्शिता बाल बाल बच गईं. हादसे से पहले दर्शिता अस्पताल चली गईं थी, जिसके चलते उन्हें कोचिंग सेंटर पहुंचने में देर हो गई. दर्शिता की माने तो इस बिल्डिंग और कोचिंग सेंटर में लकड़ी का काम ज्यादा था. कोचिंग सेंटर की सीलिंग में थर्मोकोल का इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैल गई.

कई परिवारों को जिंदगीभर का गम दे गया ये हादसा
इस अग्निकांड ने कई परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसे ताउम्र नहीं भुलाया जा सकता. इस हादसे ने एक पिता के सपने को चूर चूर कर दिया. बेटी की शादी के सपनों को संजोए इस पिता के ख्वाब भी सूरत के इस तक्षशिला कॉम्पलेक्स में झूलस गए. कृष्णा भेखड़िया बतौर ट्रेनी डिजाइनर यहां काम करती थी, लेकिन कल की दर्दनाक घटना ने इस शाम को उसकी जिंदगी का आखिरी पल बना दिया.

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कृष्णा के पिता ने बताया कि आग लगने के दौरान मेरी बेटी कृष्णा अपनी जान बचाने कॉम्पलेक्स से कूदी, जिससे उसका सर फट गया और उसे ब्रेन हेमरेज हो गया. हम उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तबतक उसकी मौत हो गई थी.

21 मौतों का जिम्मेदार कौन है?
इस हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि 21 मौतों का जिम्मेदार कौन है? सरकार ने जांच बिठा दी है. सीएम रुपाणी ने 4-4 लाख मुआवजे का एलान कर दिया है. लेकिन जो जख्म मरने वालों के परिवार को मिले हैं, उनकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस हादसे पर दुख जताया है.

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