मोदी लहर ने ध्वस्त किये सीमांचल के सारे समीकरण

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मोदी करंट में इस बार सीमांचल में एनडीए का परचम लहराया. किशनगंज को छोड़ पूर्णिया, अररिया और कटिहार में एनडीए प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है. तीनों सीटों पर जीत बताने को काफी है कि तमाम विरोधों और स्थानीय मुद्दों को पीछे छोड़ कर मतदाताओं ने इस बार राष्ट्रहित को सामने रख कर मतदान किया है और यही वजह है कि पूरे सीमांचल में एनडीए के परचम लहराने का रास्ता साफ हो गया.

दरअसल, इस बार लोकसभा चुनाव में एक नया समीकरण निकल कर सामने आया है. प्रेक्षकों की मानें तो इस बार जहां पिछले कुछ दशकों से चले आ रहे वोटों के जातिगत जातिगत आधार ध्वस्त हो गये तो ‘माय’ समीकरण भी हवा हवाई हो गया. पुलवामा हमले के बाद पूरे देश में जाति और मजहब से उपर उठकर एक नया समीकरण राष्ट्र हित का बना जो पिछले सभी समीकरणों पर भारी पड़ गया. प्रेक्षकों की मानें तो इसके अलावा एनडीए के घटक दलों के पारम्परिक वोट जबरदस्त ढंग से गोलबंद हो गये, जहां किसी को भी सेंधमारी का मौका नहीं मिल सका.

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इसमें भाजपा, लोजपा और जदयू के अपने पारंपरिक वोट रहे हैं. प्रेक्षकों की मानें तो तमाम कोशिशों के बावजूद दलित और महादलित वोट भी इस बार नहीं डिगे, जिससे एनडीए को पताका लहराने का अवसर मिल गया. पूर्णिया लोकसभा सीट से एनडीए के संतोष कुशवाहा ने दो लाख से अधिक मतों से लीड ली. हालांकि आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी. संतोष लगातार बढ़त बनाए हुए रहे.

संतोष कुशवाहा पिछले चुनाव में जदयू से जीत कर आए थे और तब जदयू एनडीए में शामिल नहीं था. इस बार एनडीए ने फिर उन्हें प्रत्याशी बनाया तो भाजपा के पूर्व सांसद उदय सिंह कांग्रेस में शामिल हो गये. वैसे, जीत के मतों का अंतर बताने के लिए काफी है कि पूर्णिया सीट पर जाति समीकरण काम नहीं आया. मोदी के नाम पर वोट पड़े.  इसी तरह अररिया लोकसभा सीट से एनडीए के प्रदीप कुमार सिंह ने 1 लाख 36 हजार पांच सौ दस वोट से जीत दर्ज की. यहां राजद के सरफराज आलम दूसरे नंबर पर रहे.

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इससे पहले इस सीट पर राजद के सरफराज आलम ने पिछले उपचुनाव में इस सीट पर कब्जा जमाया था. इस सीट का नतीजा चौंकानेवाला रहा है. पिछले लोकसभा उपचनुाव में सरफराज ने जबर्दस्त जीत की थी. इस बार भाजपा ने फिर प्रदीप पर ही दांव खेला. वैसे टिकट की घोषणा के बाद ही विरोध के स्वर उठे. बाद में सुब कुछ शांत हो गया. एनडीए की जबर्दस्त रणनीति काम आयी. माय समीकरण में दरार आयी जो प्रदीप की जीत का कारण बनी. किशनगंज में एनडीए के महमूद अशरफ शुरुआती दौड़ में लगातार बढ़त बनाए हुए थे पर सातवें राउंड के बाद कांग्रेस प्रत्याशी आगे हो गये. लेकिन कांग्रेस की परंपरागत मानी जानेवाली इस सीट पर एनडीए प्रत्याशी ने कांग्रेस प्रत्याशी को जबर्दस्त टक्कर दी. हालांकि किशनगंज के रास्ते बिहार में प्रवेश करने का मंशा पाले ओवैसी को झटका जरूर लगा. ओवैसी ने अपनी पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में जबर्दस्त अभियान चलाया था. कई सभाएं भी की थी, लेकिन शुरू से ही एमआइएम प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे. जदयू ने इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को अंत तक जबर्दस्त टक्कर दी.

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इधर कटिहार में भी जदयू प्रत्याशी दुलाल चंद्र गोस्वामी ने जीत का परचम लहराया. यहां एनडीए प्रत्याशी दुलाल चंद्र गोस्वामी ने लगभग 55 हजार वोटों से अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी कांग्रेस के तारिक अनवर को पराजित किया. यह सीट तारिक की पारंपरिक सीट मानी जाती है. चुनाव से कुछ समय पहले ही तारिक ने एनसीपी छोड़ कर कांग्रेस का दामन थामा था. महागठबंधन में कांग्रेस के खाते में यह सीट गयी. वैसे, तारिक की हार का कारण भीतरघात भी माना जा रहा है. अलबत्ता यह माना जाने लगा है कि इस बार सीमांचल में एनडीए का पताका लहरायेगा.

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