मासूम की रेप के बाद हत्या के दोषी को सजा-ए-मौत

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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विनोद कुमार शुक्ला की अदालत ने बुधवार को चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने और सबूत मिटाने के उद्देश्य से उसकी निर्मम हत्या के मामले में दोषी को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने आज सजा के ¨बदु पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त को पॉस्को अधिनियम की धारा के अंतर्गत मृत्युदंड की सजा दी। साथ ही 32 हजार रुपये जुर्माने की भी सजा दी। दालत में अभियोजन की ओर से बहस करने वाले अपर लोक अभियोजक नरेश कुमार सिंह ने सजा के ¨बदु पर बहस करते हुए अदालत से निवेदन किया कि मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर है। इसलिए अभियुक्त को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। चार वर्षीय मासूम की मां एवं शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद कबीर ने अदालत में पक्ष रखते हुए निवेदन किया कि घटना क्रूर से क्रूरतम है। अभियुक्त ने पूरी योजनाबद्ध तरीके से पहले तो बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद कोई सबूत न रह जाए इसलिए उसकी निर्मम हत्या कर दी। यही नहीं अभियुक्त कस्टडी से भी भाग चुका है और पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उसे फिर गिरफ्तार किया। इसलिए युवक अपराधी चरित्र का है और उसे अधिकतम सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में फिर कोई मासूम शिकार न बने। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अभियुक्त को मृत्युदंड की सजा सुनाई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बड़हरिया थाने के इज माली गांव की चार वर्षीय बच्ची 25 अगस्त 2018 को पड़ोस में मिलाद सुनने के लिए गई थी। इसी बीच पड़ोसी जियाउद्दीन उर्फ धनु ने बच्ची को चॉकलेट का पल्रोभन देकर उसे मक्के के खेत में ले गया। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी। ग्रामीणों ने जियाउद्दीन को मक्के के खेत से निकलते हुए देखा था। खोजबीन करने पर बच्ची का क्षत-विक्षत शव मक्के के खेत से बरामद किया गया था। बच्ची की मां के बयान पर एकमात्र अभियुक्त के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले में उषा सिंह ने भी बहस की। अपर लोक अभियोजक नरेश कुमार सिंह ने बताया कि इसके पूर्व वे इसी प्रकार के दुष्कर्म से जुड़े मामले में रामदेव नाम के एक अन्य अभियुक्त को तत्कालीन अपर जिला न्यायाधीश ज्ञानेश्वर श्रीवास्तव की अदालत से फांसी की सजा दिला चुके हैं।

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