सरकार के कदम से अगले दो वर्षो में किसान कर्ज लेने वाला नहीं बल्कि देने वाला बनेगा:राज्यपाल

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राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि वर्तमान सरकार राज्य के किसानों पर कोई एहसान नहीं करना चाहती है। इसलिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत उनका सम्मान किया जा रहा है। यह अलग बात है कि कोई किसानों का कर्ज माफ कर उनपर एक तरफ एहसान करता है तो दूसरी तरफ कृषि की कई योजना को बंद कर उनका नुकसान भी कर देता है। राज्यपाल रविवार को राज्य स्तर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गोरखपुर, उत्तरप्रदेश से शुभारंभ किये जाने के अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार जिस तरह से बेहतरी भरे कदम किसानों के हित में उठा रही है उससे तो यह लगता है कि आने वाले दो वर्षो में किसान कर्ज लेने वाला नहीं बल्कि कर्ज देने वाला बन जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस स्वामीनाथन आयोग को किसानों के हित को देखने की जिम्मेवारी मिली थी और जिसकी आड़ में किसान नेता अपनी मांग को रखते थे उस स्वामीनाथन ने स्वयं कहा कि पहली बार किसानों के हक में कुछ हो रहा है। उन्होंने कहा कि अभी जरूर यह राशि 6 हजार है पर बाद में यह राशि बढ़ भी सकती है। कुछ लोग सम्मान का सौदा कर किसानों को कर्जदार बनाते हैं। पर देश को एक ऐसा नेतृत्व मिला है जो भ्रष्टाचार का दुश्मन है और वह किसान सम्मान योजना की राशि सीधे किसानों के खाते में भेजने की व्यवस्था भी कर दी है। उस नेतृत्व ने पहले भी कहा था कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा। यह प्रसन्नता की बात है कि देश को पहला ऐसा नेता मिला है जिस व्यक्ति के लिए अपना कुछ नहीं है। केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री की इस सोच से देश के 12 करोड़ किसान लाभान्वित हो रहे हैं। बिहार में 9 लाख 72 हजार से ज्यादा आवेदन आये हैं। उन्होंने एक आंकड़े के हवाले से कहा कि आज 130 करोड़ आबादी वाले इस देश में 123 करोड़ के पास आधारकार्ड और 121 करोड़ मोबाइल है। उन्होंने कहा कि यह नई पशुपालन व कृषि नीति का कमाल है कि आज भारत दूध व अंडा में नम्बर वन है। मछली में नम्बर 2 है। उन्होंने कहा कि इस किसान सम्मान राशि से उन तमाम बड़े लोगों को भी वंचित किया गया है जो नेता हो या पदाधिकारी या अन्य बड़े लोग । यह शुद्ध उन किसानों को मिलेगा जो सचमुच जरूरतमंद है और ढ़ाई एकड़ से कम जमीन है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस योजना के लाभ के लिए लिए फिलहाल 70618 सामान्य किसानों को चयन किया गया है। इनके अलावा 2117 एससी व 209 एसटी वर्ग से आने वाले किसान हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में योग्य जमीन धारक किसान द्वार कृषि विभाग के पोर्टल में स्वयं भरा जा रहा है। इसके लिए विभाग ने सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इस दौरान किसानों की सारी जानकारी जिनमें आधार कार्ड संख्या, बैंक एकाउन्ट वगैरह शामिल है, हासिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो किसान छुट गये हो उनके लिए भी विभाग ने व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान निधि योजना के लिए किसान स्वयं अपना आवेदन भर सकते हैं। आवेदन प्राप्त होने के पांच दिन बाद कृषि समन्वयक पंचायत में जा कर किसानों की दी गई विवरणी का जांच करते हैं। रकवा व भूमि अभिलेखों की जिम्मेवारी अंचल अधिकारी को दी गई है। अंचलाधिकारी प्रत्येक बुधवार व शनिवार को अंचल में इस योजना को ले कर बैठेंगे। जांचोंपरान्त किसानों की सूची अपर समाहर्ता को भेजी जाएगी। अपर समाहर्ता दो दिन के अंदर कृषि विभाग के नोडल पदाधिकरी के पास भेंज देंगे। नोडल पदाधिकारी को एक दिन के अंदर रशि किसानें के खाते में भेज कर पीएम किसान वेब पोर्टल पर अपलोड करेंग। स्वागत भाषण विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार ने तो धन्यवाद ज्ञापन विभाग के निदेशक आदेश तितरमारे ने किया।

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