नमो’ के मंत्र से घटक दलों को मिलेगी नयी ताकत

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तीन मार्च को ‘‘नमो’ के मंत्र से पूरे देश में भाजपा के साथ उसके सभी सहयोगी दलों को नयी ताकत मिलेगी। पिछले लोकसभा चुनाव के आखिरी पड़ाव में इसी गांधी मैदान से नरेन्द्र मोदी ने ‘‘हुंकार’ भरकर दिल्ली का किला फतह किया था। गांधी मैदान में होने वाली एनडीए की संकल्प रैली में एक मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (भाजपा), मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (जदयू) व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान (लोजपा) समेत एनडीए के सभी शीर्ष नेता इकट्ठा होकर विपक्ष के समक्ष शक्ति प्रदर्शन करेंगे।‘‘नमो’ विरोधी नेताओं के पिछले महीने पश्चिम बंगाल में एक मंच पर जुटान के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गांधी मैदान से समस्त विपक्षी दलों को जवाब देंगे। अपने पांच वर्षो के कार्यकाल का हिसाब देंगे और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के अब तक के शासन का हिसाब लेंगे। ज्ञात हो कि तीन फरवरी को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की इसी गांधी मैदान में रैली हो चुकी है। दरअसल दोनों तरफ से गांधी मैदान में चुनावी युद्ध के लिए दनादन तीर चलने शुरू हो गए हैं। हालांकि देश की राजनीति फिजां पुलवामा घटना को लेकर बदली हुई है। पिछले दिनों बरौनी( बिहार) के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशवासियों को एहसास करा चुके हैं कि पुलवामा को लेकर जो आग जनता के दिल में लगी है वही आग उनके दिल में लगी है। दरअसल तीन मार्च को गांधी मैदान में होने जा रही एनडीए की रैली के कई मायने हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मकसद इस रैली के एक तीर से कई निशाने साधने हैं। पटना का गांधी मैदान जहां एनडीए की रैली होने जा रही वहां सबसे करीब उत्तरप्रदेश व पश्चिम बंगाल है। इन दोनों क्षेत्रों में लोकसभा की कुल 122 सीटें हैं। उत्तर प्रदेश में 80 तथा पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं। देश की कुल 545 लोकसभा सीटों में 122 सीटें काफी मायने रखती हैं। उत्तरप्रदेश में सपा व बसपा के एक साथ गठजोड़ करने के बाद भाजपा इन क्षेत्रों को लेकर काफी आक्रामक होकर गतिविधियां बढ़ा दी हैं। आज प्रयागराज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गंगा में डुबकी लगायी। जाहिर है जब पीएम यहां पटना के गांधी मैदान से रैली को संबोधित करेंगे तो उनकी आवाज पड़ोसी उत्तर प्रदेश में भी अवश्य जाएगी। भाजपा का आकलन है कि यदि उत्तर प्रदेश में जो घाटा होगा उसकी भरपाई पश्चिम बंगाल से हो जाएगी। यहां पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा की सीटें हैं। पंचायत के चुनाव में भाजपा को उम्मीद से अधिक सीटें मिली थीं। पटना की गांधी मैदान की रैली का संदेश कोलकत्ता भी पहुंचेगा। इस तरह पूरा गणित लगाकर गांधी मैदान से एनडीए रैली की योजना बनाई गई है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपा के साथ आने के बाद एनडीए को काफी बल मिला है। पुरानी जातीय जनगणना के अनुसार बिहार में कोयरी (कुशवाहा) 4.1 प्रतिशत एवं कुर्मी 3.6 प्रतिशत हैं। बिहार से भाजपा, जदयू व लोजपा की मजबूत कड़ी मिशन 2019 में तैयार हो गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए ने प्रदेश की कुल 40 सीटों में 31 सीटें लाकर विरोधी दलों की हवा निकाल दी थी। इस चुनाव में भाजपा को 29.40 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि लोजपा को 6.40 प्रतिशत मत मिले थे। इस तरह वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को करीब 36 प्रतिशत मत मिले। ध्यान रहे कि वर्ष 2014 के चुनाव में एनडीए को 36 प्रतिशत मत (रालोसपा के तीन प्रतिशत मत को छोड़कर) उस स्थिति में मिले जब जदयू उसके साथ नहीं था। जदयू के (करीब 16 फीसदी वोट) साथ आ जाने के बाद अब परिस्थितियां अलग हो जाने की उम्मीद है।

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