मिशन 2019 के लिए लालू की गैरमौजूदगी में तेजस्वी ने कसी कमर

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file photo

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव मिशन 2019 की तैयारियों में पूरी तरह से जुट गए हैं. पिता लालू प्रसाद की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब वो चुनावी मोड में उतर गए हैं यही कारण है कि सीटों के बंटवारे से ठीक पहले तेजस्वी ने एक साथ सात जिलों से अपनी पार्टी के विधायकों को बैठक के लिए पटना बुलाया है. इस बैठक में तेजस्वी न केवल विधायकों से चर्चा करेंगे बल्कि लोकसभा के संभावित उम्मीदवारों के नाम पर फीड बैक भी लेंगे.

रविवार को तेजस्वी के पटना स्थित सरकारी आवास 5 देशरत्न मार्ग में दोपहर 1 बजे ये बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में पार्टी के सात ज़िले से आने वाले विधायक शामिल होंगे साथ ही विधायकों के साथ पार्टी के कुछ सीनियर नेता भी इस बैठक में होंगे. बैठक में जिन जिलों के विधायकों को शामिल होना है उनमें पटना, नालंदा, वैशाली, अरवल, जहानाबाद, छपरा और भोजपुर जिले के विधायक हैं.

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इसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसमें कई सीटें लोकसभा की हैं जिस पर महागठबंधन में शामिल सभी दल दावेदार हैं. पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बैठक में आने वाले विधायकों से लोकसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी फ़ीडबैक लेंगे और टिकट की दावेदारी को लेकर दम को परखेंगे.

मालूम हो कि झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में लालू की जमानत याचिका को खारिज किया है ऐसे में लालू की जगह उनके छोटे बेटे तेजस्वी ने लेते हुए चुनावी कार्य शुरू कर दिया है.

 

तेजस्वी यादव छोटी सी उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में बिहार के दम पर अपनी एक अलग छवि बनाई है। कभी उनमे उनके फायर ब्रांड अगर पिता लालू यादव का राजनीतिक अक्स उभारता है तो वहीं उनकी कूल-कूल शैली राजनीति के उस बहाव को दर्शाती है जिसकी लोकतंत्र में सबसे ज्यादा जरूरत है। कहा जाता है कि राजनीति में नेता पुत्र विरासत लेकर आगे बढ़ते हैं परन्तु तेजस्वी ने राजनीतिक जमीन पर एक अलग कार्यशैली से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पिता लालू यादव के घोटाले में फंसने के बाद तेजस्वी ने जिस तरह से पार्टी को आगे बढ़ा रहे है इसमें दो राय नहीं की एक दिन अपने पिता से अधिक प्रभावशाली होंगे ।

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बिहार में प्रतिपक्ष का नेता बनने के बाद तेजस्वी की कार्यशैली में एक नया तेज उभर आया है और वह राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की बात करते हैं तो उन्हें पूरा महत्व मिलता है। आज के लोकप्रिय नेता में और यूथ आईकोन में जो गुण होने चाहिएं वह सब तेजस्वी में हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने के बावजूद तेजस्वी जमकर जूझ रहे हैं ,तेजस्वी ने प्रमाणित किया है कि डिग्री लेने से कोई राजनीति में अग्रणी नहीं बन जाता बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के दुःख-दर्द को समझ कर अपनी संस्कृति को निभाने वाला ही नेता कहलाता है। तेजस्वी ने अपनी राजनीतिक विरासत को अपनी सूझबूझ तथा जमीनी मेहनत से सींच कर आगे बढ़ाया है। उन्हें गंभीरता से लिया जाता है और समय आएगा कि उनके नेतृत्व का लोहा देश मानेगा। लालू यादव ने जिस तरह सीएम पद संभाला तथा रेलमंत्री बन कर एक लाभकारी महकमा बना कर दिखाया तो एक दिन तेजस्वी भी राजनीति में सफलता का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, इसका जवाब वक्त जरूर देगा।

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