हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे मौलाना मजहरूल हक

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शनिवार को जंग-ए-आजादी के महान, योद्धा देशभूषण मौलाना मजहरुल हक की 153 वीं जयंती समारोह उनके जन्म स्थली मदरसा इस्लामिया बहपुरा,पटना में धूमधाम से मनाया गया। उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भाव-भीनीं श्रद्धांजलि अर्पित किया।कार्यक्रम का शुभारंभ मदरसा के छात्राओ नें स्वागत गीत गाकर किया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राम.पाल यादव ने कहा कि मौलाना साहेब युगों-युगों तक याद किये जायेंगे। उन्होंने जन्म स्थली के विकास के लिये वे भरपूर मदद करने का आश्वाशन दिया। जबकि वक्ताओं ने हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक मौलाना साहेब के जन्म से स्थली की उपेक्षा पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रति वर्ष उनकी जयंती मनायी जाती है।इसपर सूबे के मुख्यमंत्री,मंत्री और बड़े-बड़े अधिकारी आते रहे।बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर चले गये, लेकिन उनकी जन्म स्थली मदरसा इस्लामिया और मध्य विद्यालय बहपुरा आज भी उपेक्षित है।वक्ताओं ने कहा कि आज सूबे के शिक्षा मंत्री .ष्णनंदन वर्मा सहित कई नेताओं को निमंतण्रदिया गया था,लेकिन किसी ने समारोह में शिरकत करना मुनासिब नहीं समझा,जो बड़े ही दु:ख की बात है।इस अवसर पर पूर्व विधायक प्रो0 सूर्यदेव त्यागी ने कहा कि मौलाना साहेब ने अपनी अधिकांश जमीन और संपति कांग्रेस और सरकार को दान दे दी थी।सदाकत आश्रम इसका जीता-जागता उदाहरण है।आजादी के इतने वर्ष गुजरने के बाद भी उनकी जन्म स्थली उपेक्षा का शिकार होकर अपनी बदहाली पर चार-चार आँसू बहा रहा है।वक्ताओं ने कहा कि जिस भूमि पर मदरसा और मध्य विद्यालय है,उस मदरसा और स्कूल का नाम मौलाना साहेब के नाम पर आज तक नहीं किया गया,जो बड़े ही दु:ख की बात है। पुष्पांजलि अर्पित कर मुख्य अतिथि केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राम.पाल यादव के साथ-साथ अल्पसंख्यक आयोग के प्रदेश अध्यक्ष मो. सलाम,प्रमुख मानती देवी,लोजपा नेता कामेश्वर यादव,जेडीयू नेता अजीत सिंह,पूर्व मुखिया सहदेव राय,नंदू यादव,किसान नेता अजीत सिंह,पवन कुमार ने आदि सैकड़ों ने उनकी बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य विन्देश्वरी प्रसाद सिंह ने की।मौलाना मजहरुल हक बहुउद्देशीय प्रगति समिति द्वारा आयोजित इस जयंती समारोह में कमेटी के अध्यक्ष इबरार अहमद, ,मुखिया जवाहर विश्वकर्मा,कोषाध्यक्ष दिलीप कुमार, संरक्षक रामदेवल सिंह,पूर्व मुखिया सिराजुद्दीन, संयोजक गुड्डू कुमार यादव आदि ने अपना अहम योगदान किया।कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य सुरेंद्र जी, बलराम सिंह यादव ,रामगोविन्द सिंह,शिक्षाविद गोरखनाथ विश्वकर्मा,ईरी सिंह,शशिरंजन,प्रो0 .ष्ण कुमार सिंह,आदि ने उनके जीवनी पर प्रकाश डाला।वक्ताओं ने कहा कि उनके दादा मो0 फरियत अली 1857 के सेनानी कुँवर सिंह के साथ देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी। उनके पिता का नाम मो0दुल्लाह व माता का नाम सफीना वेगम था।उनका जन्म ननिहाल बहपुरा,पटना में 22 दिसंबर 1866 में हुई।उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना में हुई।वे 1886 में लखनऊ में शिक्षा ग्रहण किया तथा 1988 में वकालत की पढ़ाई करने इंग्लैंड गये थे।जहां उनकी मुलाकात गांधी से हुई।1908 में वे कांग्रेस के विभिन्न पदों को सुशोभित करते हुए आजादी की लड़ाई में उतर गए।वे बिहार को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभायी।वे मदर लैंड नामक अखबार भी निकाला था।1922 में वे फरीदपुर ,छपरा जाकर अपने गांव रहने लगे।27 दिसंबर को उनको हार्ड अटैक हुआ और 2 जनवरी 1930 की उनकी मौत हो गयी। कार्यक्रम में भारी संख्या में शिरकत करते हुऐ हिन्दू-मुसलमानों ने अपनी चट्टानी एकता बनाये रखने का संकल्प लेते हुए कहा कि यही मौलाना साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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