बिहार ने दर्ज की इतिहास की सबसे बड़ी जीत

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बिहार की रणजी टीम ने अपनी ही धरती पर 42 वर्षों बाद जीत का स्वाद चखा है. मोइनुल हक स्टेडियम में बिहार ने सिक्किम को 395 रनों से हराया. इससे पहले वर्ष 1976 में तत्कालीन उड़ीसा के खिलाफ खेलते हुए जीत दर्ज की थी. बिहार के आशुतोष अमन ने हरफनमौला प्रदर्शन करते हुए दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट चटकाये. साथ ही पहली पारी में आठ चौकों और एक छक्के की मदद से सर्वाधिक 89 रन बनाये. 

फिरकी गेंदबाजों की जोड़ी आशुतोष अमन और समर कादरी ने ऐसा जाल बिछाया कि सिक्किम उसमें उलझकर रह गया। इस कारण बिहार ने रणजी ट्रॉफी के प्लेट ग्रुप में सिक्किम के खिलाफ 395 रन से जीत दर्ज की, जो इस टूर्नामेंट के इतिहास में बिहार की रनों के हिसाब से सबसे बड़ी जीत दर्ज की। इस कारनामे के कारण 69 साल पहले दर्ज की गयी 356 रनों की जीत पीछे छूट गयी। बिहार को इस जीत से छह अंक मिले जिससे उसके पास अब तीन मैचों से सात अंक हो गये हैं। बिहार अब अगला मैच छह दिसम्बर से पटना में ही अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ खेलेगा। बिहार ने सिक्किम को जीत के लिए दूसरी पारी में 504 रन का लक्ष्य दिया था। लेकिन पौने दो दिन के बचे हुए समय में सिक्किम के बल्लेबाज बिहार लेग स्पिनर आशुतोष अमन और समर कादरी को नहीं झेल सके। 32 साल के आशुतोष ने लगातार दूसरी पारी में पांच विकेट लिये। साथ ही पहली पारी में विकेट नहीं लेने वाले 29 साल के समर कादरी ने भी पांच विकेट हासिल किये। इस तरह आशुतोष ने मैच में 41 रन देकर कुल 10 विकेट हासिल लिये। आशुतोष बाद में मैन ऑफ द मैच घोषित हुए जिसे बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने प्रदान किया।इस पारी में सिक्किम के लिए उनके स्टार खिलाड़ी मिलिंद कुमार एक बार फिर नाकाम रहे। पहली पारी की तरह इस बार भी वह 13 रन पर आउट हो गये। उनके सस्ते में आउट होने के कारण ही सिक्किम को आसानी से हार का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा 32 रन बिपुल शर्मा ने योगदान किया।मोइनुल हक स्टेडियम में 20 साल बाद आयोजित यह मैच चार के बजाय तीन दिन में ही समाप्त हो गया। बिहार ने अपनी जीत दूसरे दिन ही पक्की कर ली थी जब उसने सिक्किम को 288 के जवाब में केवल 81 रन पर समेट दिया था। लेकिन बिहार ने 201 रन की बढ़त लेने के बावजूद विपक्षी को फॉलोआन नहीं खेलने को कहा और खुद बल्लेबाजी शुरू कर दी। तीसरे दिन बिहार ने अपनी दूसरी पारी चार विकेट पर 150 रन से आगे खेलना शुरू किया और तेजी से सात विकेट पर 296 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। डेब्यू मैच खेल रहे उत्कर्ष भाष्कर ने 59 और विकास रंजन ने 55 रन का योगदान किया। कप्तान बाबुल कुमार पहली गेंद पर आउट हो गये। सिक्किम की ओर से मिलिंद ने कुमार 63 रन देकर चार विकेट लिये।

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सिक्किम के खिलाफ जीत के हीरो रहे आशुतोष अमन ने दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट लिये। ऐसा कारनामा रणजी ट्रॉफी के इतिहास में मोइनुल हक स्टेडियम में पहले किसी गेंदबाज ने नहीं दिखाया था। आशुतोष ने साथ ही मैच में दस विकेट लेकर इस मैदान पर 47 साल पहले के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। 1971-72 में सबसे पहले बिहार की ओर से अंजन भट्टाचार्य ने 64 रन देकर 10 विकेट लिये थे जबकि आशुतोष ने उनसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 41 रन देकर इतने ही विकेट लिये।बिहार ने दर्ज की 42 साल बाद जीतबिहार ने मोइनुल हक स्टेडियम में 42 साल बाद पहली बार जीत दर्ज की। इससे पहले बिहार ने 1976 में उड़ीसा को एक पारी और 226 रन से हराया था। बिहार ने कुल मिलाकर इस स्टेडियम में चौथी और पटना में पांचवीं जीत हासिल की है। एक जीत बिहार को 1959 में गांधी मैदान में मिली थी। बिहार ने रणजी ट्रॉफी में इससे पहले अंतिम बार 2003-04 में नागपुर में विदर्भ के खिलाफ अपना मैच जीता था।28 नवम्बर के मैच में जीत की तिकड़ीबिहार ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास में कुल तीन मैच खेले हैं, जिसकी शुरुआत 28 नवम्बर को हुई। संयोग से बिहार ने तीनों ही मौके पर जीत हासिल की और इसकी तिकड़ी पूरी कर ली। इससे पहले बिहार को 1975 और 1991 में क्रमश: असम और त्रिपुरा के खिलाफ जीत मिली थी।समर कादरी ने सातवीं बार झटके पांच विकेटस्पिनर समर कादरी ने दूसरी पारी में पांच विकेट लिये। यह उनके रणजी करियर का सातवां मौका है जब उन्होंने किसी पारी में पांच या अधिक विकेट प्राप्त किये हैं। लेकिन बिहार के लिए पहली बार उन्होंने ऐसा किया, जबकि बाकी के छह अवसर झारखंड की ओर से खेलते हुए आए थे। आखिरी बार कादरी ने ऐसा कारनामा 2015-16 में किया था।

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टीमें :

बिहार : विकास रंजन (W), कुमार रजनीश, बाबुल कुमार (C), विवेक मोहन, केशव कुमार, एमडी रहमतुल्ला, आशुतोष अमन, इंद्रजीत कुमार, विशाल दास, समर क्वाद्री, उत्कर्ष सिंह.

सिक्किम : नीलेश लैमिचाने (C), असिश थापा, मिलिंद कुमार, ली योंग लेपचा, बिपल शर्मा, बिबेक दयाली (W), बिजय सुब्बा, जहां उदीन, प्रीतम निराला, आमसी राय, ईश्वर चौधरी.

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