नए एचआईवी संक्रमण में 16 फीसद कमी

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सरकार और यूनिसेफ की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम के चलते बिहार में वर्ष 2010 से 2017 के दौरान नए एचआईवी संक्रमण में 16 प्रतिशत की कमी आयी है। देश में यह कमी 27 प्रतिशत दर्ज की गयी है। नए एचआईवी संक्रमण में बिहार देश का दूसरा राज्य है जिसका 10 प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर पर योगदान है जबकि पहला तेलंगाना है जिसका प्रतिशत 11 है। वहीं एड्स के कारण वर्ष 2017 में हुई मौत में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ये बातें यूनिसेफ के बिहार के हेल्थ स्पेशलिस्ट, डॉ. सैयद हूबे अली ने नाको (नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) द्वारा जारी फैक्ट शीट 2017 के आधार पर दी। आंकड़ों के अनुसार बिहार में 15-49 वर्ष के आयु में 0.16 प्रतिशत एचआईवी का प्रसार था। करीब 1.15 लाख एचआईवी संक्रमित व्यक्ति राज्य में थे। हालांकि इनमें 45.51 हजार महिलाएं थीं। 2017 में 8.85 हजार लोग नए एचआईवी संक्रमित थे और 3.30 हजार व्यक्ति की इसी वर्ष एड्स से जुड़े रोग से मौत हो गयी। महिला (15 वर्ष से अधिक) नए एचआईवी संक्रमण 41 प्रतिशत और एड्स से संबंधित मौत में 37 प्रतिशत शिकार होते हैं। कुल मिलाकर वर्ष 2017 में 31 प्रतिशत की अधिक मृत्यु दर्ज की गयी। उन्होंने बताया कि एचआईवी संक्रमित मरीजों को एचआईवी जांच केन्द्र में मुफ्त जांच, सलाह एवं दवा उपलब्ध करायी जाती है। इस कारण 16 प्रतिशत एचआईवी संक्रमण में कमी दर्ज की गयी है। देश में 15-49 वर्ष के आयु में 0.22 प्रतिशत एचआईवी का प्रसार था। करीब 21.40 लाख एचआईवी संक्रमित व्यक्ति थे। इनमें से 97 प्रतिशत व्यक्ति 15 वर्ष से अधिक उम्र के थे और इनमें से करीब 42 प्रतिशत महिला 15 वर्ष से अधिक उम्र की भी थी। 2017 में 87.58 हजार लोग नए एचआईवी संक्रमित थे और 69.11 हजार व्यक्ति इसी वर्ष एड्स से जुड़े रोग से मौत हुई। व्यस्क (15 वर्ष से अधिक) नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से संबंधित मौत में 96 प्रतिशत शिकार होते हैं। महिला (15 वर्ष से अधिक) नए एचआईवी संक्रमण 40 प्रतिशत और एड्स से संबंधित होने वाली मौत में 31 प्रतिशत शिकार होते हैं। वर्ष 2010-2017 के बीच एचआईवी नए संक्रमण में 27 प्रतिशत की कमी हुई है। सरकार का 2010-2020 के बीच एचआईवी संक्रमण 75 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डॉ. हूबे अली ने बताया कि एचआईवी परीक्षण महत्वपूर्ण है, ताकि समुचित इलाज हो सके। हालांकि एचआईवी परीक्षण में बहुत सारी कलंक एवं भेदभाव है। ज्यादातर लोग इसकी गोपनीयता के प्रति संशक्ति रहते हैं। बिहार के सभी 38 जिलों में सरकारी एवं गैर सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं सभी 638 स्वास्य संस्थानों में एचआईवी जांच की सुविधा उपलब्ध हैं। इसके अलावा 38 अनुमंडलीय अस्पताल, 67 रेफरल अस्पताल एवं 8 नगर निगम प्रसूति वार्ड में भी सुविधा उपलब्ध है। 5 रेलवे एवं 1 सैन्य अस्पताल में भी जांच सुविधा उपलब्ध है। बिहार के 1362 प्रसव केन्द्रों पर एचआईवी स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध है। जनवरी से अक्टूबर 2018 के बीच 28.45 लाख गर्भवती प्रसव पूर्व जांच के लिए दर्ज की गयी जिनमें से 13.02 लाख का एचआईवी जांच किया गया। जिसमें से 524 महिलाएं पॉजिटिव पायी गयी। राज्य स्वास्य समिति की मातृ स्वास्य शाखा एवं बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में गर्भवती माताओं की एचआईवी जांच के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान एवं ग्राम स्वास्य,स्वच्छता एवं पोषण दिवस जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर गहन रूप से कार्य किया जा रहा है। बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी के संयुक्त निदेशक मनोज कुमार सिन्हा ने बताया कि विश्व एड्स दिवस के मौके पर 1 दिसंबर को एक जागरूकता रैली का आयोजन किया जाएगा जिसमें 1000 से अधिक स्कूली बच्चे, सरकारी कर्मचारी एवं आमलोग शामिल होंगे।

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