डैमेज कंट्रोल मिशन टू में जुटे रणनीतिकार

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आगामी लोकसभा चुनाव को ले कर एनडीए गठबंधन के बीच डैमेज कंट्रोल पार्ट वन के लगभग समापन के बाद अब इनके रणनीतिकार ‘‘ डैमेज कंट्रोल’ टू की सफलता के समीकरण तलाशने में लगे हैं। एनडीए में शामिल दलों के बीच सीट की हिस्सेदारी के बरक्स सीट चयन को लेकर अभी भी कुछ सीटों को लेकर ऊहापोह जारी है। उम्मीद है छठ पर्व के बाद दलों को लेकर सीटों के चिन्हित करने की कमेटी गठित कर दी जाएगी। एनडीए रणनीतिकारों का भरोसा करें तो डैमेज कंट्रोल 02 के पहले मंत्रिपरिषद के विस्तार को आकार दिया जा सकता है। इस रणनीति के तहत गठबंधन दलों के बीच राज्य की सत्ता में भागीदारी को लेकर जो कुछ मलाल है उसे दूर किया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों की मानें तो इसके बाद सीटों की संख्यात्मक हिस्सेदारी के बाद दलों के चिन्हित सीटों पर सहमति बनाने की रणनीति का सियासी खेल शुरू हो जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि इसके लिए कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएगी जिनमें भाजपा व जदयू के तीन-तीन व रालोसपा व लोजपा के एक-एक सदस्य होंगे। मिली जानकारी के अनुसार गत लोकसभा चुनाव 2014 में मात्र दो सीटों पर जीत हासिल करने वाली जदयू अब भाजपा के बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह संख्या 16 या 17 -17 भी हो सकती है। परन्तु इसके निर्धारण को लेकर भी कई समस्या सामने उठ खड़ी हुई है। बताया जाता है कि जदयू लोकसभा चुनाव 2019 में सीटों के साथ-साथ क्षेत्र विशेष का भी ध्यान रख रही है। इसके तहत जदयू-भाजपा ने लोकसभा सीटों का युग्म बनाया है। मसलन बेगूसराय-मुंगेर,बांका -भागलपुर, दरभंगा -झंझारपुर, औरंगाबाद -आरा। जदयू के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि इन चिन्हित लोकसभा के युग्म विशेष से एक सीट जदयू तो एक सीट भाजपा लड़े। ये सारी सीटें भाजपा के द्वारा जीती गई हैं केवल मुंगेर को छोड़ कर जो वर्ष 2014 की लोकसभा चुनाव में लोजपा के हाथ लगी थी। इससे दोनों को मदद मिल सकती है। यह तय यह होने जा रहा है कि उम्मीदवार विशेष को सामने रखकर सीटों का चयन किया जाए। वर्ष 2014 की लोकसभा में 22 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा भी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर एक लोकसभा सीट से कुशवाहा तो दूसरे पर कुर्मी जाति से उम्मीदवार उतारना चाहती है। लोकजनशक्ति पार्टी की समस्या सीटों की संख्या के साथ-साथ पूर्व के जीती गई लोकसभा सीट में से कुछ को बदलने की चल रही है। ऐसे सीटों में खगड़िया,मुंगेर व वैशाली है। कहा जा रहा है कि अगर रामविलास पासवान को राज्यसभा में भेज कर उन्हें दलित वोट के लिए देश भ्रमण पर भेजा जाना तय हुआ तो उनके पुत्र चिराग पासवान की संभावना हाजीपुर से लड़ने की हो सकती है। लोजपा के भीतरखाने की मानें तो लोजपा की नजर नवादा व गोपालगंज लोकसभा पर है। रालोसपा अभी सीटों की हिस्सेदारी को लेकर ही असमंजस की स्थिति है। ऐसी र्चचा है कि श्री कुशवाहा काराकाट के बदले उजियारपुर लड़ना चाहते हैं। मगर यह सीट चूंकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय की पसंदीदा सीट है और वे घोषणा भी कर चुके है कि वे उजियारपुर से लड़ेंगे। ऐसे में डैमेज कंट्रोल करने को लेकर बनने वाली कोऑर्डिनेशन कमेटी के सामने एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी तो आने वाली है ही साथ ही गठबंधन के दलों को साथ लेकर महागठबंधन की मंशा पर पानी फेरने का भी है।

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