सूबे की सांस्कृतिक विरासत अत्यन्त समृद्ध : राज्यपाल

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राज्यपाल लालजी टंडन के कहा कि बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत अत्यन्त समृद्ध रही है। इस पर हमें गौरवान्वित होना चाहिए। स्वाभिमान हमें राष्ट्रप्रेम से जोड़ता है और हम अपने देश और प्रदेश के नवनिर्माण के लिए संकल्पित होते हैं। युवा पीढ़ी भी इसी गौरव-बोध से प्रेरित होकर भारत एवं बिहार के नवनिर्माण हेतु तत्पर होगी। राज्यपाल ने ‘‘राम-जन्मभूमि’ के मुद्दे पर कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने भारतीय जनतंत्र को काफी मजबूती प्रदान कर विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। उन्होंने विास व्यक्त किया कि अन्तत: जनभावनाओं का सम्मान होगा। विविद्यालयों के अधिकारियों को बेहतर कार्य करने की हिदायत दी गयी है नहीं तो छोड़ कर चले जाने की भी चेतावनी दी गयी है। इसका असर अब दिखने लगा है।राज्यपाल श्री टंडन शनिवार को यहां एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर ही समुचित अवसर उपलब्ध होने पर विकास के सपने को साकार किया जा सकता है।समाज के कल्याण के लिए संचालित कार्यक्रमों की उपलब्धियों को मूल्यांकित किया जाना एक सार्थक एवं अनूठी पहल है। राज्यपाल ने कहा कि केवल नकारात्मक नजरिये से न तो देश और समाज का नवनिर्माण हो सकता है और न ही विकास की प्रक्रिया तेज हो सकती है। उन्होंने कहा कि आज केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के लाभ समाज के अभिवंचित और कमजोर वगरे तक सीधे पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि वे ‘‘प्रोटोकॉल’ के निर्वहन में पूरा विास रखते हैं। किन्तु सच्चाई को कबूलने से भी परहेज नहीं करते। ‘‘प्रोटोकॉल’ की जकड़नों में उनका विास नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि ‘‘ कल मैंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फोन कर बिहार के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में गरीबों और वंचितों के घर तक बिजली-कनेक्शन पहुंचाने के काम को निर्धारित समयसीमा के पूर्व पूरा हो जाने पर, उन्हें बधाई दी है। जो वर्षो से अंधेरों में रह रहे हैं, उनके घर-आंगन तक इस बार की ‘‘दीपावली’ के पहले ही उजाला फैलाकर सरकार ने अगर कीर्तिमान रचा है, तो निश्चित रूप से उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि एक समय था, जब ‘‘बिहार जैसे राज्यों को ‘‘बीमारू’ राज्यों की श्रेणी में रखा गया था। किन्तु केन्द्र एवं राज्य सरकार की पहल से शिक्षा, स्वास्य, पेयजल एवं स्वच्छता, आधारभूत संरचना, कृषि, उद्योग, सेवाएं एवं समृद्धि आदि की दृष्टि से राज्य में आज काफी तेजी से प्रगति हो रही है। सामाजिक कल्याण एवं विकास-कायरे का वास्तविक मूल्यांकन कर सार्थक मुद्दों को उठाना मीडिया का दायित्व है। श्री टंडन ने कहा कि बिहार राज्य चंद्रगुप्त और चाणक्य की धरती रहा है। कौटिल्य के ‘‘अर्थशास्त्र’ के सिद्धांतों की आज भी पूरी दुनिया में प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा कि ‘‘सर्जरी विज्ञान के जनक’ माने जाने वाले आयुव्रेदाचार्य सुश्रुत की भी पूरी दुनिया में प्रसिद्धि है। राज्य में उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी विकास-प्रयासों को गति दी गई है। विविद्यालयीय अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिए गये हैं कि ‘‘बेहतर काम करना होगा अन्यथा छोड़कर जाना होगा।’ परिणामत: स्थिति में तेजी से सुधार दिखने लगे हैं। कृषि क्षेत्र में ‘‘इन्द्रधनुषी क्रांति’ लाने तथा कला एवं संस्कृति व पर्यटन से जुड़े स्थलों के विकास हेतु तत्परता से प्रयास चल रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि केन्द्र एवं बिहार सरकार बेहतर ढंग से काम कर रही है। राज्यपाल ने ‘‘आयुष्मान योजना’, ‘‘सौभाग्य योजना’, ‘‘उज्ज्वला योजना’, ‘‘सात निश्चय योजना’ आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे गरीबों का भरपूर कल्याण हो रहा है। उन्होंने कहा कि लघु उद्योगों के लिए 59 मिनट के भीतर एक करोड़ रुपये तक की ऋण-राशि ऑनलाइन स्वीकृत करने का केन्द्र का निर्णय राज्यों में औद्योगिक विकास एवं आर्थिक सशक्तीकरण में महवपूर्ण भूमिका निभायेगा। विकास की प्रक्रिया में सबकी सहभागिता होनी चाहिए। ‘‘मीडिया’ की भूमिका भी समीक्षक के साथ-साथ सहयोगी की भी है। विसंगतियों पर निंदा होनी चाहिए। किन्तु उपलब्धियों की प्रशंसा भी भरपूर होनी चाहिए। एक सवाल के जवाब में राज्यपाल श्री टंडन ने कहा कि उनकी किताब ‘‘अनकहा लखनऊ ’ लखनऊ की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को सबके सामने लाती है। उन्होंने पूरी बेबाकी से कहा कि लखनऊ सिर्फ नबाब और कबाब का शहर कभी नहीं रहा है। प्राचीन अवध प्रान्त के एक हिस्से के रूप में इसकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान रही है। कार्यक्रम में कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार सहित कई गणमान्य जन, बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

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