राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने दीं दुर्गापूजा की शुभकामनाएं, मुख्यमंत्री ने पटनदेवी में की पूजा अर्चना

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राज्यपाल लालजी टंडन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेशवासियों को दुर्गा पूजा व दशहरे की शुभकामनाएं व बधाई दी है। राज्यपाल ने कहा कि दुर्गा पूजा असत्य पर सत्य की जीत का पर्व है। उन्होंने राज्य की जनता से अनुरोध किया है कि इस पर्व को प्रेम और भाईचारे के साथ मनाएं ताकि गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्रीयता की भावना सुदृढ़ हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गा पूजा एवं दशहरा का पर्व हर्ष एवं उल्लास का पर्व है। दशहरा को विजय पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह हमारे जीवन में संयम एवं आत्मिक बल का संचरण करने वाला पर्व है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि वे दशहरा को आपसी भाईचारा एवं शांतिपूर्ण तरीके से हर्षोल्लास के साथ मिलजुलकर मनाएं।

नीतीश कुमार ने की पटन देवी मंदिर में पूजा-अर्चना, लोगों को दी शुभकामनाएं

पटना : शारदीय नवरात्र के अष्टमी के दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना सिटी स्थित शक्तिपीठ छोटी पटन देवी पहुंचे. वहां उन्होंने देवी की पूजा-अर्चना की और राज्य की खुशहाली के लिए प्रार्थना की. मुख्यमंत्री के साथ स्थानीय विधायक और बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव भी थे.

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इससे पहले सप्तमी के दिन भी नीतीश कुमार ने पटना के खाजपुरा, शेखपुरा, दुर्गा आश्रम और डाक बंगला स्थित दुर्गा पूजा के पंडालों में जाकर मां दुर्गा का दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. इसके बाद उन्होंने प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं भी दी.

सप्तमी के दिन पटना के विभिन्न पंडालों में की पूजा.

बिहार की राजधानी पटना स्थित पटनदेवी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है. देवी भागवत और तंत्र चूड़ामणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी. नवरात्र के दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है. सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं. पटन देवी भी दो हैं- छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी, दोनों के अलग-अलग मंदिर हैं.

यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वर्णाभूषणों, छत्र और चंवर के साथ विद्यमान हैं. लोग प्रत्येक मांगलिक कार्य के बाद यहां जरूर आते हैं.

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इस मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है. कहा जाता है कि यहीं से निकालकर देवी की तीन मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया था. वैसे तो यहां मां के भक्तों की प्रतिदिन भारी भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के प्रारंभ होते ही इस मंदिर में भक्तों का तांता लग जाता है.

 

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