मराठा आंदोलन के दो साल पूरे होने पर आज महाराष्ट्र बंद, जरूरी सेवाओं पर असर नहीं

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महाराष्ट्र में गुरुवार को मराठा समूहों के संघ सकल मराठा समाज ने नवी मुंबई को छोड़कर पूरे महाराष्ट्र में ‘बंद’ बुलाया है. इनकी मांग है कि मराठा समाज को आरक्षण दिया जाए. अधिकारियों ने हिंसा की आशंका को देखते हुए कुछ इलाकों में स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने के आदेश दिए हैं. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है. राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय राज्य की आबादी का लगभग 30 फीसदी हैं जो 16 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे हैं. आंदोलन सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक होगा.

वहीं दूसरी तरफ एससी/एसटी एक्ट पर 20 मार्च को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आज होने वाला दलित आंदोलन वापस ले लिया गया है. संगठनों का कहना है कि वे सरकार को मांग पूरी करने के लिए और समय दे रहे हैं.  गौरतलब है कि दलितों के इस आंदोलन को  राम विलास पासवान, चिराग पासवान, उदित राज और सावित्री बाई फूले सरीखे एनडीए के दलित नेताओं ने समर्थन दिया था. इससे पहले 2 अप्रैल को हुए दलितों का आंदोलन हिंसक हो गया था, जिसके चलते सरकार इस आंदोलन को लेकर चिंतित थी. हालांकि आंदोलन वापस लेने से सरकार राहत की सांस ली है.

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15 नवंबर तक कुछ नहीं किया जा सकता- सरकार
बंद से पहले महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चन्द्रकांत पाटिल ने मराठा आरक्षण के पक्ष में प्रदर्शन कर रहे लोगों की आकांक्षाओं पर पानी फेरते हुए कहा कि उनकी मांगों के संबंध में 15 नवंबर तक कोई फैसला नहीं लिया जा सकता. उन्होंने कहा है कि मराठा समुदाय को आरक्षण देने के संबंध में समयबद्ध कार्यक्रम पेश करने की जिम्मेदारी महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को सौंपी गयी है, जो अपनी रिपोर्ट 15 नवंबर को देगा.

 

मराठा समाज की मांगें क्या हैं?
मराठा समाज 16% आरक्षण की मांग कर रहा है. ये समाज पिछड़ा वर्ग के तहत सरकारी नौकरी, शिक्षा के क्षेत्र में भी आरक्षण की मांग कर रहा है. पिछले दो सालों से महाराष्ट्र में ये आंदोलन चल रहा है. पिछले दो सालों में 60 से ज्यादा जगहों पर आंदोलन हुआ है. इतना ही नहीं मराठा समाज कोपर्डी गैंगरेप के दोषियों को फांसी देने की मांग कर रहा है. साल 2016 में कोपर्डी में नाबालिग से गैंगरेप हुआ था. महाराष्ट्र में मराठा आबादी 33% यानी करीब चार करोड़ है. ऐसे में कोई भी सरकार इस समाज को नाराज नहीं कर सकती. इस आंदोलन का नेतृत्व मराठा क्रांति मोर्चा कर रहा है. मराठा आंदोलन में लाखों लोग शामिल हो रहे हैं.

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आरक्षण के पीछे का वोट बैंक
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लगातार फडणवीस सरकार निशाने पर थी, पिछले महीने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जमकर हिंसा भी हुई थी, फडणवीस मराठा समाज को आरक्षण देने की बात तो लगातार कह रहे थे लेकिन मराठा समाज ये मांग कर रहा कि सरकार आरक्षण देने की समय सीमा बताए, आरक्षण को लेकर विवाद के पीछे बड़ा वोट बैंक का गणित भी है जिसे समझना जरूरी है.

 

महाराष्ट्र में 33 फीसदी मराठा समाज की आबादी है और मराठा समाज के करीब 90 फीसदी लोग हैं. छोटे या मूमिहीन किसानों की 288 विधानसभा की 75 सीटों पर हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका होती है.

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