किसानों को खरपतवार नियंतण्रका सुझाव दें अफसर :कृषि मंत्री

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Patna-Aug.5,2018-Bihar Agriculture Minister Prem Kumar is celebrating his birthday in Patna.

राज्य के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में वष्ा की स्थिति में सुधार होने से धान की रोपनी के कार्य में तेजी आ गई है। धान का अच्छा उत्पादन हो सके, इसके लिए जरूरी है कि हम धान की फसल को खरपतरवार से होने वाली क्षति से बचायें। खरपतवार का नियंतण्रनहीं किया जाये तो 33 प्रतिशत धान की क्षति हो सकती है। यह कीट एवं व्याधि से होने वाली क्षति से कहीं ज्यादा है। कृषि मंत्री ने कहा कि धान के प्रमुख खर-पतवार में सावाघास, मकरा, कोदो, बनरा, कनकवा, सफेद मुर्गा, भंडारा, बड़ी दुग्धी, जंगली धान, दूब तथा मोथा आदि हैं। जलीय क्षेत्रों में कर्मी तथा जलकुम्भी भी होती है। खरपतवार हमारे फसल के पौधों से पोषण, स्थान, प्रकाश एवं जल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। आरंम्भिक अवस्था में धान फसल के पौधों की वृद्धि दर खरपतवार के पौधों से कम रहने के कारण, ये प्रतिस्पर्धा में धान फसल के पौधों से आगे होकर उपज दर में कमी लाते हैं। धान फसल के पौधों की जिस अवस्था में खरपतवार अधिकतम कुप्रभाव डालते हैं, उसे प्रतिस्पर्धा की चरम अवधि कहा जाता है। यह अवधि धान फसल में बुआई के 15 से 45 दिन तक तथा रोपी गयी फसल में रोपाई के 30 से 45 दिन तक होती है। इस अवधि में धान फसल को खरपतवार पर नियंतण्ररखना चाहिए, ताकि उत्पादन प्रभावित नहीं हो सके। डॉ. कुमार ने पौधा संरक्षण संभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिया कि अपने क्षेत्रों का नियमित दौरा करते रहें। किसानों से व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क कर धान की फसल में उगने वाले खरपतवार एवं कीट-व्याधि के नियंतण्रके लिए आवश्यक सुझाव दें।

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