‘हलाला’ पर संविधान पीठ का गठन संभव

0
211

ट्रिपल तलाक के बाद निकाह हलाला और बहुविवाह की कानूनी वैधता को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ का गठन कर सकता है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार के जवाब दायर करने के बाद संविधान पीठ के गठन पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 22 मार्च को मुस्लिम समुदाय में प्रचलित बहुविवाह और निकाह हलाला की प्रथा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को सौंपने का निर्णय लिया था। इससे पहले, एक अन्य संविधान पीठ ने पिछले साल 22 अगस्त को सुन्नी मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक ही बार में तीन तलाक देने की पुरानी प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानविलकर और धनन्जय चन्द्रचूड की बेंच ने कहा कि हम इस पर गौर करेंगे। अदालत ने कहा कि केन्द्र का इस मामले में जवाब मिलने के बाद इसे संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। दिल्ली की रहने वाली समीना बेगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी शेखर और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने उसकी याचिका पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके ससुराल वाले याचिका वापस लेने और घर से निकाल देने की धमकी दे रहे हैं। इस पर अदालत ने कहा कि हम अन्य याचिकाओं के साथ ही उसकी याचिका को भी सूचीबद्ध करेंगे। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इन याचिकाओं पर अपना हलफनामा दाखिल करेगी। यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि हाल ही में सरकार ने कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई होने पर निकाह हलाला की प्रथा का विरोध करेगी। याचिका में संवधिान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन बताया गया : समीना बेगम, नफीसा खान, मौअल्लियम मोहसिन और भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने बहुविवाह प्रथा, निकाह हलाला, निकाह मुता (शिया समुदाय में अस्थाई विवाह की प्रथा) और निकाह मिस्यार (सुन्नी समुदाय में कम अवधि के विवाह की प्रथा) को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और इन्हें संवधिान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन बताया है। संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी, अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग, स्थान और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित और अनुच्छेद 21 जिंदगी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की गारंटी प्रदान करता है। उपाध्याय ने अदालत से कहा कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों को विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों द्वारा शासित किया जाता है। उन्होंने दलील दी कि व्यक्तिगत कानूनों को संवैधानिक वैधता और नैतिकता के मानदंडों को पूरा करना होगा क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 14, 15,21 का उल्लंघन नहीं कर सकते।

यह भी पढ़े  सर्वार्थ सिद्धि योग में भाई दूज आज

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here