सोशल मीडिया से फर्जी खबरों को मिल रहा है बढ़ावा

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PATNA NIRT KALA MANDIR MEIN RASHTRIYA SANGOSTHI KA UDGHATAN KERTE MINISTER NAND KISHORE YADAV

भारतीय नृत्य कला मंदिर में इंडियन फेडेरेशन ऑफ वर्किग जर्नलिस्ट्स की बिहार इकाई की ओर से ‘नए दौर की पत्रकारिता और भाषाई शिष्टता’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान आज के दौर की पत्रकारिता पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। साथ ही मौके पर पत्रकारों की गिरती भाषाई शिष्टता पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी पढ़ती नहीं है, इसलिए द्ध लिखना नहीं जानती है। द्ध लिखने के लिए बोल-बोल कर पढ़ने की जरूरत है।

मौके पर सूबे के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा कि आज के दौर की पत्रकारिता में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। पहले के अखबार जहां साहित्यिक मिजाज और तेवर के होते थे आज इसकी कमी होती जा रही है। यादव ने कहा कि आज के अखबारों में खेल, व्यापार, मनोरंजन के लिए विशेष रूप से जगह मिलती है, क्योंकि आज का युवा वर्ग इसे पढ़ने की चाहत रखता है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज के दौर में फेक न्यूज का भी बोलबाला बढ़ा है। सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें देखने को मिलती हैं। आज के पत्रकार खोजी पत्रकारिता में यकीन रखते हैं। इसमें वे क्या खोजते हैं इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जबकि टीवी पर आने वाले समाचारों और कार्यक्रमों के बारे में मंत्री ने कहा कि अब परिवार के साथ बैठकर टीवी देखना मुमकिन नहीं है। लोगों को भले यह डर हो कि सोशल मीडिया और टीवी पत्रकारिता आ जाने से प्रिंट मीडिया बंद हो जाएगा, तो ऐसा होने वाला नहीं है। प्रिंट मीडिया का अपना अस्तित्व है। आज भी लोग अखबार में छपी खबरों पर ही अधिक भरोसा करते हैं, बजाय सोशल मीडिया के।

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वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार के विक्रम राव ने कहा कि फॉलोअप का अखबार में अपना स्थान होता है। बोफोर्स कांड में फॉलोअप नहीं करना हम पत्रकारों की भूल थी। विदेश के अखबरों में फॉलोअप के लिए अलग से यूनिट होती है। इसके साथ ही उन्होंने आज के दौर की पत्रकारिता पर कहा कि आज लोग शॉर्टकट में हर चीज चाहते हैं, इसलिए भाषाई द्धता पर ध्यान नहीं देते हैं। जो कि पत्रकार और पत्रकारिता दोनों के लिए घातक है। सेमिनार के दौरान शिक्षाविद् ध्रुव कुमार ने पुराने और नए जमाने की पत्रकारिता पर जोर दिया। कहा कि पहले अखबार की सभी खबरें उप संपादक से लेकर संपादक तक की नजरों से होकर छपने के लिए जाती थीं। अब ऐसा नहीं होता है। मौके पर बीपीएससी के सदस्य राम किशोर सिंह, विधान पार्षद प्रो. संजय प्रसाद, आइएफडब्ल्यूजे के महासचिव सुधीर मधुकर, मोहन कुमार, मुकेश महान आदि मौजूद थे।

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