रजोनिवृत्ति के दौरान अपने पर खास ध्यान दें महिलाएं

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महिलाओं में सामान्य तौर पर 40-45 वर्ष के बाद मेनोपॉज की स्थिति आती है। यह महिलाओं के लिए काफी दिक्कत भरा फेज होता है क्योंकि इस दौरान शरीर कई प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है जिससे महिलाएं शुरू-शुरू में काफी असहज महसूस करती हैं। इस दौरान महिलाओं को अपने ऊपर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। दरअसल, महिलाओं को लम्बे समय से पीरियड्स की आदत हो जाती है, ऐसे में मेनोपज में स्टॉप के बाद शरीर में फिर से हारमोनल चेंज होने लगते हैं जिसके कारण सोच और समझ पर प्रभाव पड़ता है। ये बातें शनिवार को इंडियन मेनोपॉज सोसायटी की ओर से आयोजित सेमिनार में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने कहीं। सेमिनार का विषय था – ‘‘लेट कम्प्लीकेशन्स ऑफ मेनोपॉज’। इससे पहले सेमिनार का उद्घाटन सोसायटी की नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. रत्नावली चक्रवर्ती ने किया। इस दौरान डॉ. चक्रवर्ती ने ‘‘मेटाबोलिक एक्स सिंड्रोम इन 40 प्लस वीमेन’ विषय पर र्चचा की। इसी तरह, डॉ. कुमकुम सिन्हा ने कॉर्डियोवस्कुलर प्रोब्लम्स इन मेनोपॉजल वीमेन तथा डॉ. रेणु रस्तोगी ने ‘‘यूरिनरी इन्कंटीनेंस आफ्टर मेनोपॉज’ विषय पर र्चचा की। सेमिनार में डॉ. शांति राय, डॉ. मंजू गीता मिश्रा, डॉ. प्रमिला मोदी, डॉ. कुसुम, गोपाल कपूर, डॉ. उषा डिडवानिया तथा डॉ. सुषमा पांडेय समेत बड़ी संख्या में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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