निजी प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों पर करें कड़ी कार्रवाई :पटना हाईकोर्ट

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मैनेज कर निजी प्रैक्टिस या अन्य काम करने और सरकार से भी सेलरी लेने वाले डाक्टरों पर पटना उच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उसने स्वास्य विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वे पूरे मामले की जांच कर दोषी डाक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें जिससे ऐसी व्यवस्था पूरी तरह से समाप्त हो। कार्रवाई भी ऐसी हो कि सभी को सीख मिले और भविष्य के लिये नजीर साबित हो। न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी व न्यायमूर्ति नीलू अग्रवाल की पीठ ने प्रधान सचिव से आगे की कार्रवाई की रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले देने को कहा और सुनवाई 9 जुलाई के लिये स्थगित कर दी।प्रधान सचिव ने सौंपी गयी अपनी पहले की रिपोर्ट में कहा है कि लंबे समय से लापता सभी डाक्टरों के खिलाफ जांच करवायी जा रही है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। अभी तक 194 लापता डाक्टरों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। अन्य की जानकारी हासिल कर 263 डाक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें से 47 शिक्षक वर्ग के हैं जो विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पदस्थापित थे। अन्य 42 डाक्टरों के बारे में भी पता किया जा रहा है। न्यायालय ने यह दिशानिर्देश डा. रामाशिष प्रसाद सिंह के मामले में दिया है जिसके खिलाफ सरकार ने अपील दाखिल की है। अपील में कहा गया है कि डाक्टर लापता थे और उन्होंने कोई छुट्टी भी नहीं ली थी। उनका सेलरी और भत्ता रोक दिया गया तो एकल पीठ ने सभी बकाया चुकता करने को कहा। दो सदस्यीय पीठ ने इसे गंभीरता से लिया और इस मामले में सरकार को ही आड़े हाथ ले लिया। उसने प्रधान सचिव से कहा कि कई अधिकारियों की ही मिलीभगत से डाक्टर लापता रहते हैं और जब कार्रवाई की बारी आती है तो कई तरह का आधार देकर उनको सेवा में बता दिया जाता है। कई का नियुक्ति पत्र बाबू के दराज में रहता है। अब सरकार कहती है कि डाक्टर को बकाया देने का एकल पीठ का आदेश गलत है। पीठ ने कहा कि आजकल यह व्यवस्था हो गयी है कि डाक्टर मैनेज कर अपना निजी प्रैक्टिस करते हैं या विदेशों में पढ़ाते हैं। वह भारत में भी अपनी सरकारी सेवा दिखाते हैं और सेलरी लेते हैं। इसमें आपके ही अधिकारियों की मिलीभगत होती है। कोई भी अधिकारी सालों लापता रहकर बिना सेलरी के नहीं रह सकता है। वह जरूर दूसरा काम करता होगा। इसे देखते हुये प्रधान सचिव जांच करवायें और दोषी के खिलाफ ठोस कार्रवाई करें। इसी आलोक में प्रधान सचिव ने जांच कर अपनी सातवीं रिपोर्ट सौंपी है।

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