महाकाल की पूजा पद्धति में हस्तक्षेप से इनकार

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उच्चतम न्यायालय ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर स्थित ज्योतिर्लिंग को क्षरण से बचाने के लिए मंदिर समिति के सभी प्रस्ताव मान लिये हैं, साथ ही उसने पूजा पद्धति में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने आज मंदिर प्रबंधन समिति के उन सुझावों को मान लिया, जिनमें ज्योतिर्लिंग पर आरओ का पानी चढ़ाए जाने सहित विभिन्न कदमों की जानकारी दी गयी थी। न्यायालय ने कहा कि ऐतिहासिक ज्योतिर्लिंग को नुकसान से बचाने के लिए विभिन्न पक्षों की ओर से दिए गए प्रस्तावों को मंदिर प्रबंधन समिति के पास भेजा गया था। सभी पर विचार करते हुए समिति ने अपने सुझाव भेजे थे और न्यायालय ने उसे पूरी तरह से मान लिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पूजा कैसे हो, यह तय करना उसका काम नहीं है। पीठ ने कहा, हम सिर्फ इस बात को लेकर सुनवाई कर रहे हैं कि ज्योतिर्लिंग को नुकसान न पहुंचे। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और पूजन सामग्री चढ़ाने से शिवलिंग को नुकसान हो रहा था, जिसे लेकर याचिका दायर की गई थी।

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